यूपी में डिजिटल निगरानी से मजबूत होगी खेती, ‘साथी पोर्टल’ लागू होते ही नकली बीजों पर लगेगी सख्त रोक

Saathi Portal: यह पहल किसानों के हित में एक बड़ा और सकारात्मक कदम है. इससे बीज की गुणवत्ता पर निगरानी मजबूत होगी, नकली बीजों पर रोक लगेगी और किसानों का भरोसा बढ़ेगा. डिजिटल तकनीक के जरिए खेती को सुरक्षित और लाभदायक बनाने की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण प्रयास है.

Author
16 Feb 2026
( Updated: 16 Feb 2026
10:06 AM )
यूपी में डिजिटल निगरानी से मजबूत होगी खेती, ‘साथी पोर्टल’ लागू होते ही नकली बीजों पर लगेगी सख्त रोक
Image Source: Social Media

UP Saathi Portal App: उत्तर प्रदेश की डबल इंजन सरकार अब किसानों के लिए बीज खरीदने की पूरी प्रक्रिया को आसान, सुरक्षित और पारदर्शी बनाने जा रही है. सरकार ने तय किया है कि अप्रैल महीने से प्रदेश के सभी बीज विक्रेताओं को ‘साथी’ पोर्टल पर अपनी पूरी जानकारी दर्ज करना अनिवार्य होगा. इसका सीधा फायदा किसानों को मिलेगा. अब बीज कहाँ तैयार हुआ, किसने बनाया, किस कंपनी का है और उसका प्रमाणन सही है या नहीं यह सब जानकारी डिजिटल तरीके से उपलब्ध रहेगी. इस कदम का मुख्य उद्देश्य नकली और मिलावटी बीजों की बिक्री पर पूरी तरह रोक लगाना है, ताकि किसान ठगी का शिकार न हों और उन्हें अच्छी गुणवत्ता का बीज समय पर मिल सके.

विशेष प्रशिक्षण से तैयारी हुई मजबूत

इस नई व्यवस्था को सही तरीके से लागू करने के लिए कृषि विभाग ने बड़े स्तर पर प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाया. दो दिन तक चले इस प्रशिक्षण में केंद्र सरकार की तकनीकी टीम और Maharashtra के कृषि विभाग के विशेषज्ञों ने भाग लिया. महाराष्ट्र में यह पोर्टल पहले से सफलतापूर्वक चल रहा है, इसलिए वहां के अधिकारियों ने अपने अनुभव साझा किए. उन्होंने बताया कि इस डिजिटल व्यवस्था से किसानों को काफी लाभ मिला है और बीज वितरण में पारदर्शिता आई है. इससे उत्तर प्रदेश के अधिकारियों और बीज व्यापारियों को यह समझने में मदद मिली कि इस योजना को जमीन पर कैसे बेहतर तरीके से लागू किया जाए.

हर जिले में मिलेंगे मास्टर ट्रेनर

सरकार ने बीज उत्पादक संस्थाओं, एफपीओ और बीज कंपनियों के प्रतिनिधियों को “मास्टर ट्रेनर” के रूप में तैयार किया है. ये प्रशिक्षित लोग अब अपने-अपने जिलों में जाकर थोक और फुटकर बीज विक्रेताओं को ट्रेनिंग देंगे. अभी तक लगभग 70 प्रतिशत बीज विक्रेता पोर्टल पर पंजीकरण कर चुके हैं, जबकि बाकी बचे 30 प्रतिशत को जल्द से जल्द पंजीकरण पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं. यदि किसी को पंजीकरण में दिक्कत आती है तो जिला कृषि अधिकारी उनकी मदद करेंगे. इससे यह सुनिश्चित किया जाएगा कि अप्रैल से पहले सभी विक्रेता इस डिजिटल व्यवस्था से जुड़ जाएं.

‘साथी’ पोर्टल से क्यूआर कोड द्वारा पूरी जानकारी

केंद्र सरकार के कृषि मंत्रालय द्वारा विकसित ‘साथी’ (Seed Authentication, Traceability and Holistic Inventory) पोर्टल एक खास डिजिटल प्लेटफॉर्म है. अब बीज के हर पैकेट पर एक क्यूआर कोड लगा होगा. किसान अपने मोबाइल से इस क्यूआर कोड को स्कैन करके बीज की पूरी जानकारी देख सकेंगे जैसे बीज का स्रोत, किस एजेंसी ने बनाया, उसका प्रमाणन और गुणवत्ता की स्थिति. इससे किसान आसानी से असली और नकली बीज में फर्क कर पाएंगे. यह तकनीक किसानों को आत्मनिर्भर बनाएगी और उन्हें बेहतर फसल के लिए सही बीज चुनने में मदद करेगी.

दो चरणों में लागू होगी योजना

इस पूरी योजना को दो हिस्सों में लागू किया जा रहा है. पहले चरण में बीज उत्पादक संस्थाओं और एफपीओ को प्रशिक्षण दिया गया, जबकि दूसरे चरण में थोक और फुटकर विक्रेताओं को प्रशिक्षित किया गया. अब ये सभी लोग अपने-अपने जिलों में डीलरों और डिस्ट्रीब्यूटरों को प्रशिक्षित करेंगे. सरकार का लक्ष्य है कि अप्रैल से पूरे प्रदेश में यह नई डिजिटल व्यवस्था पूरी तरह से लागू हो जाए और किसानों को बिना किसी परेशानी के पारदर्शी और भरोसेमंद बीज उपलब्ध हो सके.

यह पहल किसानों के हित में एक बड़ा और सकारात्मक कदम है. इससे बीज की गुणवत्ता पर निगरानी मजबूत होगी, नकली बीजों पर रोक लगेगी और किसानों का भरोसा बढ़ेगा. डिजिटल तकनीक के जरिए खेती को सुरक्षित और लाभदायक बनाने की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण प्रयास है.

Tags

Advertisement

टिप्पणियाँ 0

LIVE
Advertisement
Podcast video
भारतीय सेना का वो जांबाज़ जो चीनी फौज से अकेला भिड़ गया,कर्नल ने कैमरे पर आकर पूरा सच बता दिया!
Advertisement
Advertisement
शॉर्ट्स
वेब स्टोरीज़
होम वीडियो खोजें