जेल से बाहर आते ही सपा नेता आजम खान को ED ने हिरासत में लिया, रिहाई के चंद मिनट बाद क्यों हुई कार्रवाई?
आजम खान शनिवार शाम रामपुर जेल से रिहा हुए, लेकिन जेल के गेट पर ही ED ने उन्हें हिरासत में ले लिया. इस कार्रवाई पर आजम खां ने नाराजगी जताते हुए कहा कि क्या मुसलमान होने और यूनिवर्सिटी व स्कूल बनाने की यही सजा है?
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समाजवादी पार्टी (सपा) के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री आजम खान शनिवार शाम कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद जेल से रिहा हुए. हालांकि, जेल से बाहर आते ही उनकी मुश्किलें फिर बढ़ गईं. रामपुर जिला जेल के गेट पर ही प्रवर्तन निदेशालय (ED) की टीम ने उन्हें हिरासत में ले लिया. जेल से रिहाई के कुछ ही देर बाद हुई इस कार्रवाई ने पूरे मामले को नया मोड़ दे दिया.
आजम खान ने क्या कहा?
रामपुर जेल से रिहा होने के बाद, समाजवादी पार्टी के नेता आज़म खान ने कहा, 'अब कहने के लिए बचा ही क्या है? मैं क्या कहूँ? कानून तो जैसे खत्म ही हो गया है. क्या मुसलमान होने की यही सजा है? हमारी गलती बस इतनी थी कि एक मुसलमान ने यूनिवर्सिटी बनाई. यही हमारा गुनाह है. हमने बच्चों के लिए स्कूल बनवाए। क्या यह हमारा गुनाह है?'
Rampur, Uttar Pradesh: After being released from Rampur jail, Samajwadi Party leader Azam Khan says, "What is there left to say? What can I say? The law has ceased to exist. This is the punishment for being a Muslim? Our mistake was that a university was built by a Muslim. That is our crime. We built schools for children. Is that our crime?"
— IANS (@ians_india) October 31, 2026
ईडी ने हिरासत में लेने के बाद गिरफ्तारी की बताई प्रक्रिया
ईडी की तरफ से जारी बयान में बताया गया, 'हमने आजम खान को हिरासत में ले लिया है। प्रक्रिया पूरी होने के बाद हम उसे गिरफ्तार करेंगे और गाजियाबाद पीएमएलए कोर्ट में पेश करेंगे.' उधर, जेल के बाहर सपा कार्यकर्ताओं और समर्थकों की भीड़ लगातार बढ़ती रही. स्थिति को देखते हुए पुलिस-प्रशासन अलर्ट हो गया और आसपास के थानों से अतिरिक्त पुलिस बल बुलाया गया. बता दें कि आजम खां पैन कार्ड वाले मामले में रिहा हुए थे, तभी ईडी ने उन पर यह कार्रवाई की.
दो पैन कार्ड मामले में हाई कोर्ट से मिली थी राहत
इससे पहले इलाहाबाद हाई कोर्ट ने 29 अक्टूबर को दो पैन कार्ड रखने के मामले में आजम खान और उनके बेटे अब्दुल्ला आजम को बड़ी राहत दी थी. अदालत ने दोनों की जमानत अर्जी मंजूर करते हुए उनकी सजा निलंबित कर दी। हालांकि, दोषसिद्धि पर रोक लगाने की मांग खारिज कर दी गई. न्यायमूर्ति समित गोपाल की एकलपीठ ने दोनों की पुनरीक्षण याचिकाओं पर सुनवाई के बाद यह फैसला सुनाया. याचिकाओं में अधीनस्थ अदालतों द्वारा दो पैन कार्ड रखने के मामले में सुनाई गई सजा और दोषसिद्धि को चुनौती दी गई थी.
क्या है दो पैन कार्ड से जुड़ा पूरा मामला?
अभियोजन के अनुसार, यह मामला कथित तौर पर अलग-अलग जन्मतिथियों का उल्लेख करने वाले दूसरे पैन कार्ड को बनवाने और उसके इस्तेमाल से जुड़ा है. आरोपों में चुनावी नामांकन पत्रों में दूसरे पैन कार्ड के कथित इस्तेमाल का पहलू भी शामिल है. आजम खान और अब्दुल्ला आजम ने निचली अदालत के दोषसिद्धि और सजा के फैसले को आपराधिक पुनरीक्षण याचिकाओं के जरिए हाई कोर्ट में चुनौती दी थी. इसी क्रम में दोनों ने सजा निलंबित करने और जमानत देने की मांग की थी.
दोषसिद्धि बरकरार
दोषसिद्धि पर रोक और सजा निलंबन में हाई कोर्ट ने दोनों की सजा निलंबित करते हुए जमानत मंजूर की, लेकिन दोषसिद्धि पर रोक लगाने की मांग खारिज कर दी. ऐसे में दोषसिद्धि का आदेश बरकरार रहेगा. पुनरीक्षण याचिकाओं पर अंतिम फैसला अलग से होना है.
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बताते चलें कि आजम खां की रिहाई के तुरंत बाद ईडी की कार्रवाई ने इस मामले को एक नया मोड़ दे दिया है. अब सबकी नजरें गाजियाबाद की पीएमएलए कोर्ट में होने वाली पेशी और आगे की कानूनी प्रक्रिया पर टिकी हैं. वहीं, इस पूरे घटनाक्रम पर समाजवादी पार्टी और आजम खां के अगले कदम भी अहम होंगे.