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दिल्ली पुलिस ने धार्मिक स्थलों, मंत्रालयों और सुरक्षाबलों पर हमले की बड़ी साजिश की नाकाम, ISI-दाऊद माड्यूल से जुड़े 9 गिरफ्तार

दिल्ली पुलिस को बड़ी कामयाबी हाथ लगी है. देशभर में धार्मिक स्थलों, सरकारी इमारतों, मंत्रालयों और सुरक्षाबलों पर हमले की बड़ी साजिश को नाकाम कर दिया गया है. ISI-दाऊद माड्यूल और PAK टेरर नेटवर्क के 9 आतंकी गिरफ्तार किए गए हैं.

Image Source: IANS
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दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने राष्ट्रीय सुरक्षा के मोर्चे पर एक बड़ी सफलता हासिल करते हुए पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई (ISI), अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम और पाकिस्तानी गैंगस्टर शहजाद भट्टी के नेटवर्क से जुड़े एक बेहद खतरनाक आतंकी मॉड्यूल के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है. इस सघन अभियान के तहत अब तक नौ लोगों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि कई अन्य संदिग्धों को हिरासत में लेकर उनसे सघन पूछताछ की जा रही है. गिरफ्तार किए गए इन आरोपियों के पास से पाकिस्तान में निर्मित अत्याधुनिक हथियार, ग्रेनेड और भारी मात्रा में विस्फोटक सामग्री बरामद हुई है.

हमले की बड़ी साजिश नाकाम और रडार पर 600 लोगों का नेटवर्क

पुलिस जांच के मुताबिक, इस मॉड्यूल से जुड़े ये संदिग्ध आतंकी देश को दहलाने की बड़ी साजिश रच रहे थे. इनके निशाने पर मुख्य रूप से दिल्ली, मुंबई, पंजाब और चंडीगढ़ के प्रमुख धार्मिक स्थल, महत्वपूर्ण सरकारी इमारतें, मंत्रालय और सुरक्षाबलों के ठिकाने थे. यह पूरी साजिश पाकिस्तान और दुबई में बैठे आकाओं (हैंडलरों) के सीधे निर्देश पर रची जा रही थी.

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ISI मॉड्यूल का भांडाफोड़

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जांच एजेंसियों का मानना है कि यह देशविरोधी नेटवर्क भारत के विभिन्न हिस्सों में सक्रिय था और सोशल मीडिया सहित अन्य डिजिटल व गुप्त माध्यमों के जरिए युवाओं को अपने संपर्क में ला रहा था. वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, अब तक की जांच के दौरान देशभर में करीब 600 ऐसे लोगों की पहचान की गई है, जो किसी न किसी माध्यम से पाकिस्तानी गैंगस्टर शहजाद भट्टी के सीधे या परोक्ष संपर्क में थे. खुफिया एजेंसियां अब इन सभी 600 लोगों की दैनिक गतिविधियों, उनके संपर्कों और उनके संभावित आतंकी संबंधों की गहन जांच कर रही हैं. प्रारंभिक जांच में यह पता लगाने का सघन प्रयास किया जा रहा है कि इन लोगों का नेटवर्क किस स्तर तक फैला हुआ था और इसके पीछे उनका अंतिम उद्देश्य क्या था.

मुंबई में छापेमारी और दिल्ली से लेकर पंजाब तक गिरफ़्तारी

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इस पूरे ऑपरेशन के दौरान देश के अलग-अलग हिस्सों से गिरफ्तारियां की गई हैं. दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने मुंबई के कुर्ला और मुंब्रा क्षेत्रों में व्यापक स्तर पर छापेमारी और सघन तलाशी अभियान चलाया. इसी कड़ी में मुंबई के कुर्ला इलाके से साजिद महबूब शेख उर्फ अरबाज खान और मुंब्रा क्षेत्र से तौकीर रिजवान शेख को गिरफ्तार किया गया है.

दोनों आरोपियों को आगे की पूछताछ के लिए ट्रांजिट रिमांड पर दिल्ली लाया गया है. जांच अधिकारियों का स्पष्ट कहना है कि इन दोनों संदिग्धों को आकाओं द्वारा दिल्ली आने के निर्देश दिए गए थे और राजधानी पहुंचने के बाद ही उन्हें आगे का कोई बड़ा टारगेट या नई जिम्मेदारी सौंपी जानी थी. जांच में यह अहम बात भी सामने आई है कि इन आरोपियों को दिल्ली की यात्रा और अन्य आपराधिक गतिविधियों को अंजाम देने के लिए आवश्यक आर्थिक सहायता (फंडिंग) पहले ही उपलब्ध कराई गई थी. एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि यह टेरर फंडिंग कहां से आई, इसका मुख्य स्रोत क्या था और इस आर्थिक नेटवर्क (OGW, UGW और मददगारों) में कौन-कौन लोग शामिल हैं.

पंजाब मॉड्यूल दिल्ली पहुंचने से पहले दबोचा गया

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मुंबई के अलावा, इस कार्रवाई में एक पंजाब मॉड्यूल का भी पर्दाफाश हुआ है जिसे दिल्ली पहुंचने से पहले ही दबोच लिया गया. दरअसल, पुलिस को मुंबई में आरोपियों की गिरफ्तारी और उनसे पूछताछ के दौरान यह अहम सुराग मिला था कि आतंकियों का एक नया मॉड्यूल पंजाब से दिल्ली पहुंचने वाला है. इस पुख्ता सूचना के आधार पर स्पेशल सेल ने महरौली-बदरपुर रोड पर त्वरित कार्रवाई करते हुए हरविंदर सिंह, गगनदीप सिंह और मनजीत सिंह नामक तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया.

नेपाल और थाईलैंड जेल का अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन

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इस मॉड्यूल के तार केवल भारत और पाकिस्तान तक ही सीमित नहीं हैं, बल्कि इसमें नेपाल और थाईलैंड जेल का एक बड़ा कनेक्शन भी सामने आया है. जांच के दौरान एक नेपाली नागरिक आंग कामी लामा को भी दबोचा गया है. उस पर यह गंभीर आरोप है कि वह दिल्ली में इन सभी आरोपियों के लिए छिपने के ठिकाने (सेफ हाउस) और रहने की व्यवस्था करने के साथ-साथ नेटवर्क की फंडिंग संभालने का भी मुख्य काम करता था.

आतंकी मॉड्यूल कैसे काम कर रहा था?

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स्पेशल सेल की विस्तृत जांच में यह सामने आया है कि यह पूरा आतंकी मॉड्यूल पाकिस्तान स्थित अंडरवर्ल्ड ऑपरेटिव मुन्ना झिंगाड़ा, शहजाद भट्टी और अन्य आईएसआई सहयोगियों के सीधे इशारे पर काम कर रहा था. पुलिस का दावा है कि मुन्ना झिंगाड़ा अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम का बेहद करीबी रहा है और वह वर्ष 2000 में बैंकॉक में गैंगस्टर छोटा राजन पर हुए जानलेवा हमले में भी शामिल था. इस वारदात के बाद वह 17 साल तक थाईलैंड की जेल में बंद रहा था.

नेपाली शख्स की भी संलिप्तता आई सामने

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यहीं से नेपाली नागरिक आंग कामी लामा का कनेक्शन जुड़ता है. आंग कामी लामा साल 2001 से 2018 तक थाईलैंड की उसी जेल में एक नारकोटिक्स (मादक पदार्थ) मामले में बंद था. थाईलैंड की उसी जेल में उसकी मुलाकात मुन्ना झिंगाड़ा और अन्य पाकिस्तानी नागरिकों से हुई थी. सजा काटने और जेल से रिहा होने के बाद भी वह इन खूंखार अपराधियों के संपर्क में लगातार बना रहा और भारत में उनके लिए स्लीपर सेल की तरह काम करने लगा.

अधिकारियों का कहना है कि मामले की जांच अभी जारी है और आने वाले दिनों में इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों के खिलाफ भी सख्त कार्रवाई की जा सकती है. सुरक्षा एजेंसियां इस पूरे मामले को राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा हुआ एक बेहद संवेदनशील मामला मान रही हैं और सभी पहलुओं की बारीकी से जांच कर रही हैं.

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