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20 के जिला छोड़ने पर रोक, 50 को नोटिस...दान चोरी मामले में ताबड़तोड़ एक्शन, CEO की नियुक्ति करेगा राम मंदिर ट्रस्ट

राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में सरकार ताबड़तोड़ एक्शन ले रही है. इसी दौरान केस की जांच के सिलसिले में करीब 50 लोगों को नोटिस भेजकर पूछताछ के लिया बुलाया जा रहा है, वहीं 20 लोगों के जिला छोड़ने पर रोक लगा दी गई है.

Ram Mandir Trust Meeting (File Photo) Image Source: IANS
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राम मंदिर दान चोरी मामला अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है. SC में इस पर 13 जुलाई को सुनवाई होगी. इसी बीच पूरे मामले में सरकार और प्रशासन ताबड़तोड़ एक्शन ले रहा है. जानकारी के मुताबिक चंदा चोरी को लेकर हो रही जांच में हुए खुलासों के बीच गिरफ्तार 8 आरोपियों के लगातार संपर्क में रहे 20 लोगों पर भी सख्ती बढ़ा दी गई है. सरकार ने इन सभी के जिला छोड़कर बाहर जाने पर ना सिर्फ रोक लगा दी है बल्कि 50 से अधिक लोगों को नोटिस जारी कर बयान दर्ज कराने को के निर्देश दिए गए हैं.

राम मंदिर दान चोरी मामले में ताबड़तोड़ एक्शन

इसी बीच राम मंदिर ट्रस्ट चंपत राय की महासचिव पद से विदाई और कृष्ण मोहन के अंतरिम महासचिव बनने के बाद अब श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट सीईओ की नियुक्ति की तैयारी में है. कहा जा रहा है ट्रस्ट शासन की ओर से नहीं, अपने पैसे से CEO की नियुक्ति और पद सृजित करना चाहता है.

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CEO की नियुक्ति की तैयारी में श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट

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ख़बर के मुताबिक श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की आखिरी और आपातकाली बैठक में सीईओ की नियुक्ति को लेकर पहल भी की गई है. इतना ही नही ट्रस्ट ने सीईओ चयन के लिए रिटायर्ड मुख्य न्यायाधीश प्रमोद कोहली, लेफ्टिनेंट जनरल (रिटायर्ड) विष्णुकांत चतुर्वेदी और सुरेश हावड़े की तीन सदस्यीय कमेटी भी बना दी है. यह सभी अपने-अपने क्षेत्र के विशेषज्ञ हैं. कमेटी ट्रस्ट को तीन नाम सौंपेगी. अगली बैठक में मुख्य कार्यकारी अधिकारी के नाम पर चर्चा हो सकती है.

चढ़ावा चोरी का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा

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सुप्रीम कोर्ट सोमवार को उन जनहित याचिकाओं (पीआईएल) पर सुनवाई करेगा, जिनमें अयोध्या के श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को मिले दान और चढ़ावे के इस्तेमाल में वित्तीय गड़बड़ियों की अदालत की निगरानी में जांच कराने की मांग की गई है. सुप्रीम कोर्ट की आधिकारिक वेबसाइट पर पब्लिश कॉज-लिस्ट के अनुसार, सीजेआई जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच 13 जुलाई को इन याचिकाओं पर सुनवाई करेगी.

13 जुलाई को होगी राम मंदिर दान चोरी मामले की सुनवाई

इन मामलों में वकील नरेंद्र कुमार गोस्वामी की ओर से खुद दायर की गई एक रिट याचिका, अजय कुमार राय और अन्य की ओर से श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट और अन्य के खिलाफ दायर एक क्रिमिनल रिट याचिका और राजद सांसद सुधाकर सिंह की एक याचिका शामिल है.

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इससे पहले, जब जस्टिस एम.एम. सुंदरेश और जस्टिस शील नागू की बेंच के सामने गोस्वामी की याचिका का जिक्र किया गया था, तो सुप्रीम कोर्ट ने उस पर तुरंत सुनवाई करने से इनकार कर दिया था. याचिकाकर्ता ने मामले को तुरंत लिस्ट करने पर जोर दिया था और कहा था कि लगाए गए आरोप 'बहुत गंभीर' हैं.

मामले की अर्जेंसी पर सवाल उठाते हुए जस्टिस सुंदरेश की अगुवाई वाली बेंच ने निर्देश दिया था कि गर्मी की छुट्टियों के बाद कोर्ट खुलने पर इस मामले को लिस्ट किया जाए. गोस्वामी की याचिका में राम जन्मभूमि मंदिर में दिए गए दान से जुड़े रिकॉर्ड और सबूतों को सुरक्षित रखने और मंदिर में चढ़ावे के मैनेजमेंट में ज्यादा पारदर्शिता लाने के लिए निर्देश देने की मांग की गई है.

याचिका के अनुसार, मंदिर में देवता को चढ़ाया गया चढ़ावा 'पवित्र ट्रस्ट की संपत्ति' होती है जो एक कानूनी व्यक्ति (ज्यूरिस्टिक पर्सन) के तौर पर देवता के पास होती है और ऐसे चढ़ावे को संभालने वाले लोग पारदर्शिता, जवाबदेही और संरक्षण के कर्तव्यों से बंधे ट्रस्टी होते हैं.

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क्या कहा गया है याचिका में?

याचिका में मंदिर में दान और चढ़ावे से जुड़े सभी रिकॉर्ड, सीसीटीवी फुटेज और डिजिटल लॉग को तुरंत सुरक्षित रखने की मांग की गई है. इसके अलावा, स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (एसआईटी) की चल रही जांच की सीलबंद स्टेटस रिपोर्ट और ट्रस्ट के बनने के बाद से मिले सभी दान, चढ़ावे और कीमती चीजों के स्वतंत्र फॉरेंसिक ऑडिट की भी मांग की गई है.

इसमें सुप्रीम कोर्ट से यह भी आग्रह किया गया है कि वह राष्ट्रीय महत्व के मंदिरों में सार्वजनिक दान और चढ़ावे को पारदर्शी तरीके से संभालने के लिए कम से कम संवैधानिक सुरक्षा उपाय बनाने का निर्देश दे. हाल की घटनाओं का जिक्र करते हुए याचिका में कहा गया है कि यह मामला तब शुरू हुआ जब सार्वजनिक रिपोर्टों और उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित तीन सदस्यीय एसआईटी से मंदिर में दान में अनियमितताओं, गबन और गलत तरीके से मैनेजमेंट का पता चला.

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इस बीच, सांसद सुधाकर सिंह ने चल रही जांच को सुप्रीम कोर्ट की सीधी निगरानी में सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (सीबीआई) को सौंपने की मांग की है. उनकी याचिका में एक अस्थायी, कोर्ट की निगरानी वाली ओवरसाइट कमेटी बनाने की भी मांग की गई है.

इस कमेटी में रिटायर्ड ज्यूडिशियल अधिकारी और फाइनेंशियल एक्सपर्ट शामिल होंगे. यह कमेटी ट्रस्ट के सेक्युलर फाइनेंशियल मामलों, सभी फाइनेंशियल रिकॉर्ड्स को सुरक्षित रखने, जांच पूरी होने तक बड़े फाइनेंशियल फैसलों पर रोक लगाने, एक व्यापक फॉरेंसिक ऑडिट करने और ट्रस्ट की ऑफिशियल वेबसाइट पर ऑडिट किए गए फाइनेंशियल स्टेटमेंट और डोनेशन लॉग्स को पब्लिश करने जैसे कामों की निगरानी करेगी.

राम मंदिर दान चोरी की जांच में अब क्या होगा, क्या पता चला?

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मालूम हो कि राम मंदिर दान चोरी मामले में अब तक 8 गिरफ्तारियां हुई हैं. इसके अलाव उन लोगों से भी पूछताछ की जा रही है जो नियमित रूप से आरोपियों के संपर्क में थे या उनके कुछ तार जुड़े हैं. इसके अलावा 20 के जिला छोड़ने पर रोक, 50 अन्य को नोटिस जारी कर पूछताछ के लिए बुलाया जा रहा है. अब तक पुलिस की जांच निम्न तरीको पर रही और आगे रहेगी.

साक्ष्यों का क्रॉस-वेरिफिकेशन: पुलिस आरोपियों के करीबियों से मिली जानकारी का मिलान पूछताछ में निकले तथ्यों, कॉल डिटेल्स, वित्तीय लेन-देन और अन्य सबूतों से कर रही है.

पूछताछ के लिए बुलावा: पुलिस की अलग-अलग टीमें एक विशेष सूची में शामिल लोगों को फोन या अन्य माध्यमों से सूचना देकर पूछताछ के लिए बुला रही हैं.

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किन सवालों पर फोकस?: इन लोगों से आरोपियों के साथ उनके संबंधों, लेन-देन, मुलाकातों और बाद की गतिविधियों की विस्तृत जानकारी मांगी जा रही है.

संपर्क में रहने के निर्देश: पूछताछ में शामिल अधिकांश लोगों को जांच पूरी होने तक पुलिस के संपर्क में रहने की सख्त हिदायत दी गई है.

चोरी की गई रकम का नहीं मिल पा रहा हिसाब!

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कुल चोरी हुई रकम स्पष्ट नहीं: राम मंदिर में चढ़ावे की कितनी रकम चोरी हुई, इसकी सटीक जानकारी देना या हिसाब लगाना फिलहाल मुश्किल है.

बैंक रिकॉर्ड सुरक्षित: जो रकम गिनती के बाद बैंक तक पहुंच गई है, उसका पूरा और सटीक हिसाब मौजूद है. इससे साफ है कि चोरी गिनती के दौरान या उससे पहले (कैश हैंडलिंग के वक्त) की गई है.

CCTV फुटेज में चोरी: सीसीटीवी फुटेज में गणना करने वाले कर्मचारी नोट और गड्डियां छिपाते हुए जरूर दिखे हैं, लेकिन इससे चोरी गई सटीक रकम का पता नहीं चलता है.

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चोरी का समय और दायरा अज्ञात: यह साफ तौर पर नहीं कहा जा सकता कि यह चोरी कब से चल रही थी और अब तक कुल कितनी रकम चुराई गई है.

रिकवरी से ही आकलन: अब तक जो नकद रकम बरामद हुई है, या आरोपियों के पास से जो वाहन, इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स, संपत्ति के कागजात और आभूषण मिले हैं, उसी के आधार पर चोरी का आकलन किया जा रहा है. माना जा रहा है कि यह सब चढ़ावे की रकम से ही जुटाया गया है.

अधिकारी का बयान: जांच से जुड़े एक अधिकारी के मुताबिक, जितनी रकम या संपत्ति बरामद हो रही है, फिलहाल उसे ही चोरी का हिस्सा माना जा सकता है. मुकम्मल तौर पर चोरी का सटीक आंकड़ा देना अभी संभव नहीं है.

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जांच जारी: फिलहाल इस मामले में SIT (एसआईटी) की जांच और पुलिस द्वारा आरोपियों से पूछताछ लगातार जारी है.

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