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राजस्थान में लग्जरी स्लीपर बसों पर बड़ी कार्रवाई, सुरक्षा नियम तोड़ने वाली 100 से अधिक बसें जब्त

आरएएलएसए के सदस्य सचिव जस्टिस हरिओम अत्री के निर्देशों पर शुरू किया गया यह अभियान राज्य के 12 जिलों में चलाया जा रहा है. जयपुर, जोधपुर और अन्य जिलों में अचानक की गई चेकिंग में ऐसी बसें मिलीं जिनमें सिर्फ एक इमरजेंसी एग्जिट था, स्लीपर लेआउट में गैरकानूनी बदलाव किए गए थे, यात्रियों की जगह कम करके बड़े सामान रखने के डिब्बे बनाए गए थे.

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14 Jul 2026
( Updated: 14 Jul 2026
06:36 PM )
राजस्थान में लग्जरी स्लीपर बसों पर बड़ी कार्रवाई, सुरक्षा नियम तोड़ने वाली 100 से अधिक बसें जब्त
Image Credit: IANS
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राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (आरएएलएसए) के एक महीने तक चले प्रवर्तन अभियान ने राज्य के लग्जरी बस उद्योग में बड़े बदलाव की शुरुआत की है. इस अनोखे अभियान के तहत सुरक्षा नियमों का उल्लंघन करने वाली 100 लग्जरी स्लीपर बसों को जब्त किया गया.

नियम तोड़ने वाली 100 लग्जरी बसें जब्त

राजस्थान में स्लीपर बसों की लगातार हो रही घातक दुर्घटनाओं और आग लगने की घटनाओं से चिंतित राज्य के न्यायाधीश अदालतों से निकलकर सड़कों पर उतर आए हैं. राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा शुरू किए गए एक महीने लंबे राज्यव्यापी सड़क सुरक्षा अभियान के तहत न्यायाधीश स्वयं लोगों को जागरूक करने और सुरक्षा मानकों की निगरानी में भाग ले रहे हैं.

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यह अभियान राजस्थान हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजीव प्रकाश शर्मा के निर्देशों पर शुरू किया गया था. इसके तहत अब तक 100 से ज्यादा लग्जरी स्लीपर बसें जब्त की जा चुकी हैं, जबकि हजारों ऑपरेटर अपनी गाड़ियों में बदलाव करने और जरूरी सुरक्षा मानकों का पालन करने के लिए वर्कशॉप में कतार में खड़े हैं.

कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश के निर्देश पर अभियान

आरएएलएसए के सदस्य सचिव जस्टिस हरिओम अत्री के निर्देशों पर शुरू किया गया यह अभियान राज्य के 12 जिलों में चलाया जा रहा है. जयपुर, जोधपुर और अन्य जिलों में अचानक की गई चेकिंग में ऐसी बसें मिलीं जिनमें सिर्फ एक इमरजेंसी एग्जिट था, स्लीपर लेआउट में गैरकानूनी बदलाव किए गए थे, यात्रियों की जगह कम करके बड़े सामान रखने के डिब्बे बनाए गए थे, गाड़ी का ओवरहैंग जरूरत से ज्यादा था, छत पर सामान रखने के कैरियर लगे थे और मोटर वाहन अधिनियम, 1988 और एआईएस-119:2016 सुरक्षा नियमों का उल्लंघन किया गया था.

न्यायिक अधिकारी खुद कर रहे निगरानी

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जयपुर जिला कानूनी सेवा प्राधिकरण के सचिव प्रवीण कुमार जीनवाल ने आईएएनएस को बताया, "हरि ओम अत्री और अन्य सहयोगी उन घटनाओं से बहुत दुखी थे जिनमें यात्री जलकर मर गए, क्योंकि उनके पास निकलने का कोई सुरक्षित रास्ता नहीं था. इसीलिए न्यायिक अधिकारी खुद इस प्रवर्तन अभियान की निगरानी कर रहे हैं."

बस वर्कशॉप में बढ़ी भीड़

इस चेकिंग की वजह से पूरे राजस्थान में बस वर्कशॉप पर भीड़ बढ़ गई है और ऑपरेटर बसों को मंजूरशुदा साइज में वापस लाने की कोशिश कर रहे हैं. जीनवाल ने कहा, "कई बसों को गैरकानूनी तरीके से बढ़ाया या बदला गया था ताकि सामान रखने की अतिरिक्त जगह बनाई जा सके, जिससे यात्रियों की सुरक्षा से समझौता हुआ. ऑपरेटर अब उन्हें ट्रांसपोर्ट नियमों के मुताबिक ठीक कर रहे हैं. हमें उम्मीद है कि एक महीने के भीतर लगभग 80 प्रतिशत बसें ठीक कर ली जाएंगी."

रजिस्ट्रेशन में भी मिली गड़बड़ी

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इस अभियान में रजिस्ट्रेशन से जुड़ी गड़बड़ियां भी सामने आई हैं; राजस्थान का रजिस्ट्रेशन नंबर दिखाने वाली एक गाड़ी मध्य प्रदेश में रजिस्टर्ड पाई गई, जिसके बाद एफआईआर दर्ज की गई. नियमों का उल्लंघन करते हुए राजस्थान में चल रही उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में रजिस्टर्ड दो बसें भी जब्त की गई हैं.

यात्रियों को मंजिल तक पहुंचाने के निर्देश

अधिकारियों ने ऑपरेटरों को निर्देश दिया है कि जब्त की गई गाड़ियों की जानकारी पुलिस स्टेशनों को देने से पहले वे यह पक्का करें कि यात्री अपनी मंजिल तक पहुंच जाएं.

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बस हादसों के बाद तेज हुई कार्रवाई

यात्रियों की सुरक्षा बेहतर करने और नियमों का पालन न करने वाली स्लीपर बसों के कारण होने वाली दुर्घटनाओं को रोकने के लिए पूरे राजस्थान में यह महीने भर चलने वाला अभियान जारी रहेगा.

यह भी पढ़ें

1 जुलाई को दौसा में एक लग्जरी बस में आग लगने से आठ लोगों की जलकर मौत हो गई थी. इससे पहले नवंबर 2025 में फलोदी में एक बस में आग लगने से 24 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई थी.

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