कंप्यूटर ऑपरेटर से हरियाणा के CM तक, नायब सिंह सैनी ने युवाओं को सुनाई संघर्ष की कहानी, बोले-मेरे सफर में लिफ्ट नहीं, सिर्फ सीढ़ियां थीं
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने 2014 से पहले के दौर को याद करते हुए कहा कि उस समय राजनीति में युवाओं का इस्तेमाल तो किया जाता था, लेकिन यदि कोई युवा आगे बढ़ने की इच्छा रखता था तो उसकी आकांक्षाओं को दबा दिया जाता था.
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हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि वर्ष 1996 में जब वह पंचकूला स्थित भाजपा कार्यालय में कंप्यूटर ऑपरेटर के रूप में काम कर रहे थे, तब उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि एक दिन वह राज्य के मुख्यमंत्री बनेंगे.
नायब सिंह सैनी ने सुनाई अपनी कहानी
शुक्रवार को गुरुग्राम विश्वविद्यालय में आयोजित ‘जेन-एच युवा उद्यमी चौपाल’ कार्यक्रम में युवाओं को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने राजनीतिक सफर के अनुभव साझा किए. उनके जीवन में सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं था, बल्कि यह लगातार मेहनत और संघर्ष का परिणाम है.
मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम में मौजूद युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि 'जेन-एच' का मतलब केवल हरियाणा नहीं, बल्कि 'जेन-एचबी' यानी हरियाणा-भारत भी है. उन्होंने कहा, ''जेन-एचबी भारत की धड़कन है.''
कार्यक्रम के दौरान युवा उद्यमियों ने मुख्यमंत्री से राजनीतिक विरासत के बिना आगे बढ़ने, असफलता से उबरने, तकनीक, खेल, रोजगार, नशे की समस्या, स्टार्टअप, सरकारी कामकाज की रफ्तार और पारिवारिक जीवन जैसे विषयों पर सवाल पूछे.
4,000 से अधिक संस्थानों में लाइव प्रसारित इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने युवाओं से कहा कि वे असफलता को अपनी पहचान न बनने दें, बल्कि अपने काम को अपनी पहचान बनाएं. त्वरित सफलता के पीछे भागने के बजाय निरंतरता, विश्वसनीयता और धैर्य को अपनी ताकत बनाना चाहिए.
‘मेरे सफर में कोई लिफ्ट नहीं थी, सिर्फ सीढ़ियां थीं’
राजनीति में बिना किसी राजनीतिक पृष्ठभूमि के आगे बढ़ने के बारे में पूछे जाने पर सैनी ने कहा कि उनके सफर में कोई लिफ्ट नहीं थी, केवल सीढ़ियां थीं, और कई बार ऐसा भी हुआ जब अगला कदम तक दिखाई नहीं देता था.
उन्होंने बताया कि राजनीति में आने के बाद उनकी पहली जिम्मेदारी खुद चुनाव लड़ना नहीं, बल्कि किसी दूसरे उम्मीदवार के चुनाव अभियान में काम करना था. उस दौरान वह रात 2 बजे तक काम करते थे.
2009 में चुनाव लड़ने के लिए नहीं थे पर्याप्त पैसे
मुख्यमंत्री ने कहा कि जब वर्ष 2009 में उन्हें चुनाव लड़ने का मौका मिला तो उनके पास चुनाव लड़ने के लिए पर्याप्त पैसे भी नहीं थे. ऐसे समय में लोगों ने उनकी मदद की और चुनाव लड़ने में साथ दिया. हालांकि वह चुनाव हार गए, लेकिन उन्होंने तय किया कि हार उनकी पहचान नहीं बनेगी, बल्कि वह उससे सीख लेकर आगे बढ़ेंगे.
उन्होंने कहा कि हार के अगले ही दिन वह फिर से लोगों के बीच पहुंच गए. उस समय उनके पास कोई पद नहीं था और न ही दोबारा टिकट मिलने की कोई गारंटी थी, लेकिन उन्होंने काम जारी रखा. इसी सोच का परिणाम था कि वर्ष 2014 में उन्हें बड़ी जीत मिली.
PM नरेंद्र मोदी ने भेजा था कंप्यूटर
सैनी ने वर्ष 1996 की एक घटना का जिक्र करते हुए कहा कि उस समय नरेंद्र मोदी हरियाणा भाजपा के प्रभारी थे और उन्होंने पंचकूला स्थित पार्टी कार्यालय में एक कंप्यूटर भेजा था. मुख्यमंत्री ने कहा कि उसी कंप्यूटर को चलाते समय उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि भविष्य में वह मुख्यमंत्री बनेंगे.
युवाओं को दिया ‘नेशन फर्स्ट’ का संदेश
मुख्यमंत्री ने 2014 से पहले के दौर को याद करते हुए कहा कि उस समय राजनीति में युवाओं का इस्तेमाल तो किया जाता था, लेकिन यदि कोई युवा आगे बढ़ने की इच्छा रखता था तो उसकी आकांक्षाओं को दबा दिया जाता था.
2009 की चुनावी हार से मिली सीख के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि वह उसी दिन दोगुने उत्साह के साथ फिर खड़े हो गए थे. उनके लिए कभी पद महत्वपूर्ण नहीं रहा, बल्कि ‘नेशन फर्स्ट’ की भावना हमेशा सबसे ऊपर रही.
उन्होंने कहा कि लोगों की मदद करने की इच्छा के कारण उन्हें वर्ष 2014 में जनता का समर्थन मिला. लोगों ने उन्हें चुना और पार्टी ने मंत्री पद की जिम्मेदारी सौंपी.
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मुख्यमंत्री ने कहा कि इसके बाद सांसद, भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष और फिर मुख्यमंत्री बनने का अवसर उन्हें जनता के स्नेह, उनके प्रति अपनी जिम्मेदारी और पार्टी द्वारा दिए गए अवसरों के कारण मिला.