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PM मोदी के गढ़ वाराणसी में BJP को बड़ा झटका, सपा को मिला क्लीन स्वीप, दो सीटों पर दर्ज की जीत

पीएम मोदी के गढ़ वाराणसी में समाज वादी पार्टी ने क्लीन स्वीप किया है. वाराणसी की शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्र की दोनों सीटों पर सपा ने शानदार प्रदर्शन कर सियासी हलचल तेज कर दी है. दरअसल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में समाजवादी पार्टी ने शानदार प्रदर्शन करते हुए इन दोनों ही सीटों पर जीत दर्ज की है.

Image Credits: IANS
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मोदी के  संसदीय क्षेत्र वाराणसी में बीजेपी को ज़ोर का झटका लगा है, जिसने सियासी हलचल तेज कर दी है. विधान सभा चुनाव का सेमीफाइनल कहलाने वाले MLC चुनाव के परिणामों ने बीजेपी की चुनौती बढ़ा दी है. पूरे उत्तर प्रदेश की विधान परिषद सीटों के परिणामों में बीजेपी ने कुल मिलाकर बहुमत और बढ़त दर्ज की है, हालांकि वाराणसी की शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्र की दोनों सीटों पर सपा ने शानदार प्रदर्शन कर सियासी हलचल तेज कर दी  है. दरअसल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में समाजवादी पार्टी ने शानदार प्रदर्शन करते हुए इन दोनों ही सीटों पर जीत दर्ज की है. 
 
सपा के लाल बिहारी यादव ने बीजेपी के प्रमोद कुमार मिश्रा को हराया
 
वाराणसी शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में सपा के लाल बिहारी यादव ने बीजेपी के प्रमोद कुमार मिश्रा को 4,898 मतों से हराया.  साल 2020 के चुनाव में मिश्रा निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर मैदान में थे और लाल बिहारी यादव से महज 936 मतों से हार गए थे. इस बार जीत का अंतर काफी बढ़ गया. जीत के बाद लाल बिहारी यादव ने शिक्षकों का समर्थन मिलने का दावा करते हुए सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव को इसका श्रेय दिया. 
 
जीत के बाद क्या बोले लाल बिहारी यादव 
 
जीत के बाद लाल बिहारी यादव ने कहा, “पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष के सकारात्मक दृष्टिकोण के कारण सपा प्रदेश की सभी सीटों पर मजबूती से चुनाव लड़ सकी.  जिस तरह मुलायम सिंह यादव को शिक्षक समुदाय का नेता माना जाता था, उसी तरह अखिलेश यादव की भी शिक्षकों के प्रति वैसी ही सोच है.”
 
सपा के आशुतोष सिन्हा ने जीत की दर्ज 
 
वहीं वाराणसी स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में समाजवादी पार्टी के ही उम्मीदवार आशुतोष सिन्हा ने जीत दर्ज की. यहां समाजवादी पार्टी के आशुतोष सिन्हा और बीजेपी के केदारनाथ सिंह के बीच मुकाबला रहा. नौवें राउंड की गिनती के बाद सपा उम्मीदवार आशुतोष सिन्हा को 50,462 वोट और बीजेपी के केदारनाथ सिंह को 33,478 वोट मिले हैं, जिससे आशुतोष सिन्हा 16,984 वोटों से आगे चल रहे हैं. इस सीट पर आशुतोष सिन्हा की निर्णायक जीत तय मानी जा रही थी.
 
बीजेपी को सपा ने दिया बड़ा झटका 
 
वाराणसी की दोनों सीटों पर सपा का मजबूत प्रदर्शन इसलिए भी अहम है, क्योंकि यह क्षेत्र प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संसदीय क्षेत्र है.राजनीतिक विश्लेषण के लिहाज से इसे बीजेपी के स्थानीय संगठन और मतदाता आधार के सामने एक चुनौती के तौर पर देखा जा रहा है. ऐसे में अब वाराणसी में सपा की जीत को स्थानीय राजनीतिक समीकरणों के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है. 
 
क्या हैं शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्र?
 
विधान परिषद वाले राज्यों में शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों के लिए अलग से चुनाव कराए जाते हैं.इन सीटों पर आम जनता के बजाय निर्धारित पात्रता पूरी करने वाले पंजीकृत शिक्षक और स्नातक मतदाता मतदान करते हैं.भारतीय संविधान के तहत विधान परिषदों की संरचना में इन वर्गों को प्रतिनिधित्व देने की व्यवस्था की गई है.इसका उद्देश्य शिक्षकों और शिक्षित वर्ग को विधायी प्रक्रिया में अपनी बात रखने का अवसर देना है.इन चुनावों में वरीयता आधारित मतदान प्रणाली का इस्तेमाल किया जाता है.इसलिए इनका चुनावी गणित सामान्य विधानसभा या लोकसभा चुनावों से अलग होता है।
 
किन चार बड़े राज्यों में MLC चुनाव हुए थे
 
इन चुनावों में उत्तर प्रदेश की 11, बिहार की 8, महाराष्ट्र की 5 और कर्नाटक की 4 विधान परिषद सीटें शामिल थीं. मतदान 23 अक्टूबर को हुआ था और वोटों की गिनती 27 अक्टूबर से शुरू हुई. ये चुनाव मुख्य रूप से शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों के लिए थे. यहां आम जनता वोट नहीं करती. इन सीटों पर संबंधित निर्वाचन क्षेत्रों के रजिस्टर्ड मतदाता ही मतदान करते हैं.
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