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'सत्ता में रहते हुए कुछ किया नहीं...', मायावती ने कांग्रेस-सपा पर लगाया ‘दोहरे चरित्र’ का आरोप, महिला आरक्षण मुद्दे पर खोली पोल

बसपा सुप्रीमो मायावती ने कांग्रेस और समाजवादी पार्टी पर हमला करते हुए महिला आरक्षण पर कांग्रेस के रुख को दिखावा बताया. उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने सत्ता में रहते हुए SC, ST और OBC के आरक्षण को गंभीरता से लागू नहीं किया और इसे अवसरवादी राजनीति करार दिया.

'सत्ता में रहते हुए कुछ किया नहीं...', मायावती ने कांग्रेस-सपा पर लगाया ‘दोहरे चरित्र’ का आरोप, महिला आरक्षण मुद्दे पर खोली पोल
Image Source: IANS
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बहुजन समाज पार्टी की प्रमुख मायावती ने एक बार फिर कांग्रेस और समाजवादी पार्टी पर निशाना साधा है. उन्होंने कहा कि महिला आरक्षण को लेकर कांग्रेस का मौजूदा रुख केवल दिखावा है. मायावती ने कांग्रेस को अवसर के अनुसार रुख बदलने वाली पार्टी बताते हुए आरोप लगाया कि सत्ता में रहते हुए उसने कभी SC, ST और OBC वर्गों के आरक्षण को पूरी तरह लागू करने की गंभीर कोशिश नहीं की. उनके मुताबिक, अब इन वर्गों के अधिकारों की बात करना कांग्रेस की राजनीतिक रणनीति का हिस्सा भर है.

सोशल मीडिया के जरिए कांग्रेस पर प्रहार

बसपा सुप्रीमो ने कहा कि इन वर्गों को ऐसे दोहरे चरित्र वाली पार्टियों से सावधान रहकर अपने अधिकारों और आत्मनिर्भरता पर ध्यान देना चाहिए. शुक्रवार को सोशल मीडिया के माध्यम से कांग्रेस पर कड़ा प्रहार किया. उन्होंने कहा कि एससी, एसटी व ओबीसी के संवैधानिक व कानूनी अधिकारों के प्रति कांग्रेस का रवैया हमेशा ढुलमुल रहा है. मायावती ने आरोप लगाया कि महिला आरक्षण में इन वर्गों की भागीदारी की बात करने वाली कांग्रेस ने केंद्र की सत्ता में रहते हुए कभी भी इनका आरक्षण कोटा पूरा करने की गंभीर पहल नहीं की. उन्होंने कांग्रेस को अवसरवादी पार्टी करार दिया.

मंडल कमीशन और आरक्षण पर उठाए सवाल

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उन्होंने कहा कि ना ही ओबीसी समाज हेतु मंडल कमीशन की रिपोर्ट के हिसाब से उन्हें सरकारी नौकरी व शिक्षा के क्षेत्र में 27 प्रतिशत आरक्षण को भी लागू किया, जिसे फिर बसपा के अथक प्रयासों से पूर्व प्रधानमंत्री वी.पी. सिंह की सरकार में लागू किया गया था, जो सर्वविदित है. उन्होंने कहा कि इसी प्रकार, यू.पी. में पिछड़े मुस्लिमों को ओबीसी का लाभ देने के लिए, पिछड़ा वर्ग आयोग की जुलाई 1994 में ही आई रिपोर्ट को भी सपा सरकार ने ठंडे बस्ते में डालकर इसे लागू नहीं किया था, जिसे फिर यहां बी.एस.पी. की दिनांक 3 जून सन् 1995 में पहली बनी सरकार ने इसे तुरन्त लागू किया, जो कि अब यही सपा अपना रंग बदलकर अपने राजनीतिक स्वार्थ में इनकी महिलाओं को अलग से आरक्षण देने की बात कर रही है.

सपा के रुख पर भी साधा निशाना

बसपा मुखिया ने कहा कि इस प्रकार, अन्य मामलों की तरह इस मामले में भी सपा जब सरकार में नहीं है तो अलग रवैया अपना रही है, किंतु जब सरकार में होती है तो अलग संकीर्ण जातिवादी व तिरस्कारी रवैया अपनाती है. अतः इन सभी वर्गों को ऐसी सभी छलावा एवं दोहरे चरित्र वाली पार्टियों से हमेशा सावधान रहना होगा, तभी कुछ बेहतर संभव हो पाएगा. उन्होंने कहा कि जहां तक महिला आरक्षण के लिए पिछली (सन् 2011) जनगणना के आधार पर परिसीमन करने का सवाल है, तो इस बारे में यही कहना है कि यदि इसे जिन भी कारणों से जल्दी लागू करना है तो फिर इसी जनगणना के आधार पर करना है और यदि वर्तमान में कांग्रेस पार्टी केंद्र की सत्ता में होती तो फिर यह पार्टी भी बीजेपी की तरह ही यही कदम उठाती.

परिसीमन और महिला आरक्षण पर राय

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मायावती ने कहा कि कुल मिलाकर, कहने का तात्पर्य यह है कि देश में एससी, एसटी व ओबीसी एवं मुस्लिम समाज के वास्तविक हित, कल्याण व उनके भविष्य संवारने आदि के किसी भी मामले में कोई भी पार्टी गम्भीर नहीं रही है. उन्होंने कहा कि महिला आरक्षण के मामले में इन वर्गों को अभी जो कुछ भी मिलने वाला है, तो उसे इनको फिलहाल स्वीकार कर लेना चाहिये और इस मामले में आगे अच्छा वक्त आने पर इनके हितों का सही से पूरा ध्यान रखा जायेगा, अर्थात् इन्हें किसी के भी बहकावे में नहीं आना है क्योंकि इनको खुद अपने पैरों पर खड़े होकर अपने समाज को आत्मनिर्भर एवं मजबूत बनाना है. यही सलाह है. 

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बताते चलें कि मायावती ने कांग्रेस और सपा दोनों पर निशाना साधते हुए आरक्षण के मुद्दे पर उनकी नीयत पर सवाल उठाए हैं. उन्होंने साफ संदेश दिया है कि इन वर्गों को किसी भी राजनीतिक बहकावे में आए बिना अपने अधिकारों और मजबूती पर खुद ध्यान देना होगा.

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