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'1857 जैसी होगी 'क्रांति'!' मीडिया के सामने आए रिजर्वेशन हटाओ आंदोलन के सूत्रधार वेदांश त्यागी, बता दिया RHA का मास्टरप्लान
वैसी ही क्रांति होगी जैसी 169 साल पहले मेरे शहर में हुई थी...रिजर्वेशन हटाओ आंदोलन के सूत्रधार वेदांश त्यागी पहली बार मीडिया के सामने आए. उन्होंने इस दौरान अपनी मांग को लेकर बड़ा खुलासा किया और RHA के अगले प्लान और एजेंडे का भी खुलासा कर दिया.
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दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए CJP के आंदोलन के बाद देश में एक और आंदोलन ज़ोर पकड़ रहा है. पेपर लीक के कारण शिक्षा मंत्रालय और शिक्षा व्यवस्था को लेकर शुरू हुई बहस ने एक और मुद्दे की चिंगारी फूंक दी है. और ये कोई और मुद्दा नहीं है बल्कि देश का सबसे संवेदनशील मुद्दा है, जिसे कोई पार्टी छूना नहीं चाहती, जिसपर बहस करने से भी बचा जाता. जिसके बारे में बात भी गुनाह सा हो गया है.
पहली बार मीडिया के सामने आए RHA के सूत्रधार वेदांश त्यागी
ऐसे में सियासी दलों की सुनियोजित खामोशी के बीच रिजर्वेशन हटाओ आंदोलन मोमेंटम पकड़ता जा रहा है. देखते ही देखते जिसके 60 लाख से ज्यादा फॉलोअर्स हो गए. आरक्षण व्यवस्था में सुधार की चर्चा मात्र को गुनाह माने जाने वाले देश में इस आंदोलन को जेन-जी का भी बंपर समर्थन मिल रहा है. ऐसे में आरक्षण हटाओ आंदोलन का बिगुल फूंकने के पीछे कौन लोग हैं, उसके बारे में हर कोई जानना चाहता है. आख़िर कौन है जिसने आरक्षण पर बात करने की हिमाक़त की और इसे हटाने की वकालत की.
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169 साल पहले हुई क्रांति होगी-वेदांश
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देश में आरक्षण व्यवस्था में सुधार को लेकर चल रही बहस के बीच आरक्षण हटाओ आंदोलन यानी कि RHA के सूत्रधार वेंदाश त्यागी पहली बार कैमरे के सामने आए और तमाम मुद्दों पर खुलकर बात की. वेदांश ने अमर उजाला के ख़ास कार्यक्रम अनम्यूट भारत से बात करते हुए दो टूक कहा कि जातिवाद के ख़िलाफ़ वैसी ही क्रांति की शुरुआत होने वाली है, जैसी कि 169 साल पहले 1857 की क्रांति उनके ही शहर (मेरठ) से हुई थी. वेदांश मेरठ के ही रहने वाले हैं. बक़ौल अमर उजाला वेंदाश को सबसे पहले कैमरे पर उन्हीं ने लाया है.
कैसे हुई रिजर्वेशन हटाओ आंदोलन-RHA की शुरुआत
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RHA यानी कि रिजर्वेशन हटाओ आंदोलन शुरू करने के बारे में वेंदाश ने दावा किया कि उन्होंने सबसे पहले इसे इंस्टाग्राम पर अकेले वीडियो पोस्ट करना शुरू किया था, जिसमें उन्हें दोनों तरह के, पक्ष-विपक्ष के समर्थक मिले. इसके बाद ही उन्होंने RHA की शुरुआत की, जिसके लिए उन्हें टीम के आभाव में AI ने सबसे ज्यादा साथ दिया.
योग्यता आधारित व्यवस्था की वकालत
वेदांश ने इस दौरान कहा कि देश में मेरिट आधारित सिस्टम को लागू करने की वकालत की. इस दौरान उन्होंने कहा कि उनका अंतिम लक्ष्य आरक्षण को समाप्त करना है. उन्होंने अपनी जाति भी बताई और कहा कि वो ब्राह्मण समाज से आते हैं, वो इसलिए बता रहे हैं ताकि लोग उन्हें पक्षपाती ना कहें.
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वेंदाश त्यागी ने सीजेपी के ‘टूलकिट’ की भी खोली पोल
हालांकि उन्होंने इस दौरान कॉकरोच जनता पार्टी पर भी सवाल उठाए और कहा कि सीजेपी युवाओं का प्रतिनिधित्व नहीं करती है, इसलिए उसे युवा शक्ति नहीं कहा जाए. उन्होंने सीजेपी के बारे में दावा किया कि इसके सोशल मीडिया अकाउंट्स फर्जी हैं, बॉट्स और पाक बेस्ड हैंडल्स हैं. इतना ही नहीं खाते अमेरिका आधारित भी हैं. हालांकि वेदांश ने इस संबंध में कोई ठोस सबूत नहीं दिया. इतना ही नहीं उन्होंने ध्रुव राठी को भी देश तोड़ने वाले टूलकिट का हिस्सा करार दिया. उन्होंने इस दौरान ये भी कहा कि शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की टाइमिंग ग़लत थी, ये विदेशी दबाव में लिया गया फैसला लगता है. हालांकि इसके पीछे की भी उन्होंने कोई तथ्यात्मक वजह नहीं बताई.
किस पार्टी का समर्थक है RHA?
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हांलांकि वेदांश ने ये कहा कि बीजेपी-कांग्रेस, सपा-बसपा सहित कई दलों ने उन्हें अपनी पार्टी में जुड़ने का ऑफ़र दिया, उनसे संपर्क किया, लेकिन वो किसी भी दल के साथ नहीं जुड़े हैं. हांलांकि उन्होंने इस दौरान कहा कि वो बीजेपी के वोटर रहे हैं ना कि समर्थक. इस दौरान उन्होंने माँग की कि चुकि बाकी दलों का आधार ही जाति पर टिका है तो उनसे कोई उम्मीद नहीं की जा सकती. उन्होंने आगे कहा आरक्षण व्यवस्था में सुधार बीजेपी ही कर सकती है.
RHA के सूत्रधार ने बता दिया मास्टर प्लान!
अमर उजाला से बात में उन्होंने युवाओं से अपील की कि 15 अगस्त तक सड़क पर किसी प्रकार के प्रदर्शन से बचें. वेदांश ने इस दौरान दावा किया कि विदेशी ताकतें काफी सक्रिय हैं, जो कि शांतिपूर्ण आंदोलन का हिस्सा बनकर इसे हिंसा में बदल सकती हैं. वेदांश ने आगे कहा कि उनके आंदोलन का मकसद टकराव की राजनीति का नहीं है बल्कि सोशल मीडिया और सार्वजनिक विमर्श के ज़रिए अपनी बात को आगे बढ़ाना है.
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किसे आरक्षण की ज़रूरत है?
उन्होंने इस दौरान सुझाव दिया कि आरक्षण व्यवस्था का लाभ उन्हें मिले जिन्हें इनकी ज़रूरत है, जैसे कि शारीरिक रूप से अक्षम, शहीद सैनिक आदि जैसे वास्तविक ज़रूरतमंद. वेदांश ने आगे कहा कि आर्थिक स्थिति, पारिवारिक जिम्मेदारियों और जाति आधारित एक स्कोर प्रणाली बनाने पर बल दिया.
उनके अनुसार आरक्षण लॉटरी नहीं बल्कि बीमा की तरह होना चाहिए. उन्होंने आगे कहा कि 70 से ज्यादा सालों से जातिगत तनाव बरकरार है, जिस पर नए सिरे से बहस की आवश्यता है.
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क्या है RHA?
आपको बताएं कि रिजर्वेशन हटाओ आंदोलन- आरक्षण व्यवस्था में सुधार और उससे जुड़ी मांगों पर बहस से जुड़ा. इसको लेकर सोशल मीडिया पर भी हैंडल बन चुके हैं, वेबसाइट भी बना ली गई है. इस मांग को विभिन्न प्लेटफॉर्म्स पर व्यापक समर्थन भी मिल रहा है. हैंडल बनते ही रिजर्वेशन हटाओ आंदोलन के करीब 6 मिलियन फॉलोअर्स भी हो चुके हैं.
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आरक्षण हटाओ आंदोलन को धार देने और क्रेडिबिलिटी देने के लिए संविधान निर्माण के जनक बाबा साहब अंबेडकर के ही बयानों और किताबों से स्लोगन लिया गया है. आरक्षण हटाओ आंदोलन वालों ने अपना स्लोगन बाबा साहब की प्रेरणा से लिया है ‘एजुकेट, एजिटेट, ऑर्गेनाइज.’ आंदोलन से जुड़े लोगों ने इसे पूरी तरह जनता का आंदोलन करार दिया है और राजनीतिक लिंक, जुड़ाव से इनकार किया है.