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दिल्ली जल बोर्ड घोटाले केस में ACB का बड़ा एक्शन, पूर्व मंत्री सत्येंद्र जैन समेत 6 गिरफ्तार; जांच में सामने आया मनी ट्रेल

दिल्ली जल बोर्ड के STP टेंडर में कथित घोटाले को लेकर ACB ने पूर्व जल मंत्री सत्येंद्र जैन समेत 6 लोगों को गिरफ्तार किया है. आरोप है कि टेंडर की शर्तें एक खास कंपनी के पक्ष में तय की गई थीं.

दिल्ली जल बोर्ड घोटाले केस में ACB का बड़ा एक्शन, पूर्व मंत्री सत्येंद्र जैन समेत 6 गिरफ्तार; जांच में सामने आया मनी ट्रेल
Image Source: IANS (File Photo)
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दिल्ली सरकार की एंटी करप्शन ब्रांच (ACB) ने दिल्ली जल बोर्ड (DJB) के सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) टेंडर में बड़े घोटाले मामलें में बड़ी कार्रवाई की है. एसीबी ने दिल्ली सरकार के पव मंत्री और आम आदमी पार्टी (AAP) के सीनियर नेता सत्येंद्र जैन समेत 6 लोगों को गिरफ्तार किया है. गिरफ्तार लोगों में जीएनसीटीडी के पूर्व जल मंत्री सत्येंद्र कुमार जैन, डीजेबी के पूर्व सीईओ आईएएस उदित प्रकाश राय, डीजेबी के पूर्व कॉन्ट्रैक्टुअल कंसल्टेंट अंकित श्रीवास्तव और तीन प्राइवेट कंपनियों के मालिक शामिल हैं. वहीं इस कार्रवाई को अरविंद केजरीवाल ने सरकार की तानाशाही बताया है. 

क्या है पूरा मामला?
 
दरअसल, ACB की यह कार्रवाई एसीबी ने एफआईआर नंबर 10/2024 के तहत की. यह मामला भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 की धारा 7/7ए/9/13 और आईपीसी की धारा 420/409/418/120-बी के तहत दर्ज है. यह शिकायत जीएनसीटीडी के सतर्कता निदेशालय की ओर से मिली थी. आरोप है कि डीजेबी के एसटीपी प्लांट्स को अपग्रेड करने के टेंडर में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं की गईं. जांच में सामने आया कि टेंडर की तकनीकी शर्तों को इस तरह बनाया गया कि वह एक खास टेक्नोलॉजी प्रोवाइडर मेसर्स यूरोटेक एनवायरनमेंट प्राइवेट लिमिटेड के पक्ष में चली जाएं.

केजरीवाल ने कार्रवाई को सरकार की तानाशाही 

दिल्ली सरकार के पूर्व मंत्री सत्येंद्र जैन की गिरफ्तारी पर पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर सरकार पर निशाना साधा. केजरीवाल ने लिखा, 'सत्येंद्र जैन को एक बार फिर भाजपा ने गिरफ्तार करवा दिया है. अभी कुछ वक्त पहले इन लोगों ने जेल में डालकर उनकी जो दुर्दशा की थी, वह सबको याद है. पिछला केस भी फर्जी था और यह केस भी फर्जी साबित होगा. आखिर कब तक बीजेपी की ये तानाशाही चलती रहेगी? जिसे मन करता है, झूठे आरोप लगाकर जेल में डाल देते हैं. इनका झूठ एक बार फिर देश के सामने आएगा, लेकिन जेल में बिताए उस वक्त और मानसिक प्रताड़ना की भरपाई कौन करेगा? उन्होंने आगे लिखा कि बीजेपी के पाप का घड़ा अब भर चुका है. ये चाहे जितनी तानाशाही कर लें, अब सरकार का अंत तय है. पूरी आम आदमी पार्टी और देश की जनता सत्येंद्र जैन के साथ मजबूती से खड़ी है.'

टेंडर की नहीं हुई पायलट स्टडी

अधिकारियों के अनुसार, टेंडर में प्रस्तावित पायलट स्टडी नहीं कराई गई. इस्तेमाल होने वाली तकनीक और मीडिया से जुड़ी सीमित करने वाली शर्तें जोड़ी गईं. ट्रीटेड पानी के जरूरी पैरामीटर्स को हटा दिया गया। इन बदलावों की वजह से सरकारी खजाने पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ा और प्रतिस्पर्धा सीमित हो गई. इलेक्ट्रॉनिक सबूतों से पता चला है कि टेंडर की शर्तें, शुद्धिपत्र और अन्य दस्तावेज प्राइवेट लोगों और सरकारी अधिकारियों के बीच पहले से साझा किए गए थे. इन्हीं दस्तावेजों को बाद में डीजेबी के टेंडर नोटिस में शामिल किया गया। इससे साफ है कि टेंडर को प्रभावित करने के लिए मिलीभगत की गई.

जांच में मनी ट्रेल आया समाने 

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ACB की फाइनेंशियल जांच में मनी ट्रेल भी सामने आई है. जांच के मुताबिक मेसर्स सृजनहार और मेसर्स एएन एंटरप्राइजेज को मिडिल कंपनियों के रूप में इस्तेमाल कर कमीशन और रिश्वत का लेन-देन हुआ. आरोप है कि टेक्नोलॉजी प्रोवाइडर मेसर्स यूरोटेक से पैसा पहले मेसर्स एएन एंटरप्राइजेज में आया. इसके बाद आरोपी नागेंद्र यादव की प्रोपराइटरशिप फर्म से डीजेबी के तत्कालीन सीईओ उदित प्रकाश राय और उनके रिश्तेदारों के बैंक खातों में 1.52 करोड़ रुपए ट्रांसफर किए गए. जांच एजेंसी का कहना है कि इस रकम का इस्तेमाल अचल संपत्ति खरीदने में किया गया. जांच में यह भी सामने आया कि राजा कुमार कुर्रा, नागेंद्र यादव और अंकित श्रीवास्तव के बीच एसटीपी टेंडर, टेंडर की शर्तों और शुद्धिपत्र को लेकर लगातार बातचीत हुई. इन्हीं बातचीत के बाद टेंडर में ऐसी शर्तें जोड़ी गईं, जिनसे मेसर्स यूरोटेक को सीधा लाभ मिला.

ACB ने किन 6 लोगों को किया गिरफ्तार?

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ACB ने मंगलवार को छह आरोपियों को गिरफ्तार किया. इनमें जीएनसीटीडी के पूर्व जल मंत्री सत्येंद्र कुमार जैन, डीजेबी के पूर्व सीईओ उदित प्रकाश राय; डीजेबी के पूर्व कॉन्ट्रैक्टुअल कंसल्टेंट अंकित श्रीवास्तव; मेसर्स एएन एंटरप्राइजेज के मालिक नागेंद्र यादव; मेसर्स यूरोटेक एनवायरनमेंट प्राइवेट लिमिटेड के मालिक राजा कुमार कुर्रा और मेसर्स सृजनहार के मालिक पंकज वर्मा शामिल हैं. ACB अधिकारियों का कहना है कि पूरे मामले में अपराध से हुई कमाई और पैसे के लेन-देन की गहराई से जांच की जा रही है. सभी आरोपियों से पूछताछ के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी. जानकारी देते चलें कि यह मामला दिल्ली जल बोर्ड के एसटीपी अपग्रेड प्रोजेक्ट से जुड़ा है, जिसमें करोड़ों रुपए का सरकारी निवेश प्रस्तावित था. एसीबी का आरोप है कि इस प्रोजेक्ट को एक खास कंपनी के पक्ष में मोड़ने के लिए सरकारी प्रक्रिया और नियमों का उल्लंघन किया गया.

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