पंचतत्व में विलीन हुए हरीश राणा...कलेजा चीर गया WhatsApp पर भेजा पिता का वो छोटा सा मैसेज, VIDEO
31 साल के हरीश राणा ने 13 साल तक कोमा में रहने के बाद दुनिया को आखिरकार अलविदा कह ही दिया. उन्हें उनके छोटे भाई ने मुखाग्नि दी. उनके निधन के बाद सोसायटी व्हाट्सग्रुप में उनके पिता द्वारा भेजा वो मैसेज लोगों का कलेजा चीर गया.
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करीब 13 साल तक कोमा में रहने और लंबे समय तक जिंदगी-मौत की जंग लड़ने के बाद गाजियाबाद के हरीश राणा ने दुनिया को आखिरकार अलविदा कह ही दिया. उनका सुप्रीम कोर्ट की इजाजत से, डॉक्टर्स की निगरानी में मिली इच्छामृत्यु के बाद 24 मार्च को निधन हो गया. इसके बाद उनका 25 मार्च को अंतिम संस्कार कर दिया गया. उनके छोटे भाई आशीष ने उनके पार्थिव शरीर को मुखाग्नि दी.
लोगों का कलेजा चीर गया हरीश के निधन के बाद उनके पिता का आखिरी मैसेज!
उनके निधन की जानकारी जैसे ही हरीश के पिता अशोक राणा ने सोसाइटी के व्हाट्सऐप ग्रुप में दी, लोगों का गला भर आया, आंखों में आंसू आ गए. हरीश के पिता ने लिखा कि सुबह 9 बजे पार्थिव शरीर (हरीश राणा जी) का अंतिम संस्कार ग्रीन पार्क, साउथ दिल्ली में किया जाएगा… ॐ शांति ॐ…! ये पढ़ते-पढ़ते लोगों के अंदर भावनाओं का ज्वार उमड़ पड़ा.
पिता ने कहा कोई रोएगा नहीं...फिर खुद ही रो पड़े!
सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे वीडियो में हरीश के पिता को देख भी लोगों के आंसू थम नहीं रहे हैं. पिता इस दौरान कहते नजर आए कि कोई रोएगा नहीं...और ये कहते-कहते वो खुद रोने लगे. उन्होंने अपना दुख मास्क के अंदर छिपाने की कोशिश की. कहते हैं कि एक पिता के लिए उसका बेटा-संतान ही सबकुछ होता है. जो जिंदगी भर ये सोचता है कि बेटा उसे आखिरी विदाई देगा, उसे कंधा देगा, उसका क्रिया-कर्म करेगा, लेकिन अगर ऐसे पिता को अपने ही जवान बेटे को इस तरह विदाई देनी पड़े तो उस पर क्या बीता होगा, ये सोच से भी परे है. उन्होंने अपना दर्द, दुख छिपाने की बखूबी कोशिश की, लेकिन ऐसा ना हो सका.
Delhi: The mortal remains of Harish Rana, the first person in India permitted passive euthanasia, were cremated by his brother Ashish Rana and sister Bhavna pic.twitter.com/PFBc5WH97C
— IANS (@ians_india) March 25, 2026
मां का भी रो-रो कर बुरा हाल!
वहीं मां का भी हाल बेहाल हो गया. जिस मां ने 9 साल तक अपने गर्भ में बेटे को सींचा, जन्म दिया, पाला-पोषा, उनकी क्या स्थिति होगी, अकल्पनीय है. उन्होंने इतने साल तक अपने जिगर के टुकड़े का इस तरह ध्यान रखा, सेवा की... ये जानते हुए भी कि ये कभी पहले जैसे नहीं रहेगा, कभी नहीं उठ पाएगा, फिर भी दिन-रात सेवा करना बताता है कि ये सिर्फ एक मां ही कर सकती है. उन्होंने भी अपने आंसू छिपाने की कोशिश की, लेकिन वो असहाय, बेसुध बैठी रहीं. ईश्वर ऐसी स्थिति किसी को ना दे.
सोसाइटी में शोक का माहौल
मालूम हो कि हरीश राणा का परिवार गाजियाबाद के राजनगर एक्सटेंशन स्थित राज एंपायर सोसाइटी में लंबे समय तक रहा. हरीश के निधन के बाद से ही पूरी सोसायटी में सन्नाटा पसरा है, लोगों में शोक का माहौल है. लोगों ने कहा कि हरीश के माता-पिता सहित पूरे परिवार ने इन 13 वर्षों में जो कुछ किया और सहा, उसे शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता.
इतने सालों में हरीश के भाई आशीष लगातार उनकी देखभाल में करते रहे. पूरे परिवार ने इस दौरान हरीश का पूरा ख्याल रहा. पड़ोसियों ने कहा कि, “दुख तो है, लेकिन जो स्थिति थी, वह भी बेहद कष्टप्रद थी. परिवार ने इतने सालों में बहुत संघर्ष किया. अंतिम संस्कार की के दौरान जिस संस्था से हरीश के पिता जुड़े थे, उनके सदस्य भी मौजूद रहे. उन सबने एक सुर में कहा कि “पूरी सोसाइटी इस मुश्किल समय में परिवार के साथ खड़ी है.
पिता का वो छोटा सा मैसेज, लोगों का सीना चीर गया
हरीश राणा के निधन के बाद ना सिर्फ उनका परिवार, सोसायटी बल्कि सोशल मीडिया पर भी लोग गमगीन हैं. उनके पिता अशोक राणा का व्हाट्सएप पर भेजा वह छोटा-सा संदेश लोगों को अंदर तक झकझोर गया. लोगों का सीना चीर गया. उनके पिता के संदेश और उनके मनोभाव को देख लोग भी रो पड़े. सबने अपनी संवेदनाएं व्यक्त कीं. कई लोगों ने लिखा कि कभी-कभी सबसे छोटे शब्द सबसे गहरे दर्द को बयां कर जाते हैं.
हरीश का मंगलवार को हुआ था निधन
आपको बता दें कि राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में भर्ती हरीश राणा का मंगलवार को निधन हो गया था. हरीश राणा देश के पहले ऐसे व्यक्ति थे, जिन्हें सर्वोच्च न्यायालय से पैसिव यूथेनेशिया, यानी इच्छामृत्यु, की अनुमति मिली थी.
दरअसल, हरीश राणा पिछले 13 साल से अधिक समय से कोमा में थे और उनकी स्थिति में कोई सुधार नहीं हो रहा था. लंबे समय तक जीवन रक्षक प्रणाली पर निर्भर रहने के कारण उनके परिवार ने अदालत से इच्छामृत्यु की अनुमति की मांग की थी. इस मामले में ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को पैसिव यूथेनेशिया की अनुमति दी थी.
11 मार्च को हरीश राणा को सुप्रीम कोर्ट ने दी थी इच्छामृत्यु की इजाजत
सुप्रीम कोर्ट ने 11 मार्च को हरीश राणा को इच्छामृत्यु देने की मांग पर सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला सुनाया था. हरीश के परिवार की याचिका पर न्यायमूर्ति जेबी परदीवाला और न्यायमूर्ति केवी विश्वनाथन की पीठ ने यह फैसला सुनाया. कोर्ट ने यह भी कहा कि यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि पूरी गरिमा के साथ इस प्रक्रिया को पूरा किया जाए.
VIDEO | Delhi: People pay last respects to Harish Rana, the first person in India to be allowed passive euthanasia, at Green Park Cremation Ground. Rana passed away on Tuesday at AIIMS-Delhi after more than 13 years in a coma.
The 31-year-old, who has been in a coma since 2013,… pic.twitter.com/L5dKVY5g3N— Press Trust of India (@PTI_News) March 25, 2026
हरीश पर फैसला देते-देते जस्टिस पारदीवाला भी रो पड़े थे
जस्टिस पारदीवाला ने कहा कि यह बेहद दुखद है. यह हमारे लिए मुश्किल फैसला है, लेकिन इस लड़के (हरीश) को यूं अपार दुख में नहीं रख सकते. हम उस स्टेज में है, जहां हमें आखिरी फैसला लेना होगा. सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा के परिवार की प्रशंसा करते हुए कोर्ट ने कहा कि उनके परिवार ने कभी उनका साथ नहीं छोड़ा. किसी से प्यार करने का मतलब है, सबसे बुरे समय में भी उनकी देखभाल करना.
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बता दें कि चंडीगढ़ में रह कर पढ़ाई कर रहे हरीश 2013 में अपने हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिर गए थे. इससे उनके सिर में गंभीर चोटें आईं थी. उसके बाद से वह लगातार बिस्तर में अचेत हालत में है. लगातार बिस्तर पर पड़े रहने के कारण उनके शरीर पर घाव हो गए हैं. लकवाग्रस्त हरीश को सांस लेने, भोजन करने और रोजमर्रा की देखभाल के लिए चिकित्सा सहायता की जरूरत पड़ती है.
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