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प्रह्लाद जोशी ने संभाली शिक्षा मंत्रालय की कमान, अधिकारियों संग बैठक में ले लिया बड़ा फैसला, जानें क्या रहा एजेंडा
शिक्षा मंत्रालय की कमान संभालने के साथ ही मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ प्रह्लाद जोशी की प्रारंभिक बैठकें शुरू हो गई हैं. माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में मंत्रालय परीक्षा सुधार, तकनीक आधारित मूल्यांकन प्रणाली, विश्वविद्यालयों में अनुसंधान और छात्रों से जुड़े लंबित विषयों पर तेजी से निर्णय लेने की दिशा में काम करेगा.
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केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री के रूप में कार्यभार संभाल लिया है. रविवार को उन्होंने मंत्रालय का कार्यभार संभाला और शिक्षा मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ एक उच्चस्तरीय बैठक भी की. जोशी को यह जिम्मेदारी ऐसे समय सौंपी गई है, जब देश में शिक्षा व्यवस्था, प्रतियोगी परीक्षाओं की पारदर्शिता और राष्ट्रीय शिक्षा नीति के प्रभावी क्रियान्वयन जैसे विषयों पर व्यापक चर्चा चल रही है.
धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा के बाद प्रह्लाद जोशी ने संभाला शिक्षा मंत्रालय
गौरतलब है कि राष्ट्रपति द्वारा पूर्व शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा स्वीकार किए जाने के बाद प्रधानमंत्री की सलाह पर प्रह्लाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है. कार्यभार संभालने के बाद प्रह्लाद जोशी ने तुरंत ही शिक्षा मंत्रालय के कामकाज से जुड़े वरिष्ठ अधिकारियों से बातचीत की. दरअसल शिक्षा मंत्रालय देश के भविष्य से जुड़ा अत्यंत महत्वपूर्ण मंत्रालय है. नए शिक्षा मंत्री के लिए राष्ट्रीय शिक्षा नीति के प्रभावी क्रियान्वयन के साथ-साथ उच्च शिक्षा, विद्यालयी शिक्षा, कौशल विकास और अनुसंधान को भी नई गति देने महत्वपूर्ण माना जा रहा है.
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शिक्षा मंत्रालय संभालते ही प्रह्लाद जोशी का ताबड़तोड़ एक्शन
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आपको बता दें कि शिक्षा मंत्रालय संभालते ही प्रह्लाद जोशी ने अधिकारियों के सामने एजेंडा क्लियर कर दिया है. सूत्रों के मुताबिक जोशी का बतौर शिक्षा मंत्री पहला काम होगा पीएम मोदी द्वारा घोषित पेपर लीक को लेकर कानून, जिसे हाल में ही मोदी कैबिनेट से मंजूरी दी गई है, उसको लेकर बिल लाना. इसके तहत पेपर लीक मामलों की सुनवाई फास्ट ट्रैक कोर्ट में हो पाएगी. संसद के मौजूदा सत्र में ही जोशी का पहला एजेंडा होगा बिल संसद में पेश करना और उसे पास कराना.
प्रह्लाद जोशी के समक्ष मुख्य एजेंडा क्या है?
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संसद में बीजेपी के नंबर को देखते हुए, और बतौर संसदीय कार्य मंत्री के तौर पर मिले अनुभव के आधार पर जोशी इस बिल को फ्लोर टेस्ट में आसानी से पास करा लेंगे ऐसा अनुमान है. सूत्र बताते हैं कि जोशी के सामने ये मुख्य एजेंडा है, जिसपर बैठक में चर्चा हुई.
1. पेपर लीक मामलों की जांच को लेकर बिल संसद में पेश करना
2. पेपर लीक, NTA, NEET को लेकर जांच सुनिश्चित करना
3. NTA के दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई
4. शिक्षा मंत्रालय में छात्रों की विश्वास बहाली
5. NEP-न्यू एजुकेशन पॉलिसी को लागू करना
6. NCERT को ठीक करना, विवादास्पद सिलेबस को बदलना
7 परीक्षा लीक प्रूफ कराना
इससे पहले शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त कार्यभार संभालने के बाद प्रह्लाद जोशी ने रविवार को कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन पर 'पूरा भरोसा' जताया है और इसीलिए उन्हें यह नई जिम्मेदारी सौंपी है। उन्होंने कहा कि वे शिक्षा विभाग से जुड़ी सभी जानकारियों की समीक्षा के लिए लगातार बैठकें कर रहे हैं।
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पद संभालने के बाद पत्रकारों से बात करते हुए जोशी ने कहा, "प्रधानमंत्री ने मुझ पर पूरा भरोसा जताया है और मुझे यह जिम्मेदारी सौंपी है। मैं कल कर्नाटक में था, रात को यहां पहुंचा और आज सुबह पद संभालने और मंत्रालय का काम देखने के लिए यहां आया हूं।"
उन्होंने कहा, "मैंने पूरे मंत्रालय को समझने की कोशिश की है। रविवार सुबह 10:00 बजे से दोपहर 3:00 बजे तक मैंने लगातार बैठकें कीं। यह विषय मेरे लिए नया है, इसलिए इसे पूरी तरह समझने के बाद मैं आपसे विस्तार से बात करूंगा।"
प्रह्लाद जोशी केंद्र सरकार के वरिष्ठ मंत्रियों में गिने जाते हैं. वह वर्तमान में उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण तथा नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय की जिम्मेदारी पहले से ही संभाल रहे हैं. इससे पहले वह संसदीय कार्य मंत्री, कोयला मंत्री और खान मंत्री जैसे महत्वपूर्ण विभागों का का कार्यभार संभाल चुके हैं. उनकी पहचान एक अनुभवी संसदीय रणनीतिकार और संगठनात्मक क्षमता वाले नेता के रूप में रही है. कर्नाटक की धारवाड़ लोकसभा सीट से लगातार पांच बार सांसद चुने जा चुके प्रह्लाद जोशी भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेताओं में शामिल हैं.
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Today, I assumed charge as the Union Minister for Education.
— Pralhad Joshi (@JoshiPralhad) ?ref_src=twsrc%5Etfw">July 26, 2026
I am grateful to Hon’ble Prime Minister Shri @narendramodi ji for placing his faith in me and entrusting me with this responsibility. I accept it with humility and a deep sense of duty.
ಇಂದು ಭಾರತ ಸರ್ಕಾರದ ಕೇಂದ್ರ ಶಿಕ್ಷಣ… pic.twitter.com/Ge2ulvf3L8
जोशी के सामने सबसे बड़ी चुनौती देश की परीक्षा प्रणाली
लंबे संसदीय अनुभव और प्रशासनिक कार्यशैली के कारण उन्हें सरकार में कई अहम जिम्मेदारियां मिलती रही हैं. फिलहाल जोशी के सामने सबसे बड़ी चुनौती देश की परीक्षा प्रणाली में लोगों का विश्वास मजबूत करना है. साथ ही प्रतियोगी परीक्षाओं की पारदर्शिता सुनिश्चित करना तथा राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत चल रहे सुधारों को गति देना भी उनकी प्राथमिकता है. इसके अलावा विद्यालयी शिक्षा की गुणवत्ता, उच्च शिक्षा संस्थानों में अनुसंधान को बढ़ावा, डिजिटल शिक्षा का विस्तार और कौशल आधारित शिक्षा को मजबूत करना भी उनकी प्राथमिकताओं में शामिल रहने की संभावना है.
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शिक्षा मंत्रालय की कमान संभालने के साथ ही मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ उनकी प्रारंभिक बैठकें शुरू हो गई हैं. माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में मंत्रालय परीक्षा सुधार, तकनीक आधारित मूल्यांकन प्रणाली, विश्वविद्यालयों में अनुसंधान और छात्रों से जुड़े लंबित विषयों पर तेजी से निर्णय लेने की दिशा में काम करेगा. शिक्षा क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों और विद्यार्थियों की नजर अब इस बात पर रहेगी कि नए शिक्षा मंत्री इन चुनौतियों से किस प्रकार निपटते हैं और शिक्षा व्यवस्था में सुधार की प्रक्रिया को किस गति से आगे बढ़ाते हैं.