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गोरखपुर में चैरिटेबल ब्लड सेंटर का लोकार्पण, योगी बोले- रक्तदान से मिलता है जरूरतमंदों को नया जीवन

मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि रक्त की मांग के अनुरूप आपूर्ति नहीं हो पाती है. इसके लिए चिकित्सकों को स्वैच्छिक रक्तदान के प्रति लोगों को प्रेरित करना चाहिए. सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल कर समय-समय पर रक्तदान की अपील और जागरूकता अभियान चलाए जाने चाहिए.

Image Credit: UPID
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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार को कहा कि साढ़े नौ वर्ष पहले पूर्वी उत्तर प्रदेश में इंसेफेलाइटिस से तड़पते बच्चों और दम तोड़ते बचपन को देखकर हर जागरूक माता-पिता चिंतित रहता था. अब इंसेफेलाइटिस समाप्त हो गया है. उन्होंने कहा, माफिया और मच्छर की तरह इंसेफेलाइटिस भी समाप्त हो गया है. अब हम नए युग में नए उत्तर प्रदेश का दर्शन कर रहे हैं.
 
गोरखपुर में आईएमए के चैरिटेबल ब्लड सेंटर का मुख्यमंत्री ने किया लोकार्पण
मुख्यमंत्री योगी मंगलवार को तारामंडल स्थित सेठ बद्री प्रसाद जायसवाल मेमोरियल हॉल में इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) गोरखपुर के चैरिटेबल ब्लड सेंटर के लोकार्पण समारोह को संबोधित कर रहे थे. उन्होंने कहा कि अत्याधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर, तकनीक, दवाएं और संसाधन उपलब्ध कराए जा सकते हैं, लेकिन खून बनाया नहीं जा सकता. रक्तदान उस संवेदना का प्रतीक है, जिसके माध्यम से एक व्यक्ति किसी जरूरतमंद को नया जीवन देता है.

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मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि आईएमए केवल प्रैक्टिस करने वाले चिकित्सकों की संस्था नहीं है. गोरखपुर में निशुल्क ओपीडी के बाद चैरिटेबल ब्लड सेंटर शुरू करके उसने सामाजिक उत्तरदायित्व का उदाहरण प्रस्तुत किया है. किसी भी संस्था की वास्तविक पहचान इससे होती है कि वह अपनी विशेषज्ञता का लाभ समाज के अंतिम पायदान पर बैठे व्यक्ति तक पहुंचाने में कितना योगदान देती है.
 
उन्होंने कहा कि 2017-18 में गोरखपुर के सीतापुर आई हॉस्पिटल में आईएमए ने निशुल्क ओपीडी शुरू की थी. इसके बाद आईएमए ने अपने कार्यालय के लिए भूमि मांगी तो गोरखपुर विकास प्राधिकरण के माध्यम से भूखंड उपलब्ध कराने में मदद की गई. आईएमए ने इस भूखंड का बेहतर उपयोग करते हुए चैरिटेबल ब्लड सेंटर स्थापित किया है, जो पूर्वी उत्तर प्रदेश के जरूरतमंद मरीजों को रक्त उपलब्ध कराने में योगदान देगा. गोरखपुर में आईएमए से 1400 से अधिक चिकित्सक जुड़े हैं.
 
एक बेड पर भर्ती रहते थे चार-चार मरीज
मुख्यमंत्री योगी ने पूर्वी उत्तर प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं में आए बदलाव का उल्लेख करते हुए कहा कि कुछ वर्ष पहले बीआरडी मेडिकल कॉलेज ही इस क्षेत्र में स्वास्थ्य सुविधाओं का प्रमुख केंद्र था. स्थिति यह थी कि एक ही बेड पर चार-चार मरीज तक भर्ती रहते थे. तीसरी मंजिल पर पंखे, शौचालय और दूसरी जरूरी सुविधाओं तक का अभाव था. नौ वर्ष पहले जो बीआरडी मेडिकल कॉलेज स्वयं अस्वस्थ था, आज वही सुपर स्पेशियलिटी और इंसेफेलाइटिस समेत विभिन्न बीमारियों के उपचार का प्रमुख केंद्र बन गया है.
 
उन्होंने कहा कि गोरखपुर में एम्स स्थापित हो चुका है. महाराजगंज, कुशीनगर, देवरिया, सिद्धार्थनगर, बस्ती, बलरामपुर, बहराइच, गोंडा, अयोध्या और अंबेडकरनगर समेत विभिन्न जिलों में मेडिकल कॉलेज शुरू हो चुके हैं. प्रदेश में 75 जिले हैं, जबकि मेडिकल कॉलेजों की संख्या 85 हो गई है. दो एम्स भी संचालित हैं. एमबीबीएस की सीटें 4600 से बढ़कर 13,500 से अधिक हो चुकी हैं और पीजी की सीटें दोगुनी हुई हैं. नर्सिंग और पैरामेडिकल शिक्षा का भी विस्तार किया जा रहा है.
 
डॉक्टरों के लिए सड़कों पर करना पड़ता था आंदोलन
मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि एक समय प्रदेश के प्रत्येक जिले की पहचान किसी न किसी दुर्दांत माफिया से जुड़ गई थी. गोरखपुर में डॉक्टरों का अपहरण होता था, उनसे रंगदारी मांगी जाती थी, धमकी भरे फोन आते थे और उनके चेंबर में घुसकर मारपीट की जाती थी. इन घटनाओं के खिलाफ उन्हें चिकित्सकों के साथ सड़कों पर आंदोलन करना पड़ता था. आज गोरखपुर के साथ पूरे प्रदेश में चिकित्सक, व्यापारी और नागरिक स्वयं को सुरक्षित महसूस कर रहे हैं. अब प्रदेश की पहचान माफिया से नहीं बल्कि 'वन डिस्ट्रिक्ट, वन मेडिकल कॉलेज' के लक्ष्य से बन रही है.
 
गुरु गोरखनाथ चिकित्सालय का किया जिक्र
मुख्यमंत्री योगी ने गुरु गोरखनाथ चिकित्सालय की शुरुआत का जिक्र करते हुए कहा कि पहले 10 बेड से अस्पताल शुरू करने की चर्चा हुई थी, लेकिन गोरखपुर के चिकित्सकों के सहयोग से शुरुआत में ही इसे 100 बेड का अस्पताल बनाया गया. इस चिकित्सालय ने दिखाया कि चैरिटी में भी अस्पताल और ब्लड बैंक सफलतापूर्वक संचालित हो सकते हैं. यहां ब्लड सेपरेटर, एफेरेसिस और डायलिसिस जैसी सुविधाएं विकसित हुईं. उन्होंने कहा कि जिस डायलिसिस के लिए कभी लोगों को लखनऊ या बीएचयू जाना पड़ता था, आज गोरखपुर में गुणवत्तापूर्ण सुविधा उपलब्ध है. सरकार ने जिला अस्पतालों में भी निशुल्क डायलिसिस की व्यवस्था शुरू की है.
 
मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं को सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के रूप में विकसित करने की दिशा में भी काम किया जा रहा है. आईआईटी कानपुर के सहयोग से मेडटेक सेंटर ऑफ एक्सीलेंस विकसित किया जा रहा है और एसजीपीजीआई में भी सेंटर ऑफ एक्सीलेंस पर काम हो रहा है.
 
स्वैच्छिक रक्तदान के लिए आगे आएं लोग
मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि रक्त की मांग के अनुरूप आपूर्ति नहीं हो पाती है. इसके लिए चिकित्सकों को स्वैच्छिक रक्तदान के प्रति लोगों को प्रेरित करना चाहिए. सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल कर समय-समय पर रक्तदान की अपील और जागरूकता अभियान चलाए जाने चाहिए.
 
उन्होंने पेशेवर रक्तदाताओं को लेकर भी आगाह किया. कहा कि विभिन्न बीमारियों से ग्रसित पेशेवर रक्तदाताओं पर प्रभावी अंकुश नहीं लगाया गया तो संक्रमण का गंभीर संकट पैदा हो सकता है. ऐसी गतिविधियों को शासन-प्रशासन के संज्ञान में लाने के साथ चिकित्सकों को जागरूकता कार्यक्रमों से भी जुड़ना चाहिए.
 
मशीनों का निरीक्षण कर जानी कार्यप्रणाली
इससे पहले मुख्यमंत्री योगी ने चैरिटेबल ब्लड सेंटर में स्थापित अत्याधुनिक मशीनों का निरीक्षण किया. चिकित्सकों से मशीनों के संचालन, रक्त संग्रह, जांच और अन्य व्यवस्थाओं की जानकारी ली. इसके बाद शिलापट्ट का अनावरण कर ब्लड सेंटर का विधिवत लोकार्पण किया.
 
नन्ही बच्ची को दुलारा, दिया आशीर्वाद
निरीक्षण के दौरान परिसर में मौजूद एक नन्ही बच्ची पर मुख्यमंत्री योगी की नजर पड़ी. उन्होंने बच्ची से आत्मीयता से बातचीत की, उसका हालचाल पूछा और स्नेह व आशीर्वाद दिया.
 
चिकित्सकों ने किया स्वागत
कार्यक्रम में डॉ. दिनेश चंद्रा और डॉ. अमरेश सिंह ने मुख्यमंत्री योगी का पुष्पगुच्छ देकर स्वागत किया. डॉ. वाई सिंह ने स्मृति चिह्न भेंट किया. आईएमए गोरखपुर के अध्यक्ष डॉ. आरपी शुक्ल ने मुख्यमंत्री समेत सभी अतिथियों का स्वागत किया. उन्होंने कहा कि चैरिटेबल ब्लड सेंटर क्षेत्र में स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत करने और जरूरतमंद मरीजों तक रक्त की उपलब्धता सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा.

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कार्यक्रम में महापौर डॉ. मंगलेश श्रीवास्तव, एमएलसी डॉ. धर्मेंद्र सिंह, विधायक विपिन सिंह, प्रदीप शुक्ला व विमलेश पासवान, राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष चारु चौधरी, भाजपा जिलाध्यक्ष जनार्दन तिवारी, महानगर अध्यक्ष रमेश प्रताप गुप्त, आईएमए गोरखपुर के अध्यक्ष डॉ. आरपी शुक्ल, सचिव डॉ. वाई सिंह, गुरु गोरखनाथ ब्लड बैंक के प्रभारी एवं आईएमए गोरखपुर के संरक्षक डॉ. अवधेश अग्रवाल, डॉ. सीएम सिन्हा, डॉ. डीके सिंह समेत बड़ी संख्या में चिकित्सक उपस्थित रहे.

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