महाराष्ट्र सरकार का बड़ा फैसला, जबरन धर्म परिवर्तन कराने वालों पर होगी कड़ी कार्रवाई, नए कानून से बढ़ीं सजा और नियम
Religious Conversions Law: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की मंजूरी मिलने के बाद राज्य सरकार ने 'महाराष्ट्र धर्म की स्वतंत्रता अधिनियम, 2026' को सरकारी राजपत्र (गजट) में प्रकाशित कर दिया है. इसके साथ ही यह कानून पूरे राज्य में लागू हो गया है.
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Religious Conversions Law: महाराष्ट्र में अब जबरन या धोखे से धर्म परिवर्तन कराने वालो के खिलाफ सख्त कानून लागू हो गया है. राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की मंजूरी मिलने के बाद राज्य सरकार ने 'महाराष्ट्र धर्म की स्वतंत्रता अधिनियम, 2026' को सरकारी राजपत्र (गजट) में प्रकाशित कर दिया है. इसके साथ ही यह कानून पूरे राज्य में लागू हो गया है. इससे पहले इसी साल मार्च मे बजट सत्र के दौरान महाराष्ट्र विधानसभा और विधान परिषद.., दोनो सदनों ने इस विधेयक को मंजूरी दी थी. अब राष्ट्रपति की सहमति मिलने के बाद इसे कानूनी रूप से लागू कर दिया गया है. सरकार का कहना है कि इस कानून का मकसद किसी की धार्मिक आजादी छीनना नहीं, बल्कि जबरन, धोखाधड़ी या लालच देकर कराए जाने वाले धर्म परिवर्तन पर रोक लगाना है.
अपनी मर्जी से धर्म बदलना है तो पहले देनी होगी जानकारी
इस नए कानून में यह भी साफ किया गया है कि अगर कोई व्यक्ति अपनी इच्छा से किसी दूसरे धर्म को अपनाना चाहता है, तो उसे भी कुछ जरूरी नियमों का पालन करना होगा. ऐसे व्यक्ति को धर्म परिवर्तन करने से कम से कम 60 दिन पहले अपने जिले के जिला मजिस्ट्रेट (डीएम) को लिखित रूप में इसकी जानकारी देनी होगी. धर्म परिवर्तन के बाद भी सरकार द्वारा तय की गई प्रक्रिया पूरी करना जरूरी होगा. यानी अब स्वेच्छा से धर्म बदलने के मामलों में भी पूरी प्रक्रिया रिकॉर्ड में रखी जाएगी, ताकि बाद में किसी तरह का विवाद या शिकायत न हो.
धोखे या दबाव से धर्म परिवर्तन कराने पर मिलेगी कड़ी सजा
कानून के अनुसार अगर कोई व्यक्ति किसी को डराकर, धमकाकर, झूठ बोलकर, लालच देकर, गलत जानकारी देकर या शादी का झांसा देकर धर्म परिवर्तन कराता है, तो यह गंभीर अपराध माना जाएगा. ऐसे मामलों में पहली बार दोषी पाए जाने पर आरोपी को 7 साल तक की जेल हो सकती है. अगर वही व्यक्ति दोबारा ऐसा अपराध करता है, तो उसकी सजा बढ़ाकर 10 साल तक की जा सकती है. सरकार का मानना है कि इस सख्त सजा से ऐसे मामलों पर रोक लगाने में मदद मिलेगी और लोगों को धोखे से धर्म बदलने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकेगा.
अब परिवार के लोग भी दर्ज करा सकेंगे शिकायत
इस कानून में पीड़ित व्यक्ति के अधिकारों के साथ उसके परिवार को भी अहम भूमिका दी गई है. अगर किसी व्यक्ति का आरोप है कि उसका धर्म जबरन या धोखे से बदला गया है, तो सिर्फ वही नहीं बल्कि उसके माता-पिता, भाई-बहन या अन्य करीबी रिश्तेदार भी पुलिस में शिकायत दर्ज करा सकते हैं. सरकार का कहना है कि कई बार पीड़ित व्यक्ति दबाव या डर की वजह से सामने नहीं आ पाता, ऐसे में परिवार के लोगों को शिकायत करने का अधिकार देना जरूरी था.
सरकार ने साफ किया, स्वैच्छिक धर्म परिवर्तन और अंतरधार्मिक शादी पर नहीं है रोक
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि इस कानून का उद्देश्य किसी की धार्मिक स्वतंत्रता पर रोक लगाना नहीं है. सरकार का कहना है कि अगर कोई व्यक्ति अपनी इच्छा से धर्म बदलता है या दो अलग-अलग धर्मों के लोग अपनी मर्जी से शादी करते हैं, तो इस कानून से उन्हें कोई परेशानी नहीं होगी. यह कानून सिर्फ उन मामलों पर लागू होगा, जहां धर्म परिवर्तन के लिए जबरदस्ती, धोखाधड़ी, लालच, अनुचित दबाव या शादी का झूठा वादा किया गया हो.
इन राज्यों की सूची में शामिल हुआ महाराष्ट्र
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इस कानून के लागू होने के बाद महाराष्ट्र भी उन राज्यों में शामिल हो गया है, जहां धर्मांतरण विरोधी कानून पहले से लागू हैं. इनमें उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, ओडिशा, छत्तीसगढ़ और हिमाचल प्रदेश जैसे राज्य शामिल हैं. अब महाराष्ट्र में भी ऐसे मामलों में सख्त कानूनी कार्रवाई का रास्ता साफ हो गया है. सरकार का कहना है कि इस कानून का उद्देश्य लोगों की धार्मिक स्वतंत्रता की रक्षा करना और किसी भी तरह के जबरन या धोखे से कराए जाने वाले धर्म परिवर्तन को रोकना है.