अजय राय के ‘मछली भोज’ पर गरमाई सियासत, मुख्यमंत्री से लेकर संतों तक फूटा गुस्सा, योगी बोले- इनका दोहरापन देख गिरगिट भी शरमा जाए
यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय रविवार को अयोध्या में निषाद समाज के एक कार्यक्रम में गए थे। वहां उनके स्वागत में मछली भोज का आयोजन किया गया. जिसको लेकर अयोध्या के संतों में नाराजगी है.
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सावन के पवित्र महीने और एकादशी के दिन कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अजय राय के स्वागत कार्यक्रम के दौरान मछली भोज के आयोजन पर अयोध्या के संतों से लेकर यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी नाराजगी है. मुख्यमंत्री ने इसको लेकर अजय राय पर निशाना साधा. तो वही संत समाज ने इसे सनातन धर्म का अपमान बताया और कड़ी कार्रवाई की मांग की.
मुख्यमंत्री ने अजय राय पर साधा निशाना
मुख्यमंत्री ने रायबरेली में एक जनसभा को संबोधित करते हुए कहा "आपने कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष का व्यवहार देखा. वे हनुमानगढ़ी में पूजा-अर्चना करने जाते हैं, लेकिन बाद में बाहर मछली का दावत उड़ाते हैं. वे बाहर कुछ भी खा सकते थे अयोध्या के अलावा कहीं भी. फिर भी, वे यही दोहरापन दिखाते हैं. इन लोगों को देखकर तो गिरगिट भी शरमा जाए. उसे भी हैरानी होगी कि यह कैसी इंसानी प्रजाति है जो मंदिर के अंदर 'राम-राम' का जाप करती है और बाहर निकलते ही मछली खाती है."
मुख्यमंत्री यही नहीं रुके उन्होंने आगे कहा "यही इनका इतिहास है. कांग्रेस के इस प्रदेश अध्यक्ष का इतिहास. जब एक माफिया डॉन ने उनके भाई की हत्या कर दी तो इस व्यक्ति ने अपराधी के खिलाफ गवाही नहीं दी बल्कि वे उसके सामने घुटने टेककर झुक गए. वे उसी आदमी के सामने झुके जिसने बेरहमी से उनके भाई को मारा था. हालात तब बदले जब सरकार ने दखल दिया और उस माफिया तत्व को कुचल दिया वरना, इन लोगों ने राज्य को माफिया-प्रधान इलाका बना दिया था, जिससे पहचान का संकट पैदा हो गया था."
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अजय राय पर फूटा संतो क गुस्सा
वही हनुमान गढ़ी के पुजारी संत देवेशाचार्य जी महाराज ने इस घटना पर कड़ी प्रतिक्रिया दी. उन्होंने आईएएनएस से कहा, "यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है कि कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष ने भगवान के दर्शन करने के बाद, श्रावण के पवित्र महीने में, एकादशी की पवित्र तिथि पर जिस तरह से मछली भोज का आयोजन किया है, उन्होंने सनातन का मजाक उड़ाने का काम किया है, सनातनियों का अपमान करने का काम किया है. यह बिल्कुल अक्षम्य है."
उन्होंने कहा कि उन्हें दंड मिलना चाहिए. सभी सनातनियों को एकजुट होकर उन्हें दंडित करना चाहिए, ताकि भविष्य में कोई भी ऐसी गलती करने की हिम्मत न करे.
“ऐसा घृणित काम करने वाले को निश्चित तौर पर दंड मिलेगा”
संत सीताराम दास ने भी इस पर तीखी टिप्पणी की. उन्होंने कहा कि ऐसा घृणित काम करने वाले को निश्चित तौर पर दंड मिलेगा, उसे कोई माफ नहीं कर सकता. ये कभी सनातनी के हमदर्द नहीं हो सकते हैं. ये लोग टोपी पहनते हैं और टोपी पहनाने वालों को खुश करने का काम करते हैं.
उन्होंने आरोप लगाया कि ये लोग आपस में सनातनियों को तोड़ने की साजिश और षड्यंत्र करते हैं. ऐसे महापापियों को दंड देने की जरूरत है. समय आने पर इनको ऐसा दंड मिलेगा कि पीढ़ी दर पीढ़ी याद रखेगा.
रामदल ट्रस्ट के अध्यक्ष कल्कि राम ने कहा कि अयोध्या में जब कोई आम श्रद्धालु भी आता है, तो वह दो दिन पहले से ही अपने शरीर की शुद्धि करता है और शुद्ध सात्विक होकर रहता है. वहीं कांग्रेस संगठन के लोग यहां आकर पहले भगवान राम के दर्शन करते हैं और फिर मांसाहार का सेवन करते हैं. उन्हें जान लेना चाहिए कि उनका सत्यनाश निश्चित है.
"सावन महीना पूजा पाठ का है”
इस मामले पर अयोध्या के राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद मुकदमे के पूर्व पक्षकार इकबाल अंसारी ने भी लोगों को सलाह दी है. उन्होंने कहा कि सावन का महीना पूजा-पाठ का महीना है और इस महीने में लोगों को मांस-मछली और शराब से दूर रहना चाहिए. अयोध्या जैसे धार्मिक शहर में इस तरह के कार्यक्रम करना उचित नहीं है.
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इकबाल अंसारी ने अपील करते हुए कहा, "सावन महीना पूजा पाठ का है, और इस महीने में लोगों को मांस मछली को वर्जित रखना चाहिए. लोगों को चाहिए कि इस पवित्र महीने में पूजा-पाठ पर ध्यान दें. सभी से अपील है कि सावन के महीने में मांस मछली का सेवन न करें, क्योंकि यह महीना हरियाली का महीना होता है, यह पवित्र महीना भक्ति का महीना होता है."