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भारत के मुस्लिमों ने भर-भरकर दिया दान, कार्गो विमान में भरकर नहीं ले जा पाएगा ईरान, RBI के नियम ने लगाया अड़ंगा
अमेरिकी-इजरायली हमलों के बाद ईरान के लिए भारत के मुसलमानों ने थोक में चंदा इकट्ठा किए. गहने-जेवर दिए, घर गिरवी रख दी, लेकिन ईरान इन्हें कार्गो विमान में भरकर सीधे-सीधे नहीं ले जा पाएगा. इस में RBI के नियम से अड़ंगा लग गया है. जानें अब क्या होगा.
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मिडिल ईस्ट में संघर्ष के दौरान भारत ने सरकार और नागरिक लेवल पर भी ईरानी अवाम की बड़े पैमाने पर मदद की. इतना ही नहीं जम्मू कश्मीर के बच्चों ने गुल्लक तोड़कर ईरान में मदद भेजी, तो महिलाओं ने अपने कीमती गहने बेच दिए. कश्मीरियों की इस दरियादिली पर ईरान ने दिल खोलकर तारीफ की. बकायदा पोस्ट कर ‘इसे प्यार भरा तोहफा बताया.’
ईरानी सुप्रीम लीडर के प्रतिनिधि ने की भारतीयों की तारीफ!
इसी कारण तो ईरान के सर्वोच्च नेता के प्रतिनिधि डॉ. अब्दुल मजीद हकीम इलाही ने भारतीयों की तारीफ करते हुए कहा कि भारत की विदेश नीति बहुत अच्छी है, भारतीय लोगों की जितनी तारीफ की जाए उतनी कम है. इलाही ने अमेरिका-ईरान विवाद में भारत की भूमिका के बारे में पूछे जाने पर, भारत में ईरान के सर्वोच्च नेता के प्रतिनिधि डॉ. अब्दुल मजीद हकीम इलाही कहते हैं, "शायद तीन बार या उससे ज़्यादा, PM मोदी ने हमारे राष्ट्रपति के साथ सफल बातचीत की. यह बहुत अच्छी रही. कई बार, भारत के विदेश मंत्री ने ईरान के विदेश मंत्री के साथ बहुत सफल बातचीत की. भारत में हमारे भाई-बहन, मैं उनके बारे में बता नहीं सकता. जब भी मुझे उनकी याद आती है, मेरी आंखों में आंसू आ जाते हैं. वे बेहतरीन हैं. इन अच्छे लोगों की अहमियत बताने के लिए मेरे पास शब्द नहीं हैं... मैं भारत में अपने सभी भाई-बहनों को ऐसे प्यारे लोग होने के लिए बधाई देना चाहूँगा. वे असाधारण लोग हैं...".
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इसी बीच एक और खबर सामने आ रही है कि भारत में ईरान के लिए जो गहने-जेवर, पैसे, इत्यादि इकट्ठा किए गए थे उसे कानूनी तौर पर ईरान ले जाना मुश्किल होगा. कहा जा रहा है कि RBI के गाइडलाइंस ने साफ कर दिया कि ये पैसा ईरान जा ही नहीं सकता है.
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ईरान नहीं जा पाएगा दान में इकट्ठा किया गया पैसा!
खबर के मुताबिक ईरान युद्ध संकट के बीच भारत में अपने दूतावास के माध्यम से जुटाए गए दान की राशि को सीधे अपने देश स्थानांतरित नहीं कर पाएगा. यानी कि ईरान इन गहने-जेवर, बर्तन को विमान-कार्गो में भरकर नहीं ले जा पाएगा. इसलिए ईरान ने इस धन का उपयोग भारत में ही दवाएं खरीदने के लिए करने का निर्णय लिया है.
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क्या कहता है दान को लेकर बैंकिंग प्रोटोकॉल!
राजनयिक नियमों और बैंकिंग प्रोटोकॉल के कारण नकद राशि या सोने-चांदी जैसी वस्तुओं को 'डिप्लोमैटिक पाउच' के जरिए भेजना संभव नहीं है, जिसके चलते कश्मीर समेत भारत के विभिन्न हिस्सों से मिले आभूषणों को स्थानीय बैंकों में जमा कर उनको कैश में तब्दील किया जाएगा. वियना कन्वेंशन के तहत दूतावासों को बैंकिंग अधिकार तो प्राप्त हैं, लेकिन दान स्वीकार करने के लिए उन्हें विदेश मंत्रालय की अनुमति से एक अलग खाता खोलना अनिवार्य होता है, जिसे देखते हुए ईरान ने भारतीय स्टेट बैंक (SBI) में एक विशिष्ट खाता संचालित किया है. सूत्र बताते हैं कि अगर इन्हें कैश किया जाता है तो इस पर भी टैक्स बैंकिंग नियम के अनुसार काटा जाएगा. इसके बाद पैसे से जो दवाईयां या अन्य सामान खरीदा जाएगा, वो भी भारतीय कंपनियों से, भारत की कीमत पर, टैक्स कट के बाद ही खरीदा जा सकेगा. यानी कि दोनों तरीकों से भारत सरकार का फायदा.
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इस अभियान के दौरान ईरान को कश्मीरी महिलाओं द्वारा सोना दान करने वाले सोशल मीडिया पोस्ट के कारण आलोचनाओं का भी सामना करना पड़ा, जिन्हें सांप्रदायिक रंग देने के आरोपों के बाद हटा दिया गया. इस बीच, दवाओं के परिवहन की योजना में तब बाधा आई जब ईरान का एक विमान अमेरिकी हवाई हमलों में क्षतिग्रस्त हो गया, जिसके बाद अब आने वाले दिनों में नई दिल्ली से दवाओं को एयरलिफ्ट करने के लिए दूसरी उड़ान की तैयारी की जा रही है.
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भारत ने भेजी दवाईयों की खेप!
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भारत ने पहले ही अपनी ओर से दवाओं की एक खेप ईरान भेज दी है, जिसे कुछ दिनों पहले ईरानी रेड क्रिसेंट सोसायटी के हवाले किया गया था. अब दान की इस राशि का उपयोग आरबीआई की कड़ी निगरानी में स्थानीय स्तर पर मेडिकल सप्लाई सुनिश्चित करने के लिए किया जाएगा. आपको बताते चलें कि ईरान ने युद्ध शुरू होने के बाद हवाई हमलों में मची तबाही से उबरने के लिए डोनेशन की भी कथित तौर पर अपील की थी.