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PM मोदी के साथ रहने की सलाह देकर क्या संकेत दे गए धर्मेंद्र प्रधान? BJD को लेकर तेज हुई सियासत
केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के एक बयान ने ओडिशा की राजनीति में हलचल बढ़ा दी है. संबलपुर में आयोजित कार्यक्रम के दौरान उन्होंने नवीन पटनायक से पीएम मोदी के साथ बने रहने की अपील की, जिसके बाद राज्य में नए राजनीतिक समीकरणों को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं.
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ओडिशा की राजनीति इन दिनों एक बार फिर चर्चा के केंद्र में आ गई है. इसकी वजह बने हैं केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान, जिन्होंने बीजू जनता दल (BJD) प्रमुख नवीन पटनायक को लेकर ऐसा बयान दिया, जिसने राज्य की राजनीतिक हलचल को तेज कर दिया है. प्रधान ने सार्वजनिक मंच से अपील करते हुए कहा कि नवीन पटनायक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ बने रहें. उनके इस बयान के बाद अब सवाल उठने लगे हैं कि क्या ओडिशा की राजनीति में फिर कोई नया समीकरण बनने जा रहा है.
महिला आरक्षण के मुद्दे पर दिया बयान
दरअसल, यह पूरा मामला उस समय सामने आया जब धर्मेंद्र प्रधान संबलपुर लोकसभा क्षेत्र में आयोजित एक कार्यक्रम में महिलाओं के आरक्षण के मुद्दे पर बोल रहे थे. इस दौरान उन्होंने बीजद के रुख पर सवाल उठाए. प्रधान ने कहा कि नवीन पटनायक अच्छे इंसान हैं, लेकिन महिला आरक्षण को लेकर उनका रुख बदलता रहता है. उन्होंने मंच से ही बीजद नेता प्रसन्न आचार्य से अपील करते हुए कहा कि वे नवीन बाबू को समझाएं कि उन्हें मोदी के साथ बने रहना चाहिए। प्रधान ने यह भी कहा कि मिलकर महिलाओं के लिए आरक्षण का रास्ता तैयार किया जा सकता है.
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बीजद ने दिया तीखा जवाब
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प्रधान के इस बयान के बाद ओडिशा की राजनीति में नई बहस शुरू हो गई। राजनीतिक जानकार इसे सिर्फ एक सामान्य बयान नहीं मान रहे हैं. उनका कहना है कि यह बयान ऐसे समय में आया है जब बीजद और भाजपा के रिश्तों को लेकर लगातार चर्चाएं हो रही हैं. खासतौर पर तब, जब बीजद के रुख में हाल के दिनों में बदलाव देखने को मिला है. धर्मेंद्र प्रधान के बयान पर बीजद ने भी तुरंत प्रतिक्रिया दी. पार्टी के वरिष्ठ नेता और विधानसभा में विपक्ष के उपनेता प्रसन्न आचार्य ने कहा कि नेता अक्सर अपनी राजनीतिक सुविधा के हिसाब से बयान देते हैं. उन्होंने साफ कहा कि बीजद एक स्वतंत्र क्षेत्रीय पार्टी है और वह भाजपा तथा कांग्रेस दोनों से समान दूरी बनाए रखती है. आचार्य ने कहा कि उनकी पार्टी सिर्फ ओडिशा के हितों के लिए काम करती है और किसी राष्ट्रीय गठबंधन का हिस्सा बनने की जल्दबाजी में नहीं है.
कांग्रेस और INDIA गठबंधन के करीब दिख रही BJD?
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हालांकि, बीजद के हालिया राजनीतिक कदमों ने कई तरह के संकेत दिए हैं. राज्यसभा चुनाव के दौरान बीजद और कांग्रेस का साथ आना सबसे ज्यादा चर्चा में रहा. चौथी सीट के चुनाव में किसी भी दल के पास पूरा बहुमत नहीं था. ऐसे में बीजद और कांग्रेस ने मिलकर डॉक्टर दत्तेश्वर होता का समर्थन किया. हालांकि बाद में क्रॉस वोटिंग के कारण बीजेपी समर्थित उम्मीदवार दिलीप राय चुनाव जीत गए. लेकिन इस घटनाक्रम ने साफ कर दिया कि बीजद अब पहले जैसी राजनीति नहीं कर रही है.
केंद्र सरकार के खिलाफ खुलकर बोल रहे नवीन पटनायक
इसके अलावा नवीन पटनायक ने हाल के कई मुद्दों पर केंद्र सरकार का खुलकर विरोध भी किया है. 131वें संविधान संशोधन बिल को लेकर उन्होंने ओडिशा के सांसदों को पत्र लिखकर विरोध करने की अपील की थी. उन्होंने मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी से विधानसभा का विशेष सत्र बुलाने की भी मांग की थी. इतना ही नहीं, NEET UG परीक्षा रद्द करने के मुद्दे पर भी बीजद ने केंद्र सरकार को घेरा और कई जिलों में प्रदर्शन किए.
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पहले बीजेपी की भरोसेमंद सहयोगी रही है BJD
दिलचस्प बात यह है कि एक समय ऐसा भी था जब बीजद को भाजपा का भरोसेमंद सहयोगी माना जाता था. भले ही बीजद एनडीए से अलग हो गई थी, लेकिन संसद में कई अहम मौकों पर उसने बीजेपी का समर्थन किया. राष्ट्रपति चुनाव से लेकर कई महत्वपूर्ण विधेयकों तक बीजद भाजपा के साथ खड़ी नजर आई. केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव के चुनाव के दौरान भी बीजद ने अहम भूमिका निभाई थी.
क्यों अहम माना जा रहा है धर्मेंद्र प्रधान का बयान?
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राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि धर्मेंद्र प्रधान का बयान दरअसल एक राजनीतिक संदेश है. बीजेपी यह नहीं चाहती कि बीजद पूरी तरह INDIA गठबंधन की तरफ झुक जाए. यही कारण है कि भाजपा लगातार संवाद के रास्ते खुले रखना चाहती है. नवीन पटनायक आज भी ओडिशा की राजनीति का बड़ा चेहरा हैं। भले ही उनकी सरकार सत्ता से बाहर हो गई हो, लेकिन जनता के बीच उनकी पकड़ अब भी मजबूत मानी जाती है. आंकड़े भी यही बताते हैं. पिछले विधानसभा चुनाव में बीजद को 40.22 प्रतिशत वोट मिले थे, जबकि बीजेपी को 40.07 प्रतिशत वोट हासिल हुए थे. यानी वोट प्रतिशत के मामले में बीजद अब भी मजबूत स्थिति में है. यही वजह है कि बीजेपी भी नवीन पटनायक को पूरी तरह नाराज नहीं करना चाहती.
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बताते चलें कि अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या बीजद भविष्य में INDIA गठबंधन के और करीब जाएगी या फिर बीजेपी के साथ उसके रिश्ते दोबारा मजबूत होंगे. फिलहाल ओडिशा की राजनीति में बयानबाजी तेज है और आने वाले दिनों में यह मुद्दा और ज्यादा दिलचस्प हो सकता है.