'वो समझ से परे...मोदी के लेवल पर नहीं पहुंचे हैं', कांग्रेस की पूर्व नेता नवजोत कौर सिद्धू का राहुल गांधी पर बड़ा हमला!
पंजाब की पूर्व मंत्री नवजोत कौर सिद्धू ने एक बार फिर राहुल गांधी पर तीखा हमला बोला है. उन्होंने कहा कि एक ओर जहां पीएम मोदी आध्यात्मिक व्यक्तित्व हैं, वहीं राहुल गांधी को को समझना भी मुश्किल है.
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पंजाब की पूर्व मंत्री नवजोत कौर सिद्धू ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रशंसा करते हुए उन्हें 'आध्यात्मिक' व्यक्तित्व करार दिया. वहीं उन्होंने लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी को लेकर असमंजस व्यक्त किया. नवजोत ने कहा, "प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बहुत आध्यात्मिक हैं और यह उनके व्यक्तित्व में झलकता है. राहुल गांधी की बात करें तो मैं उन्हें समझ नहीं पाती क्योंकि वे अभी तक उस स्तर तक नहीं पहुंचे हैं जहां वे सभी के साथ समान व्यवहार करें और बातचीत के लिए खुले रहें. राहुल गांधी अभी भी परिवार-केंद्रित मानसिकता से प्रभावित प्रतीत होते हैं."
गांधी परिवार की मानसिकता से ग्रस्त हैं राहुल: नवजोत कौर सिद्धू
नवजोत कौर सिद्धू ने कहा, "ऐसा लगता है कि वे अब भी गांधी परिवार की मानसिकता से बंधे हुए हैं, जहां वे उन लोगों की बात सुनने का समय नहीं निकाल पाते जो वास्तव में उनके शुभचिंतक हैं और उन्हें सही राह दिखाने की कोशिश कर रहे हैं. अगर किसी से मिलने में आठ महीने लग जाते हैं, तो मुझे लगता है कि यह सही नहीं है."
नवजोत कौर सिद्धू ने राहुल को दी सलाह!
सिद्धू ने कहा कि एक नेता को सुलभ होना चाहिए और ईमानदार सलाह सुनने के लिए तैयार रहना चाहिए. एक नेता को हर किसी से मिलना चाहिए, खासकर उन लोगों से जो ईमानदार हों और रचनात्मक सलाह देते हों. अगर आप वह सलाह लेने के लिए तैयार नहीं हैं तो यह आपकी मर्जी है.
नवजोत कौर के तेवर हुए और भी ज्यादा तल्ख
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आपको बताएं कि कांग्रेस से निष्कासन के बाद डॉ. नवजोत कौर सिद्धू के तेवर और भी तीखे हो गए हैं. उन्होंने इस फैसले पर नाराजगी जताते हुए लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी पर ऐसी टिप्पणी कर दी है. जो आने वाले दिनों में कांग्रेस पार्टी और सिद्धू परिवार के बीच जुबानी जंग को और तेज कर दिया है. उन्होंने राहुल गांधी को 'पप्पू' कहकर संबोधित किया, जो आमतौर पर कांग्रेस विरोधी दलों द्वारा इस्तेमाल किया जाता है. इस बयान ने कांग्रेस और सिद्धू परिवार के बीच चल रहे टकराव को सार्वजनिक रूप से चरम पर पहुंचा दिया है. पार्टी के भीतर इसे अनुशासनहीनता की पराकाष्ठा माना जा रहा है.
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