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PM सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना में देश में नंबर-1 बना UP,  8,76,500+ रूफटॉप सोलर प्लांट लगाकर रचा इतिहास

8,76,500 से ज्यादा रूफटॉप सोलर प्लांट लगाकर उत्तर प्रदेश ने इतिहास रच दिया है. PM सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना में यूपी देश में नंबर-1 बन गया है. इससे प्रतिदिन 1.32 करोड़ यूनिट से अधिक स्वच्छ बिजली उत्पादन की क्षमता पैदा हो गई.

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05 Oct 2026
( Updated: 05 Oct 2026
06:17 PM )
PM सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना में देश में नंबर-1 बना UP,  8,76,500+ रूफटॉप सोलर प्लांट लगाकर रचा इतिहास
Image Source-IANS
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प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के क्रियान्वयन में उत्तर प्रदेश ने ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल करते हुए 8,76,500 से अधिक रूफटॉप सोलर प्लांट स्थापित कर संचयी इंस्टॉलेशन के मामले में गुजरात को पीछे छोड़ दिया है. इसके साथ ही योजना के तहत संचयी रूफटॉप सोलर इंस्टॉलेशन में उत्तर प्रदेश देश में प्रथम स्थान पर पहुंच गया है. प्रदेश की यह उपलब्धि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में सौर ऊर्जा को जन-जन तक पहुंचाने के लिए किए जा रहे निरंतर एवं समन्वित प्रयासों का परिणाम है.


उत्तर प्रदेश में पिछले कई महीनों से प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना के तहत रूफटॉप सोलर इंस्टॉलेशन की गति लगातार तेज रही है. जिला स्तर पर नियमित समीक्षा, डिस्कॉम स्तर पर निरीक्षण एवं मीटरिंग की निगरानी, बैंकिंग फॉलोअप, वेंडर समन्वय तथा लंबित प्रकरणों के समाधान को प्राथमिकता दी जा रही है. योजना मे यूपीनेडा द्वारा 8000 से अधिक वेंडर्स को इमपैनल्ड कर एक लाख से अधिक लोगों को रोजगार भी दिया गया जिसका प्रत्यक्ष प्रभाव जनपदों की राष्ट्रीय रैंकिंग मे देखा जा रहा है. प्रदेश के कुल 15 जनपद देश के टॉप 100 मे शामिल है जिसमे उल्लेखनीय रूप से जनपद लखनऊ देश मे प्रथम स्थान एवं जनपद वाराणसी देश मे दसवे स्थान पर है.

प्रतिदिन 1.32 करोड़ यूनिट से अधिक स्वच्छ बिजली

प्रदेश में स्थापित रूफटॉप सोलर क्षमता 2,942 मेगा वॉट से अधिक हो चुकी है. 4.5 यूनिट प्रति किलोवाट प्रतिदिन के मानक के आधार पर यह क्षमता प्रतिदिन 1.32 करोड़ यूनिट से अधिक स्वच्छ बिजली पैदा करने की क्षमता रखती है. ₹6.50 प्रति यूनिट के समतुल्य मूल्य पर यह बिजली ₹8.5 करोड़ से अधिक प्रतिदिन तथा ₹3,100 करोड़ से अधिक वार्षिक बिजली के बराबर है. इससे लाखों परिवारों को बिजली खर्च में राहत मिलने के साथ प्रदेश की ऊर्जा अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिल रही है.

11,700 एकड़ से अधिक भूमि की बचत

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रूफटॉप सोलर की सबसे बड़ी विशेषताओं में से एक यह है कि बिजली उत्पादन के लिए अलग से बड़े भू-भाग की आवश्यकता नहीं होती क्योंकि यह घरों की छत पर लगाया जाता है. 4 एकड़ प्रति मेगा वॉट के मानक के आधार पर प्रदेश में स्थापित वर्तमान रूफटॉप सोलर क्षमता से 11,700 एकड़ से अधिक भूमि की बचत होती है. इस प्रकार घरों की छतों और उपलब्ध भवन संरचनाओं पर सौर संयंत्र लगाकर बड़े भू भाग के उपयोग की आवश्यकता कम की जा रही है, जिनका उपयोग अन्य व्यावसायिक गतिविधियों के लिए किया जा सकेगा.

34 लाख टन से अधिक कार्बन उत्सर्जन में कमी

रूफटॉप सोलर से उत्पादित स्वच्छ बिजली के आधार पर प्रदेश में 34 लाख टन से अधिक वार्षिक CO₂ उत्सर्जन में कमी का अनुमान है. इस पर्यावरणीय लाभ को वृक्ष-समतुल्यता के रूप में देखें तो यह 15 करोड़ से अधिक पेड़ों द्वारा एक वर्ष में अवशोषित कार्बन के बराबर बैठता है. यह वृक्ष-समतुल्यता एक अनुमानात्मक पर्यावरणीय तुलना है.

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8,000 से अधिक वेंडर्स, 1 लाख से अधिक को प्रत्यक्ष रोजगार

प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना ने प्रदेश में बड़े पैमाने पर ग्रीन जॉब इकोसिस्टम तैयार किया है. 8,000 से अधिक यूपीनेडा वेंडर्स के माध्यम से सोलर सिस्टम की बिक्री, डिजाइन, इंजीनियरिंग, इंस्टॉलेशन, इलेक्ट्रिकल कार्य, कमीशनिंग और आफ्टर-सेल्स सर्विस से जुड़े क्षेत्रों में 1 लाख से अधिक प्रत्यक्ष रोजगार के अवसर सृजित हो रहे हैं. वहीं योजना का रोजगार प्रभाव केवल वेंडर्स और इंस्टॉलेशन तक सीमित नहीं है. लॉजिस्टिक्स, ट्रांसपोर्टेशन, वेयरहाउसिंग, पैकेजिंग, लोडिंग-अनलोडिंग, सामग्री आपूर्ति, स्ट्रक्चर फैब्रिकेशन, सर्वेक्षण, साइट असेसमेंट, ग्राहक सेवा, मरम्मत एवं रखरखाव जैसे क्षेत्रों में भी बड़ी संख्या में अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा हुए हैं. इस प्रकार योजना ने प्रदेश में युवाओं के लिए ग्रीन स्किल और ग्रीन जॉब्स का एक नया बाजार तैयार किया है.

केंद्र और राज्य की सब्सिडी से सीधे लाभार्थियों को लाभ

इस योजना के तहत उत्तर प्रदेश में केन्द्रीय सब्सिडी ₹5,722 करोड़ से अधिक तथा राज्य सब्सिडी ₹2,000 करोड़ से अधिक की वित्तीय सहायता का प्रभाव सामने आया है. केंद्र और राज्य सरकार की वित्तीय सहायता का प्रत्यक्ष लाभ लाभार्थियों तक पहुंचने से घरेलू उपभोक्ताओं के लिए रूफटॉप सोलर अपनाना अधिक सुलभ हुआ है. रूफटॉप सोलर अब केवल पर्यावरण संरक्षण का माध्यम नहीं, बल्कि परिवार के बिजली खर्च में कमी, ऊर्जा आत्मनिर्भरता और घरेलू आर्थिक सशक्तीकरण का प्रभावी साधन बन रहा है.

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सूर्य घर से बदल रही है उत्तर प्रदेश की ऊर्जा अर्थव्यवस्था

8,76,500 से अधिक रूफटॉप सोलर प्लांट, 2,942 मेगा वॉट से अधिक स्थापित क्षमता, प्रतिदिन 1.32 करोड़ से अधिक यूनिट स्वच्छ बिजली, 11,700 एकड़ से अधिक भूमि-संरक्षण का प्रभाव, 34 लाख टन से अधिक संभावित वार्षिक कार्बन बचत, 8,000 से अधिक वेंडर्स और 1 लाख से अधिक प्रत्यक्ष रोजगार प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना उत्तर प्रदेश में अब एक व्यापक ग्रीन इकोनॉमिक ट्रांसफॉर्मेशन का आधार बन चुकी है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में उत्तर प्रदेश ने रूफटॉप सोलर को जनभागीदारी, रोजगार, उद्योग, ऊर्जा बचत और पर्यावरण संरक्षण से जोड़ते हुए देश के सामने एक प्रभावी मॉडल प्रस्तुत किया है.

योगी सरकार की औद्योगिक नीति का प्रमुख लक्ष्य उत्तर प्रदेश को केवल बड़े निवेश का केंद्र बनाना ही नहीं, बल्कि यहां तैयार होने वाले उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाना भी है. इंटरनेशनल ट्रेड सिटी इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कड़ी साबित हो सकती है. प्रस्तावित इंटरनेशनल ट्रेड सिटी में विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े औद्योगिक उत्पादों के लिए व्यवस्थित बाजार और प्रदर्शन की सुविधा विकसित किए जाने की परिकल्पना है. इससे उत्पादकों को अपने उत्पाद सीधे देश-विदेश के खरीदारों के सामने प्रस्तुत करने का अवसर मिलेगा. साथ ही निर्यातकों और संभावित विदेशी खरीदारों के बीच व्यावसायिक संपर्क बढ़ाने में भी मदद मिलेगी.

यीवू की तर्ज पर व्यापार का बड़ा प्लेटफॉर्म

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चीन के यीवू इंटरनेशनल ट्रेड सिटी को दुनिया के प्रमुख थोक व्यापार केंद्रों में गिना जाता है, जहां बड़ी संख्या में उत्पादों के लिए एक संगठित बाजार उपलब्ध है. इसी अवधारणा को ध्यान में रखते हुए यमुना एक्सप्रेसवे क्षेत्र में प्रस्तावित इंटरनेशनल ट्रेड सिटी को विकसित करने की दिशा में पहल की जा रही है. इसका उद्देश्य एक ऐसा वन-स्टॉप ट्रेडिंग डेस्टिनेशन तैयार करना है, जहां विभिन्न औद्योगिक उत्पादों के प्रदर्शन, कारोबार और संभावित निर्यात के लिए सुविधाएं एक ही स्थान पर उपलब्ध हो सकें.

जेवर एयरपोर्ट और औद्योगिक कॉरिडोर का मिलेगा लाभ

यमुना एक्सप्रेसवे क्षेत्र में तेजी से विकसित हो रहे औद्योगिक एवं बुनियादी ढांचे के बीच इंटरनेशनल ट्रेड सिटी की परिकल्पना को महत्वपूर्ण माना जा रहा है. विस्तार ले रहा नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट भी भविष्य में व्यापार और लॉजिस्टिक्स की संभावनाओं को मजबूत करने वाला प्रमुख आधार बन सकता है. एक्सप्रेसवे कनेक्टिविटी, औद्योगिक क्षेत्रों और एयर कार्गो जैसी सुविधाओं के विकास से उत्पादों की आवाजाही और अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंच को बेहतर बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है. इससे क्षेत्र में व्यापारिक गतिविधियों के विस्तार के साथ नई औद्योगिक इकाइयों और निवेश की संभावनाएं भी बढ़ेंगी.

एमएसएमई और स्थानीय उद्यमियों को सबसे बड़ा लाभ

इंटरनेशनल ट्रेड सिटी का सबसे महत्वपूर्ण लाभ सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) और स्थानीय उद्यमियों को मिल सकता है. अक्सर छोटे उद्यमों के सामने अपने उत्पादों को बड़े बाजार और अंतरराष्ट्रीय खरीदारों तक पहुंचाने की चुनौती रहती है. प्रस्तावित ट्रेड सिटी ऐसे उद्यमियों के लिए मार्केट एक्सेस का नया माध्यम बन सकती है. यहां उन्हें अपने उत्पादों को प्रदर्शित करने, नए खरीदारों से संपर्क करने और व्यापारिक नेटवर्क का विस्तार करने का अवसर मिलेगा. इससे स्थानीय स्तर पर उत्पादन को बढ़ावा मिलने के साथ रोजगार के नए अवसर भी सृजित हो सकते हैं.

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निवेश से लेकर निर्यात तक मजबूत इकोसिस्टम

योगी सरकार के कार्यकाल में उत्तर प्रदेश में एक्सप्रेसवे, एयरपोर्ट, औद्योगिक पार्क और लॉजिस्टिक्स इन्फ्रास्ट्रक्चर के विकास पर विशेष जोर दिया गया है. इंटरनेशनल ट्रेड सिटी की परिकल्पना को इसी व्यापक औद्योगिक इकोसिस्टम से जोड़कर देखा जा रहा है. उद्देश्य यह है कि प्रदेश में आने वाला निवेश केवल उत्पादन इकाइयों की स्थापना तक सीमित न रहे, बल्कि उत्पादन से बाजार और बाजार से वैश्विक निर्यात तक पूरी वैल्यू चेन विकसित हो. इंटरनेशनल ट्रेड सिटी इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में काम कर सकती है, जहां उत्पादकों, खरीदारों, निर्यातकों और व्यापारिक संस्थाओं को एक साझा मंच मिल सकेगा.

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‘ओडीओपी’ को भी मिल सकती है नई उड़ान

उत्तर प्रदेश के एक जनपद-एक उत्पाद (ओडीओपी) जैसे अभियानों के लिए भी इस प्रकार का अंतरराष्ट्रीय व्यापार केंद्र महत्वपूर्ण साबित हो सकता है. प्रदेश के विभिन्न जिलों के विशिष्ट उत्पादों को बड़े बाजारों और अंतरराष्ट्रीय खरीदारों तक पहुंचाने के लिए यह एक अतिरिक्त मंच उपलब्ध करा सकता है. इससे स्थानीय उत्पादों की ब्रांडिंग, बाजार विस्तार और निर्यात की संभावनाओं को बल मिल सकता है. खासतौर पर ऐसे उत्पाद जिनमें अंतरराष्ट्रीय बाजार की मांग मौजूद है, उन्हें संगठित व्यापारिक प्लेटफॉर्म मिलने से नए अवसर पैदा हो सकते हैं.

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उत्तर प्रदेश को ग्लोबल ट्रेड हब बनाने की दिशा में कदम

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योगी सरकार की औद्योगिक विकास की रणनीति में उत्तर प्रदेश को निवेश, उत्पादन और निर्यात के प्रमुख केंद्र के रूप में स्थापित करने पर जोर है. इससे एक ओर जहां स्थानीय उद्योगों को नए बाजार मिलेंगे, वहीं दूसरी ओर उत्तर प्रदेश की वैश्विक व्यापार क्षमता को भी मजबूती मिल सकती है. आने वाले समय में यह क्षेत्र उद्योग, व्यापार, लॉजिस्टिक्स और निर्यात गतिविधियों के संगम के रूप में विकसित हो सकता है. यही नहीं, इसके विकास से प्रत्यक्ष रूप से व्यापारिक गतिविधियां बढ़ने के साथ ही लॉजिस्टिक्स, वेयरहाउसिंग, परिवहन, पैकेजिंग, मार्केटिंग, निर्यात सेवाओं और अन्य सहायक क्षेत्रों में भी रोजगार एवं कारोबार के अवसर पैदा होने की संभावना है.

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