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4 साल का इंतजार खत्म, UP को मिला स्थायी DGP; जानें कौन हैं एलवी एंटनी देव कुमार

उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने चार साल बाद स्थायी डीजीपी नियुक्त करने का फैसला लिया है. 1994 बैच के आईपीएस एल.वी. एंटनी देव कुमार को इस पद पर प्रमोशन मिला है. राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने मंजूरी दे दी है और यह 1 मार्च 2026 से प्रभावी है.

Antony Dev Kumar (File Photo)
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उत्तर प्रदेश में पुलिस व्यवस्था को लेकर एक बड़ी और अहम खबर सामने आई है. सूबे योगी आदित्यानाथ की सरकार ने राज्य में लंबे समय से चल रही अनिश्चितता के बाद अब प्रदेश को स्थायी पुलिस महानिदेशक (DGP) मिलने जा रहा है. सरकार ने 1994 बैच के आईपीएस (IPS) अधिकारी एल.वी. एंटनी देव कुमार (Antony Dev Kumar) को डीजीपी पद पर प्रमोशन देने की मंजूरी दे दी है. यह फैसला प्रशासनिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है.

राज्यपाल आनंदीबेन पटेल (Anandiben Patel) ने भी इस प्रस्ताव पर अपनी स्वीकृति दे दी है. गृह विभाग द्वारा जारी आदेश के अनुसार, यह पदोन्नति 1 मार्च 2026 से प्रभावी मानी जाएगी. हालांकि उनकी औपचारिक तैनाती का आदेश अलग से जारी किया जाएगा. इस आदेश पर अपर मुख्य सचिव संजय प्रसाद के हस्ताक्षर हैं, जिससे खबर की आधिकारिक पुष्टि हो चुकी है.

आदेश की अहम जानकारी

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गृह विभाग के आदेश संख्या 247/छःपुसे-2-2026 दिनांक 20 मार्च 2026 में स्पष्ट किया गया है कि देव कुमार को पे-मैट्रिक्स लेवल-16 में पदोन्नत किया गया है. इस स्तर पर वेतनमान 2,05,400 से 2,24,400 रुपये तक निर्धारित है. यह न सिर्फ पद बल्कि जिम्मेदारी के लिहाज से भी बेहद अहम माना जाता है. खास बात यह है कि उत्तर प्रदेश में पिछले चार वर्षों से स्थायी डीजीपी की नियुक्ति नहीं हो पा रही थी. वर्ष 2022 से कार्यवाहक व्यवस्था के तहत ही पुलिस प्रमुख का कामकाज चल रहा था. इससे प्रशासनिक निर्णयों और पुलिस सुधारों पर भी असर पड़ रहा था. ऐसे में इस नियुक्ति को एक स्थिरता की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है.

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देव कुमार की क्या है पृष्ठभूमि?

एल.वी. एंटनी देव कुमार इससे पहले एडीजी रूल्स एंड मैनुअल के पद पर तैनात थे. उन्होंने अपने करियर में सीबीसीआईडी, एसएसएफ और पर्सनल जैसे महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी भी संभाली है. मूल रूप से तमिलनाडु के तिरुनेलवेली के रहने वाले देव कुमार ने राजनीति विज्ञान और इतिहास में स्नातक और परास्नातक की पढ़ाई की है. उनका अनुभव और प्रशासनिक पकड़ उन्हें इस पद के लिए मजबूत बनाती है.

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इस फैसले से कार्यवाहक व्यवस्था पर लगा विराम

इससे पहले 31 मई को राजीव कृष्ण को कार्यवाहक डीजीपी बनाया गया था. उन्होंने प्रशांत कुमार के रिटायरमेंट के बाद यह जिम्मेदारी संभाली थी. लेकिन लगातार कार्यवाहक व्यवस्था को लेकर सवाल उठ रहे थे, जिस पर अब विराम लग गया है.

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बताते चलें कि आने वाले समय में पंचायत चुनाव और कई विधानसभा उपचुनाव प्रदेश के सामने बड़ी चुनौती के रूप में खड़े हैं. ऐसे में एक स्थायी डीजीपी की नियुक्ति से कानून-व्यवस्था को मजबूत करने में मदद मिलेगी. हालांकि देव कुमार की सेवा 28 मई को समाप्त हो रही है. अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या उन्हें सेवा विस्तार मिलेगा या नहीं. आने वाले दिनों में इस पर सबकी नजरें टिकी रहेंगी.

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