नेशनल कॉन्फ्रेंस में खींचतान, मुश्किल में अब्दुल्ला सरकार! 21 विधायकों ने की बगावत! रख दीं ये शर्तें, Video
27 अक्टूबर को कैबिनेट में 4 नए मंत्रियों को शपथ दिलाई गई और सतीश शर्मा को बाहर कर दिया गया. विरोध यहीं से फूटा और कई विधायकों ने मीटिंग कर विरोध जताया.
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जम्मू कश्मीर की सियासत में उस वक्त उथल पुथल मच गई जब कई विधायक मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के खिलाफ एकजुट हो गए. नेशनल कॉन्फ्रेंस के भीतर बड़ी बगावत फूट पड़ी. बताया जा रहा है पार्टी के करीब 21 विधायकों ने गुप्त बैठक की है.
पार्टी में इस बगावत के पीछे अब्दुल्ला सरकार का एक बड़ा फैसला माना जा रहा है. जो कैबिनेट विस्तार के दौरान लिया गया था. ये बात 27 अक्टूबर की है. जब 4 नए मंत्रियों को शपथ दिलाई गई और सतीश शर्मा को कैबिनेट से बाहर कर दिया गया.
कैबिनेट विस्तार में दावेदारों को नहीं मिली जगह
अब्दुल्ला कैबिनेट विस्तार के बाद से ही मंत्री बनने का दावा ठोक रहे विधायकों की टीस खुलकर फूट पड़ी. 30 अक्टूबर को शुक्रवार दोपहर 18 विधायकों ने श्रीनगर में लोलाब विधायक कैसर जमशेद लोन के घर बैठक की. जबकि 6 विधायक वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए शामिल हुए. इन विधायकों ने मुख्यमंत्री के सलाहकार नासिर सोगामी और 27 अक्टूबर को कैबिनेट विस्तार में बने 4 नए मंत्रियों को हटाने की मांग की.
उन्होंने CM अब्दुल्ला के सलाहकार पर आरोप लगाया कि पार्टी नेतृत्व को गुमराह कर रहे हैं और संगठन में कामकाज में दखल दे रहे हैं. बागी विधायकों ने बैठक में CM अब्दुल्ला के खिलाफ लगभग आर-पार की लड़ाई छेड़ दी थी.
बागी विधायकों की क्या हैं मांगें?
- CM अब्दुल्ला के सलाहकार नासिर सोगामी को हटाने की मांग
- पार्टी के कामकाज में नासिर सोगामी के दखल पर रोक की मांग
- उपमुख्यमंत्री सुरिंदर चौधरी को हटाए जाने की मांग
- कैबिनेट में दो साल पूरे कर चुके मंत्रियों को हटाए जाने की मांग
- मंत्रिमंडल में क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व एकसमान किए जाने पर जोर
विरोध में उतरे विधायकों ने यह भी आरोप लगाए कि जिन मंत्रियों पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप थे, वे आज भी सत्ता की मलाई खा रहे हैं. हालांकि विधायकों ने पार्टी छोड़ने की बात नहीं कही है. जम्मू कश्मीर विधानसभा की मौजूदा स्थिति की बात करें तो यहां कुल सीटें 90 हैं. बहुमत के लिए 46 का आंकड़ा चाहिए. गठबंधन के साथ नेशनल कॉन्फ्रेंस की सरकार है. इनमें NC के पास 42 सीटें हैं, कांग्रेस-6, AAP- 1, CPIM(M)- 1 और 4 निर्दलीय सत्ता में शामिल हैं. ऐसे में 21 से 24 विधायकों की बगावत अब्दुल्ला सरकार को मुश्किल में डाल सकती है.
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