जिस पर देशकरता है भरोसा
Advertisement

बंगाल उपचुनाव से पहले 'ममता' को बड़ा झटका... चुनाव आयोग ने TMC के नाम और चुनाव चिह्न के इस्तेमाल पर लगाई रोक; जानें पूरा मामला

चुनाव आयोग ने TMC के नाम और चुनाव चिह्न पर अंतरिम आदेश जारी करते हुए ममता बनर्जी और ऋतब्रत बनर्जी गुट को आगामी उपचुनाव में पार्टी के नाम और मौजूदा सिंबल के इस्तेमाल से रोक दिया है.

बंगाल उपचुनाव से पहले 'ममता' को बड़ा झटका... चुनाव आयोग ने TMC के नाम और चुनाव चिह्न के इस्तेमाल पर लगाई रोक; जानें पूरा मामला
Image Source: IANS
Advertisement

पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के नाम और चुनाव चिह्न को लेकर चल रही खींचतान के बीच चुनाव आयोग ने बड़ा अंतरिम आदेश जारी किया है. आयोग ने ममता बनर्जी और ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले दोनों गुटों को आगामी विधानसभा उपचुनाव में 'ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस' नाम और पार्टी के मौजूदा चुनाव चिह्न का इस्तेमाल करने से रोक दिया है. फिलहाल यह व्यवस्था सिर्फ उपचुनावों के लिए लागू की गई है. 

चुनाव आयोग ने दोनों पक्षों को अपनी अलग चुनावी पहचान के लिए नाम और सिंबल के विकल्प देने का निर्देश दिया है. आयोग के मुताबिक दोनों गुटों को तीन-तीन नाम और तीन-तीन फ्री चुनाव चिह्न के विकल्प देने होंगे. इन विकल्पों को प्राथमिकता के क्रम में आयोग के सामने रखना होगा. बता दें कि आगे इस मामले में किसी एक पक्ष के पास नाम और सिंबल का फैसला हो सकता है. 

दोनों गुट को दें है विकल्प 

Advertisement

आयोग के निर्देश के अनुसार दोनों गुटों को 18 सितंबर 2026 को सुबह 11 बजे तक अपने पसंदीदा तीन नाम और तीन चुनाव चिह्नों के विकल्प जमा करने हैं. इसके बाद उपचुनाव के लिए दोनों पक्षों को अलग-अलग नाम और चुनाव चिह्न आवंटित किए जाएंगे. आयोग ने यह भी स्पष्ट किया है कि दोनों गुट चाहें तो अपने नए नाम में मूल पार्टी से जुड़ाव दिखाने वाला विकल्प दे सकते हैं. हालांकि, 'ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस' नाम का सीधे इस्तेमाल नहीं किया जा सकेगा. इसी तरह पार्टी के लिए आरक्षित 'दो फूल और घास' वाले चुनाव चिह्न का इस्तेमाल भी दोनों पक्ष नहीं कर पाएंगे. जानकारी देते चलें कि यह फैसला ऐसे समय आया है जब नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा सीटों पर होने वाले उपचुनाव को लेकर दोनों गुट अपने-अपने उम्मीदवार मैदान में उतार चुके हैं. ऐसे में चुनाव प्रचार और मतदाताओं के बीच अपनी पहचान को लेकर दोनों पक्षों के सामने अब नई स्थिति पैदा हो गई है.

आयोग का यह अंतिम फैसला नहीं

चुनाव आयोग ने अपने आदेश में यह भी साफ कर दिया है कि मौजूदा व्यवस्था को अंतिम फैसला नहीं माना जाएगा. पार्टी के नाम, संगठन और चुनाव चिह्न पर असली अधिकार को लेकर चल रहे मूल विवाद की सुनवाई Symbols Order 1968 के पैरा 15 के तहत जारी रहेगी. यानी अभी दोनों गुटों को सिर्फ आगामी उपचुनावों के लिए अलग-अलग नाम और चुनाव चिह्न के साथ आगे बढ़ना होगा. पार्टी के नाम और स्थायी चुनाव चिह्न पर अंतिम स्थिति आयोग के विस्तृत फैसले के बाद ही तय होगी.

दोनों पक्षों ने आयोग के सामने रखी अपनी-अपनी दलील

Advertisement

इस मामले में चुनाव आयोग ने गुरुवार को दोनों गुटों की अलग-अलग सुनवाई की. सबसे पहले ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाला गुट आयोग के सामने पहुंचा. प्रतिनिधिमंडल में ऋतब्रत बनर्जी के अलावा चंद्रिमा भट्टाचार्य, अकरुल जमान, अरूप रॉय और एक वकील शामिल थे. इस गुट ने अरूप रॉय को पार्टी का चेयरपर्सन चुने जाने की बात भी कही है. सुनवाई के बाद ऋतब्रत बनर्जी ने कहा कि उनके पक्ष ने आयोग के सवालों के जवाब दिए हैं और जल्द निर्णय लेने का अनुरोध किया है. उन्होंने उपचुनावों की नजदीकी का हवाला देते हुए कहा कि दोनों पक्ष नामांकन भी दाखिल कर चुके हैं.

ममता गुट ने आदेश को बताया आधारहीन 

इसके बाद ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट की ओर से डेरेक ओ'ब्रायन, कल्याण बनर्जी, महुआ मोइत्रा और सागरिका घोष आयोग के सामने पहुंचे. कल्याण बनर्जी ने अंतरिम आदेश का विरोध करते हुए कहा कि इस तरह का आदेश जारी करने का कोई आधार नहीं है. ममता गुट ने पार्टी के संविधान का हवाला देते हुए कहा कि संगठनात्मक चुनाव पांच साल के भीतर कराए जाते हैं और अगला संगठनात्मक चुनाव 31 जनवरी 2027 तक पूरा किया जाना है. इसके विपरीत ऋतब्रत गुट का कहना है कि राष्ट्रीय कार्यसमिति का गठन हर तीन साल में होना चाहिए था और पिछली कार्यसमिति का कार्यकाल फरवरी 2025 में समाप्त हो चुका है.

Advertisement

22 जून के बाद बढ़ा विवाद

दोनों गुटों के बीच मतभेद 22 जून को और खुलकर सामने आए. ऋतब्रत बनर्जी ने बागी नेताओं की बैठक बुलाकर नई राष्ट्रीय कार्यसमिति बनाने का ऐलान किया था. इसके बाद पार्टी के संगठन, नाम और चुनाव चिह्न को लेकर दोनों पक्षों ने चुनाव आयोग का रुख किया. अब आयोग के अंतरिम आदेश के बाद दोनों गुटों को उपचुनाव में अलग-अलग चुनावी पहचान के साथ उतरना होगा. हालांकि, यह तस्वीर अभी स्थायी नहीं है. पार्टी के नाम और चुनाव चिह्न को लेकर अंतिम अधिकार किस पक्ष को मिलेगा, इसका फैसला आयोग की आगे की सुनवाई और Symbols Order 1968 के पैरा 15 के तहत होने वाली प्रक्रिया से तय होगा.

6 अक्टूबर को नंदीग्राम और रेजीनगर में वोटिंग

Advertisement

पश्चिम बंगाल की नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा सीटों पर 6 अक्टूबर को उपचुनाव होना है. दोनों सीटों पर TMC के दोनों गुटों ने अपने-अपने उम्मीदवार उतारे हैं. यही वजह है कि चुनाव से ठीक पहले पार्टी के नाम और चुनाव चिह्न पर आयोग का अंतरिम आदेश इस पूरे विवाद में अहम पड़ाव माना जा रहा है.

यह भी पढ़ें

बताते चलें कि चुनाव आयोग के इस आदेश से इतना तय है कि उपचुनाव में दोनों गुट एक ही नाम और एक ही चुनाव चिह्न के साथ मैदान में नहीं उतर सकेंगे. अब नजर इस बात पर होगी कि दोनों पक्ष 18 सितंबर तक कौन-कौन से नाम और चुनाव चिह्न के विकल्प आयोग को सौंपते हैं और आगे मूल विवाद पर आयोग क्या फैसला करता है. इस तरह TMC के नाम और चुनाव चिह्न को लेकर चल रही लड़ाई का एक अध्याय फिलहाल अंतरिम व्यवस्था के साथ आगे बढ़ा है, लेकिन इसकी अंतिम तस्वीर अभी बाकी है.

Tags

Advertisement
टिप्पणियाँ 0
G
Guest (अतिथि)
LIVE
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement
शॉर्ट्स
वेब स्टोरीज़
होम वीडियो खोजें