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कांवड़ यात्रा में साज़िश करने वालों पर सीएम सख्त, दुकानदारों की खैर नहीं!

उत्तराखंड में कांवड़ यात्रा शुरू होने जा रही है. लेकिन इस बार सिर्फ यात्रा नहीं होगी, बल्कि एक-एक दुकान पर नजर रखी जाएगी, क्योंकि सीएम पुष्कर सिंह धामी ने बड़ा फैसला लेते हुए आदेश दिया है अब कांवड़ रूट पर कोई भी खाने-पीने की दुकान बिना नाम, बिना लाइसेंस, बिना पहचान के नहीं चलेगी. यानी नेमप्लेट लगाना जरूरी होगा वरना 2 लाख का जुर्माना लगेगा.

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ये कांवड़ यात्रा सिर्फ आस्था की नहीं, अब उत्तराखंड सरकार की परीक्षा भी बन चुकी है. यही वजह है कि इस बार मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सीधा संदेश दे दिया है. शुद्ध भोजन नहीं, तो दुकान नहींनेमप्लेट नहीं, तो जुर्माना ठोका जाएगा. यानी धर्म के साथ खिलवाड़ करने के लिए अगर चालाकी दिखाओगे, तो किसी हाल में छोड़े नहीं जाओगे.

दरअसल, 11 जुलाई से कांवड़ यात्रा शुरू हो रही है। लाखों की भीड़ जुटेगी, भक्तों की टोलियां निकलेंगी. ऐसे में सभी कांवड़ भक्तों के लिए ना सिर्फ सीएम योगी ने युद्ध स्तर पर तैयारी की है, बल्कि धामी सरकार ने भी पूरा मोर्चा संभाल लिया है. इस बार ख़ास नज़र उन साजिशकर्ताओं पर रहेगी, जो कांवड़ यात्रा रूट पर खाने-पीने की दुकानें लगाते हैं और साज़िश की फ़िराक़ में माहौल खराब करने की कोशिश में जुट जाते हैं. नक़ाब पहनकर घुसपैठ की कोशिश करते नज़र आते हैं. ऐसे लोगों को बेनक़ाब करने के लिए सरकार ने दुकानदारों पर सख्ती दिखाई है. कांवड़ियों के लिए लगने वाली खाने-पीने की दुकानें, ढाबों और होटलों की हकीकत खंगालने के लिए सरकार ने सख्त निर्देश जारी किए हैं. इनमें ना सिर्फ दुकानदारों की पहचान के लिए नेमप्लेट लगाना अनिवार्य होगा, बल्कि लाइसेंस के बिना कोई काम नहीं चलेगा. ताकि यह साफ़ हो सके कि दुकान हिंदू की है या मुसलमान की, और कहीं कोई नॉनवेज तो नहीं परोसा जा रहा.

सभी बातों का ध्यान रखते हुए धामी सरकार बेहद सख्त हो गई है. सिर्फ भक्तों की भीड़ पर नहीं, बल्कि भीड़ में घुसने वालों पर भी नजर है… क्योंकि इतिहास गवाह है. कुछ लोग खाने के ज़रिए समाज में ज़हर खोलने की कोशिश करते हैं. कुछ पहचान छुपाकर फर्जीवाड़ा करते हैं. कुछ थूक जिहाद फैलाकर धर्म को निशाना बनाते हैं. इन्हीं सब बातों का ध्यान रखते हुए धामी सरकार इस बार चूकने के मूड में नहीं है. तभी तो मुख्यमंत्री धामी ने सख्त निर्देश जारी कर दिए हैं.

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कांवड़ यात्रा मार्गों में किसी भी खाद्य दुकान पर दुकानदार का नाम होना अनिवार्य है. दुकानदार के पास फूड लाइसेंस नंबर और सरकारी पहचान पत्र की नेमप्लेट लगाना अनिवार्य होगा. बिना नाम के चलने वाली खाने की दुकानें बंद की जाएंगी. अगर कोई दुकान बिना इन दस्तावेजों के पाई गई, तो सीधे 2 लाख रुपये तक का जुर्माना लगेगा. इसके साथ ही दुकान को सील भी किया जाएगा. तो आदेश साफ है. लापरवाही दिखाओगे, तो 2 लाख के जुर्माने के साथ-साथ दुकान भी सील करवाई जाएगी. क्योंकि सीएम धामी चेतावनी दे चुके हैं कि भक्तों को भक्ति के नाम पर ज़हर नहीं परोसा जाएगा. अब आप सोच रहे होंगे कि नेमप्लेट से क्या फर्क पड़ेगा? चलिए इसके बारे में कुछ विस्तार से बताते हैं.

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दरअसल, नेमप्लेट से यह पता चलेगा कि कौन दुकान चला रहा है? उसकी फूड सेफ्टी की अथॉरिटी क्या है? लाइसेंस वैरिफाइड है या नहीं? कहीं मांसाहारी सामान तो नहीं बिक रहा? कोई पहचान छिपाकर दुकान तो नहीं चला रहा? दरअसल, थूक जिहाद हो या नाम बदलकर खाना देने का अपराध बीते दिनों कई ऐसे कांड पकड़े गए हैं जो बेहद चौंकाने वाले हैं. यही वजह है कि ID टैग कांवड़ भक्तों की सुरक्षा का पहला हथियार बनेगा. क्योंकि सावन की कांवड़ यात्रा कोई मामूली यात्रा नहीं है. यह आस्था का महासंगम है. कांवड़िए आस्था के साथ निकलते हैं. ऐसे में अगर कोई आस्था को साज़िशन खाने के ज़रिए या फिर झूठ बोलकर भंग करने की कोशिश करेगा, या फिर किसी दुकान के खाने से कोई बीमार पड़ेगा, तो यह कैसे बर्दाश्त किया जाएगा?

इसीलिए सरकार की तरफ से जागरूकता टीम, फूड इंस्पेक्शन यूनिट और मोबाइल टेस्टिंग लैब्स तैनात की जा रही हैं. हर चेकपोस्ट पर निगरानी रहेगी. हर दुकान पर नज़रें गड़ी रहेंगी. कैमरे हर एंगल से रिकॉर्ड करेंगे.  कहीं नकली घी तो नहीं, कहीं एक्सपायर्ड तेल तो नहीं, कहीं सड़ा हुआ समोसा तो नहीं. जो पकड़ा गया, उस पर तुरंत कार्रवाई होगी. स्थानीय प्रशासन को आदेश मिल चुका है कि पहले समझाओ, फिर ठोंको. क्योंकि उत्तराखंड में कांवड़ यात्रा हो या चारधाम यात्रा, पर्यटन हो या तीर्थ — हर ज़र्रा अब नियमों से चलेगा. धामी सरकार ने यह भी साफ कर दिया है. नाम नहीं, काम दिखाओ,  वरना दुकान बंद करवाओ.

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