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सऊदी की ओर ईरान को धमकी देकर अपनी बर्बादी को न्योता दे रहा पाकिस्तान, अगर यमन में उतरी PAK फौज, बुरा होगा हश्र!
सऊदी अरब के लिए पाकिस्तान ने ईरान से पंगा ले लिया है. हूतियों के हमले को लेकर तेहरान को उसने धमकी दी है. मक्का समझौते के तहत अगर PAK फौज यमन में उतरती है तो उसकी बर्बादी तय है. उसके लिए ये किसी खतरनाक सपने से कम नहीं होगा, जानें कैसे.
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यमन में हूती विद्रोहियों और सऊदी अरब के बीच की लड़ाई अब अलग शक्ल लेती जा रही है. बीते कई दिनों से दोनों ओर से बमबारी जारी है. पहले हूतियों की ओर से सऊदी ठिकानों पर हमले किए गए, जिसके जवाब में सऊदी गठबंधन सेना के विमानों ने भी हूती कंट्रोल्ड राजधानी सना और उत्तर-पश्चिम इलाकों में हवाई हमले किए. इसके बाद हूती मीडिया चैनल अल मीसरा ने कहा कि इसका उत्तर दिया जाएगा और बिन सबक सिखाए जाने नहीं देंगे.
हूती विद्रोहियों और सऊदी के बीच बढ़ी जंग!
इसी बीच पाकिस्तान ने एक बार फिर पोस्टमैन की तरह सऊदी अरब की चेतावनी ईरान तक पहुंचा दी है. ये वॉर्निंग यमन में ईरान के प्रॉक्सी यानी कि सहयोगी माने जाने वाले हूती विद्रोहियों को काबू में रखने के लिए दी गई है. हूतियों ने सऊदी अरब पर हमले तेज कर दिए हैं.
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आपको बता दें कि मंगलवार को हूती विद्रोहियों ने खमीस मुशैत में एक एयरबेस और आस-पास के शहरों में तेल से जुड़ी सुविधाओं पर हमला किया. ये हमले फरवरी में ईरान के खिलाफ अमेरिका-इजरायल के सैन्य टकराव की शुरुआत के बाद से सऊदी अरब पर हुए सबसे बड़े हमलों में से एक है, जिसमें करीब 73 लोग घायल बताए जा रहे हैं.
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हूती मिलिट्री के प्रवक्ता याह्या सरी ने बुधवार को कहा कि सऊदी लड़ाकू विमानों ने पिछले 12 घंटों में यमन के कई इलाकों में 54 हवाई हमले किए. उन्होंने कहा कि इन हमलों का जवाब दिया जाएगा और इसके लिए सज़ा भी दी जाएगी.
यह बढ़ता हुआ टकराव, जो ग्लोबल एनर्जी सप्लाई के लिए खतरा पैदा करने वाला युद्ध का दूसरा मोर्चा है, ऐसे समय में हो रहा है जब ईरान और अमेरिका के बीच खाड़ी इलाके में जहाजों पर एक-दूसरे के खिलाफ अब तक के सबसे बड़े हमले हो रहे हैं.
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पाकिस्तान ने ईरान को क्या धमकी दी?
मालूम हो कि पाकिस्तान की ईरान को दी गई चेतावनी इसलिए भी अहम है क्योंकि सऊदी अरब और तुर्की के साथ उसके भी त्रिपक्षीय रक्षा समझौते हैं. इस्लामाबाद ने इस बात पर ज़ोर दिया कि उसकी कोई भी सैन्य भूमिका सिर्फ सऊदी इलाके की सुरक्षा तक ही सीमित रहेगी. हालांकि पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने धमकी दी कि अगर हमले सऊदी अरब की सीमा में होते हैं, तो रियाद, अंकारा और इस्लामाबाद के बीच एक संयुक्त सुरक्षा एग्रीमेंट, जिसे मक्का समझौता के नाम से भी जाना जाता है, वो लागू हो सकती है.
जहां तक पाकिस्तान की ओर ईरान को दी गई वॉर्निंग या मैसेज का सवाल है तो ईरान ने उसके जवाब में कहा है कि वो हूती विद्रोहियों को कंट्रोल नहीं करता है, ना ही समर्थन करता है. हालांकि पूरी दुनिया जानती है कि ईरान का यमन में हूती प्रॉक्सी है, वो उसके हथियार, इंटेलिजेंस, पैसे से लेकर सैन्य ट्रेनिंग आदि मामले में सपोर्ट करता है और अपने लिए इस्तेमाल करता है.
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2015 में पाकिस्तान ने यमन में क्या किया था?
इससे पहले जब 2014 में यमन की राजधानी सना में विद्रोहियों का कब्जा हुआ था तो 2015 में सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन ने पाकिस्तान पर काफी दबाव डाला था कि वो भी अपनी सेना भेजे, लेकिन तत्कालीन पाकिस्तानी सरकार और पीएम नवाज शरीफ ने बड़ा फैसला करते हुए इसे संसद के हवाले कर दिया. और कहा कि इतना बड़ा फैसला वो अकेले नहीं कर सकते, संसद जो कहेगी, वो किया जाएगा. ऐसे में पाकिस्तान की कौमी असेंबली ने अपनी फौज भेजने से मना कर दिया था.
पाकिस्तान ने सऊदी के समर्थन में क्यों नहीं भेजी थी सेना?
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इस पर सऊदी हुकूमत कई सालों तक नाराज रही थी. ऐसे में अगर फिर से वही स्थिति आती है तो पाकिस्तान के लिए सऊदी की ओर मदद के लिए आगे आना होगा, लेकिन विशेषज्ञ मानते हैं कि पाकिस्तान की सपोर्ट बैकएंड जैसे कि ट्रेनिंग, ऑपरेशन, लॉजिस्टिक्स सपोर्ट तक रहेगी. अगर वो सेना उतारते हैं तो इसका मतलब है वो सीधे ईरान से जंग या सैन्य टकराव मोल ले रहे हैं, जिसकी कीमत वो अपनी जमीन पर अदा करेंगे.
ऐसे में देखें तो पाकिस्तान की धमकी में दम हो ना हो, लेकिन एक बात तो तय है कि अगर इस्लामाबाद हूतियों के खिलाफ, सऊदी की ओर से यमन में सैन्य कार्रवाई में सीधे शामिल होता है तो ये उसके लिए किसी बुरे सपने से कम नहीं होगा. उसने अफगानिस्तान और कश्मीर में ऐसा करके देख लिया है. यहां हूती पर एक्शन मतलब ईरान पर हमला माना जाएगा.
आपको बता दें कि ऐसा नहीं है कि हूती पर पाकिस्तान हमला करेगा और कुछ नहीं होगा. यमन सहित पूरे खाड़ी में ईरान के इंटेरेस्ट उसकी प्रॉक्सी के हवाले से संचालित होते हैं. ईरान खाड़ी और मध्य पूर्व में अपने रणनीतिक हितों को साधने के लिए हूती, हिजबुल्लाह और इराकी मिलिशिया जैसे प्रॉक्सी समूहों का उपयोग करता है. ऐसे में अगर हूती पर हमला होता है तो ईरान उसका बदला जरूर लेगा.
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ईरान के खाड़ी में प्रॉक्सी कौन-कौन हैं?
- यमन में हूती विद्रोही, लेबनान में हिजबुल्लाह और इराक-सीरिया में शिया मिलिशिया.
- ये समूह अमेरिका, इजरायल और सऊदी अरब जैसे प्रतिद्वंद्वियों के मिलिट्री और इकोनॉमिक इंटेरेस्ट को टार्गेट करते हैं, जैसे ईरान चाहता है.
- ईरान अब तक देखें तो सीधे युद्ध से बचता रहा है. ये सभी प्रॉक्सी ईरान को "फॉरवर्ड डिफेंस" (सीमा से दूर रक्षा) और क्षेत्रीय दबदबा बनाए रखने में मदद करते हैं.
अगर पाकिस्तान हूती विद्रोहियों पर हमला करता है तो ईरान क्या करेगा?
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- मक्का समझौते के बाद यदि पाकिस्तान सऊदी अरब की ओर से में हूतियों पर हवाई हमले करता है, तो यह कूटनीतिक रूप से एक बड़ा, लेकिन आत्मघाती कदम साबित हो सकता है.
- इससे तेहरान और इस्लामाबाद के संबंध बेहद तनावपूर्ण हो सकते हैं. वैसे तो ईरान हूती हमलों पर सीधे नियंत्रण से इंकार करता है, लेकिन वो उसकी ही एक मजबूत हाथ है.
- ईरान से पंगा लेने का मतलब है कि पाकिस्तान में गंभीर आंतरिक और सांप्रदायिक (शिया-सुन्नी) असंतोष पैदा हो सकता है.
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ईरान पाकिस्तान को कैसे-कैसे हिला सकता है?
1. पाकिस्तान की सीमा पर तनाव बढ़ेगा
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बलूच विद्रोहियों का समर्थन: ईरान और पाकिस्तान के बीच 900 किमी लंबी सीमा है. ईरान पाकिस्तान के खिलाफ बलूच अलगाववादी समूहों (जैसे जैश अल-अदल या अन्य मिलिशिया) को खुफिया और सैन्य सहायता बढ़ाकर पाकिस्तान के भीतर अशांति पैदा कर सकता है.
सीमावर्ती इलाकों में स्ट्राइक- ईरान पाकिस्तान की सीमा के भीतर 'सर्जिकल स्ट्राइक' या ड्रोन हमलों के जरिए दबाव बना सकता है. इससे उसके लिए लड़ाई का एक और फ्रंट (अफगानिस्तान, भारत और ईरान) खुल जाएगा.
2. पाकिस्तान में सांप्रदायिक अशांति
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आंतरिक विद्रोह: पाकिस्तान में एक बड़ी शिया आबादी रहती है. ईरान अपने धार्मिक और सांस्कृतिक प्रभाव का इस्तेमाल कर पाकिस्तान के भीतर शिया-सुन्नी असंतोष या हिंसक प्रदर्शन भड़का सकता है.
जैनबियून ब्रिगेड का उपयोग: सीरिया और मध्य पूर्व में लड़ चुके पाकिस्तानी शिया लड़ाकों (जैनबियून ब्रिगेड) को पाकिस्तान वापस भेजकर देश के भीतर ही सुरक्षा चुनौतियां खड़ी की जा सकती हैं.
3. आर्थिक और कूटनीतिक दबाव
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गैस पाइपलाइन और व्यापार: ईरान-पाकिस्तान गैस पाइपलाइन परियोजना पूरी तरह ठप हो जाएगी और ईरान पाकिस्तान के साथ अपनी सीमाओं को सील कर द्विपक्षीय व्यापार को रोक सकता है. पाकिस्तान में तेल सप्लाई का बड़ा हिस्सा ईरान से ब्लैक में आने वाली तेल है, जिससे तेल की कीमत और स्टॉक बैलेंस में रहता है.
भारत के साथ नजदीकी: ईरान कूटनीतिक रूप से भारत के साथ अपने संबंधों (जैसे चाबहार पोर्ट परियोजना) को और मजबूत कर सकता है, जो पाकिस्तान के ग्वादर पोर्ट के प्रतिवाद के रूप में काम करेगा.
4. प्रॉक्सी युद्ध का विस्तार
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ईरान सीधे पाकिस्तान से न भिड़कर, मध्य पूर्व में तैनात पाकिस्तानी प्रवासियों, तेल रिफाइनरियों में काम करने वाले पाकिस्तानी नागरिकों या समुद्री व्यापारिक जहाजों को अपने अन्य प्रॉक्सी (जैसे इराकी मिलिशिया) के जरिए निशाना बना सकता है.