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कौन है 'बलूचिस्तान की शेरनी' महरंग बलोच, नाम से ही कांप उठती है पाक सरकार, उम्रकैद की सजा होते ही सुलग उठा पूरा मुल्क

पाकिस्तानी हूकुमत को विद्रोह की आवाज बर्दाश्त नहीं हुई. बलूचिस्तान की शेरनी कही जाने वाली महरंग बलोच को पाक सरकार ने आतंकी मानते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई है. महरंग बलूचिस्तान में मानवाधिकार की बुलंद आवाज हैं.

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23 Jun 2026
( Updated: 23 Jun 2026
07:13 PM )
कौन है 'बलूचिस्तान की शेरनी' महरंग बलोच, नाम से ही कांप उठती है पाक सरकार, उम्रकैद की सजा होते ही सुलग उठा पूरा मुल्क
Image Source- X/@MahrangBaloch_
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Mahrang Baloch: जिस देश को आतंकियों का गढ़ माना जाता है. जिस देश को आतंकियों का पालनहार माना जाता है. जिस देश की खुफिया एजेंसी दूसरे मुल्कों में आतंकी तैयार करती हो, हैरत की बात है उस देश में एक महिला को आतंकी मानते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई गई है. बात पाकिस्तान की हो रही है, जहां महिला बलूच कार्यकर्ता को आंतकी मानते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई गई है. जिस पर कई सवाल खड़े हो रहे हैं दुनिया भर के मानवाधिकार संगठन पाकिस्तान की आलोचना कर रहे हैं. 

जानी-मानी बलूच कार्यकर्ता महरंग बलोच को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई है. ये सजा रावपिंडी की आतंकवाद रोधी अदालत ने सुनाई है, लेकिन इस फैसले को मानवाधिकार संगठनों ने 'अन्याय' और 'न्यायिक आतंकवाद' का नाम दिया है. महरंग के साथ तीन और कार्यकर्ताओं को भी उम्रकैद की सजा सुनाई है. ये वो ही लोग हैं जो बलूचिस्तान में सरकार के खिलाफ विरोध कर रहे थे. अपने हक के लिए आवाज उठा रहे थे सवाल पूछ रहे थे. कोर्ट ने इन्हें ही आतंकी मानते हुए सख्त सजा सुना दी. 

महरंग बलोच की सजा पर बवाल 

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इन चार कार्यकर्ताओं को फ्रंटियर कॉर्प्स के एक अधिकारी की हत्या से जुड़े मामले में आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई है, लेकिन महंरग ने न आतंकियों की तरह बम फेंके न किसी हमले को अंजाम दिया. 

फैसले की निंदा करते हुए बलोच नेशनल मूवमेंट (बीएनएम) ने पाकिस्तान को ‘आतंकवादी देश’ बताया. आरोप लगाया कि बलूचिस्तान में भय और दहशत फैलाने के लिए इस्लामाबाद अपनी सत्ता और संस्थाओं का गलत इस्तेमाल कर रहा है. 

BNS ने एक्स पर लिखा, ‘हम इस फैसले को अस्वीकार करते हैं. पाकिस्तान का यह न्यायिक आतंकवाद बलोच राष्ट्रीय आंदोलन को नहीं रोक सकता और न ही प्रतिरोध की राजनीति का मार्ग अवरुद्ध कर सकता है.’

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वहीं, ह्यूमन राइट्स काउंसिल ऑफ बलूचिस्तान (एचआरसीबी) ने इस फैसले को ‘न्याय का हनन’ बताया. HRCB का कहना है कि इस कार्रवाई का मकसद शांतिपूर्ण मानवाधिकार की आवाज उठाने वालों को चुप करवाना है. 

HRCB ने कहा, ‘ऐसे कदम असहमति के दमन और बलूचिस्तान में मौलिक स्वतंत्रताओं के लगातार सिकुड़ते दायरे को दर्शाते हैं. ह्यूमन राइट्स कमीशन ऑफ पाकिस्तान ने भी महरंग बलोच और अन्य कार्यकर्ताओं को दोषी ठहराए जाने की आलोचना करते हुए फैसले की शीघ्र समीक्षा की मांग की. 

एचआरसीपी ने कहा, ‘दुर्भाग्यपूर्ण रूप से, राज्य ने मौलिक अधिकारों की वकालत को भी उसी नजरिए से देखना जारी रखा है, जिससे वह उग्रवाद का सामना करता है. इसके परिणामस्वरूप कार्यपालिका और न्यायपालिका के ऐसे फैसले सामने आए हैं जो असंतुलित और पूर्वाग्रहपूर्ण प्रतीत होते हैं. हम आतंकवाद-रोधी अदालत के फैसले की जल्द समीक्षा और बलूचिस्तान में राजनीतिक संवाद शुरू करने की मांग करते हैं.’

बलोच वूमेन फोरम (बीडब्ल्यूएफ) की केंद्रीय संयोजक शाली बलोच ने कहा, अंतर्राष्ट्रीय और राष्ट्रीय कानूनी समुदाय और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं से इस ‘न्यायिक और सरकारी दमन’ के खिलाफ आवाज उठाने की अपील की.

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उन्होंने एक्स पर लिखा, ‘आज बलोच राजनीतिक कार्यकर्ताओं के खिलाफ आए अदालती फैसलों ने एक बार फिर स्पष्ट कर दिया है कि देश की न्यायिक व्यवस्था पारदर्शिता और अहिंसा में विश्वास रखने वाले बलोच राजनीतिक कार्यकर्ताओं के प्रति पक्षपातपूर्ण रवैया अपना रही है. बलूचिस्तान में शांतिपूर्ण और संवैधानिक संघर्ष की आवाजों को दबाने के लिए राज्य संस्थान हर संभव तरीका अपना रहे हैं.’ बलूचिस्तान के लोगों और संगठनों ने दुनियाभर के मानवाधिकार संगठनों से इस मामले में हस्तक्षेप की अपील की है. 

कौन हैं महरंग बलोच, क्यों डरती शहबाज सरकार? 

29 साल की महरंग बलोच (Dr. Mahrang Baloch) पाकिस्तान के बलोचिस्तान प्रांत की एक प्रमुख मानवाधिकार कार्यकर्ता हैं. जो डॉक्टर भी हैं उन्होंने बलोचिस्तान में जबरन गुमशुदगी और मानवाधिकार उल्लंघनों के खिलाफ शांतिपूर्ण आंदोलन चलाने वाली संस्था का नेतृत्व किया है. 

साल 2009 से वे मानवाधिकार से जुड़े मामलों में सक्रिय रही हैं. उनके पिता और भाई की कथित जबरन गुमशुदगी ने उन्हें सक्रिय किया. उन्होंने बलोचिस्तान में सरकार की नीतियों, संसाधनों के शोषण और बलोच लोगों पर अत्याचारों के खिलाफ आवाज उठाई. 

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साल 2024 में उन्हें BBC 100 Women और TIME 100 Next सूची में भी शामिल किया गया था. इतना ही नहीं महरंग को नोबेल शांति पुरस्कार के लिए भी नॉमिनेट किया गया था. उन्हें बलोचिस्तान की शेरनी’ के नाम से जाना जाता है. 

वे बलोचिस्तान में जबरन गायब लोगों के परिवारों की आवाज बनकर उभरी हैं और बड़े पैमाने पर शांतिपूर्ण मार्च भी निकाले. 
महरंग बलोच बलोच अधिकारों और मानवाधिकारों का एक साहसी चेहरा हैं. जिन्हें पाकिस्तानी राज्य की नीतियों का विरोध करने के लिए जेल और सजा का सामना करना पड़ रहा है. 

महरंग बलोच और उनके साथियों पर सरकार की सजा के खिलाफ पाकिस्तान में प्रदर्शन हो रहे हैं. बलूचिस्तान में पूरे प्रांत में शटर डाउन यानी बंद का ऐलान किया गया है. सरकार के खिलाफ लोग सड़कों पर उतरे और प्रदर्शन किया. 

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पाकिस्तान ने भारत को दी ‘मानवाधिकार’ की नसीहत

महरंग बलोच का मामला ऐसे समय में सामने आया है. जब हाल ही में पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने भारत में अल्पसंख्यकों की स्थिति पर चिंता जताई थी. वाराणसी की गंज शहीदा मस्जिद पर डिमोलेशन पर भारत को ज्ञान देने की कोशिश की थी. 

यह भी पढ़ें- ‘अपनी गिरेबां में झांके…’, वाराणसी की गंज शहीदा मस्जिद पर दखलअंदाजी पाक को पड़ी भारी, भारत ने दिया दो टूक जवाब

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भारत ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए इस्लामाबाद को आईना दिखाया था. विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने पाकिस्तान को उसके खराब मानवाधिकार रिकॉर्ड की याद दिलाई थी. भारत ने जरदारी की टिप्पणियों को पूरी तरह निराधार, हास्यास्पद और नफरत से प्रेरित राजनीतिक हमला करार दिया है. जरदारी की भारत पर टिप्पणी के बाद ही पाकिस्तान में एक्टिविस्ट महरंग बलोच को अदालत ने आतंकी मानते हुए उम्र भर जेल की सजा सुनाई है. 

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