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गोरखपुर में बन रहा पूर्वी UP का पहला वेटरिनरी कॉलेज, CM योगी ने दिए यूनिवर्सिटी बनाने के संकेत; जानें कब पूरा होगा प्रोजेक्ट
उत्तर प्रदेश का पहला वेटरिनरी कॉलेज जून 2026 तक तैयार होने की उम्मीद है. यहां पशु चिकित्सा की पढ़ाई के साथ पशुओं का इलाज भी होगा. सीएम योगी आदित्यनाथ ने 3 मार्च 2024 को गोरखपुर-वाराणसी राजमार्ग के ताल नदोर में इसका शिलान्यास किया था और भविष्य में इसे यूनिवर्सिटी बनाने की बात कही है.
पूर्वी उत्तर प्रदेश के लिए पशुपालन और पशु चिकित्सा के क्षेत्र में एक बड़ी सौगात तैयार हो रही है. गोरखपुर-वाराणसी राजमार्ग के ताल नदोर क्षेत्र में बन रहा पशु चिकित्सा विज्ञान महाविद्यालय तेजी से आकार ले रहा है और उम्मीद जताई जा रही है कि इसका निर्माण जून 2026 के अंत तक पूरा हो जाएगा. इस महाविद्यालय के बन जाने के बाद यहां पशु चिकित्सा विज्ञान में डिग्री और डिप्लोमा की पढ़ाई के साथ-साथ पशुओं के आधुनिक इलाज की भी सुविधा उपलब्ध होगी. इससे न सिर्फ पूर्वी उत्तर प्रदेश बल्कि पश्चिमी बिहार और पड़ोसी देश नेपाल के पशुपालकों को भी बड़ा लाभ मिलने की संभावना है.
तीन चरणों में विकसित होगा 80 एकड़ में फैला परिसर
उत्तर प्रदेश की योगी सरकार की यह महत्वाकांक्षी परियोजना लगभग 80 एकड़ क्षेत्र में विकसित की जा रही है. महाविद्यालय को तीन चरणों में तैयार करने की योजना बनाई गई है. पहले चरण के निर्माण पर करीब 277 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं. निर्माण कार्य की जिम्मेदारी लोक निर्माण विभाग के निर्माण खंड (भवन) को दी गई है. परियोजना से जुड़े अधिकारियों के अनुसार पहले चरण का करीब 65 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है. भवनों का स्ट्रक्चर लगभग तैयार हो गया है और अब बाकी निर्माण कार्य तेजी से आगे बढ़ रहा है. अगर इसी गति से काम चलता रहा तो जून 2026 तक यह महाविद्यालय पूरी तरह तैयार हो जाएगा.
पशुपालकों के लिए मिलेंगी आधुनिक सुविधाएं
इस वेटरिनरी कॉलेज में छात्रों और पशुपालकों के लिए आधुनिक सुविधाओं का विशेष ध्यान रखा गया है. पहले चरण में यहां एकेडमिक ब्लॉक बनाया जा रहा है, जिसमें भूतल के साथ पांच मंजिलें होंगी. इसके अलावा हॉस्पिटल ब्लॉक, आवासीय ब्लॉक और छात्र-छात्राओं के लिए अलग-अलग छात्रावास बनाए जा रहे हैं. पुरुष और महिला छात्रों के लिए 106-106 सीटों की क्षमता वाले छात्रावास होंगे. इसके साथ ही पीजी छात्रों के लिए 60-60 सीटों की क्षमता वाले अलग छात्रावास भी बनाए जाएंगे. परिसर में ऑडिटोरियम, गेस्ट हाउस, कम्युनिटी सेंटर, पशुओं के रहने के स्थान, फीड स्टोर और किसान भवन जैसी सुविधाएं भी विकसित की जाएंगी. पशु चिकित्सा विज्ञान से जुड़ी विभिन्न विधाओं के शोध और अध्ययन के लिए विशेष केंद्र भी स्थापित किए जाएंगे.
‘नेट जीरो एनर्जी’ मॉडल पर तैयार होगा महाविद्यालय
इस महाविद्यालय की एक खास बात यह भी होगी कि इसे ‘नेट जीरो एनर्जी’ की अवधारणा पर विकसित किया जा रहा है. यानी परिसर में ऊर्जा की जरूरत को पूरा करने के लिए सोलर पावर प्लांट लगाया जाएगा. इससे पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा और ऊर्जा की खपत को संतुलित किया जा सकेगा. प्रारंभिक चरण में इस कॉलेज में स्नातक स्तर पर 100 छात्रों के प्रवेश की व्यवस्था की जाएगी. आने वाले वर्षों में सीटों की संख्या और शैक्षणिक कार्यक्रमों को और विस्तार देने की योजना है.
भविष्य में यूनिवर्सिटी बनने की संभावना
इस महाविद्यालय का शिलान्यास 3 मार्च 2024 को किया गया था. उस समय मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया था कि भविष्य में इसे पशु चिकित्सा विज्ञान विश्वविद्यालय के रूप में भी विकसित किया जा सकता है. यहां पशुओं के इलाज के साथ-साथ नस्ल सुधार और आधुनिक पशुपालन से जुड़े शोध कार्य भी किए जाएंगे.
इसके अलावा इस संस्थान में फिशरीज से जुड़े कार्यक्रमों को भी आगे बढ़ाने की योजना है. इससे युवाओं को पशु चिकित्सा के क्षेत्र में करियर बनाने का बेहतर अवसर मिलेगा. खास बात यह है कि इस महाविद्यालय की डिजाइन प्राचीन भारतीय परंपरा से प्रेरित है और इसे तीसरी सदी के महान विद्वान राजा शालिहोत्र की परिकल्पना के आधार पर तैयार किया गया है. भारतीय परंपरा में राजा शालिहोत्र को पशु चिकित्सा विज्ञान का जनक माना जाता है.