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भारत से ही सीखना होगा लोकतंत्र, हमारी विरासत है हजारों वर्ष पुरानी - पुस्‍तक लोकार्पण में बोले CM योगी

UP: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गुरुवार को मुख्यमंत्री आवास के सभागार में हिंदुजा फाउंडेशन द्वारा प्रकाशित पुस्तक ‘प्रारंभिक उत्तर भारत व इसके सिक्के’ का विमोचन किया. इस अवसर पर उन्होंने फाउंडेशन द्वारा संग्रहित दुर्लभ और प्राचीन ऐतिहासिक सिक्कों का अवलोकन भी किया.

Image Source: Social Media
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CM Yogi: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गुरुवार को कहा कि भारत ने हमेशा सनातन संस्कृति और इतिहास से जुड़े प्रमाणों को प्रमुखता से रखा है. उन्होंने कहा कि ‘प्रारंभिक उत्तर भारत व इसके सिक्के’ पुस्तक भारत की लोकतांत्रिक चेतना, ऐतिहासिक एकता और हजारों वर्षों पुरानी सांस्कृतिक विरासत को प्रमाणों के साथ प्रस्तुत करने वाला एक महत्वपूर्ण दस्तावेज है, जो वर्षों से किए जा रहे पश्चिमी दुष्प्रचार का तथ्यात्मक उत्तर देता है. उन्होंने कहा कि लोकतंत्र के बारे में यदि किसी को जानना है तो उसे भारत से सीखना होगा. इसी को लेकर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने जी-20 समिट के दौरान कहा था कि भारत केवल दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र नहीं है बल्कि भारत लोकतंत्र की जननी भी है. इसका प्रमाण वैशाली है जो दुनिया के प्रारंभिक गणराज्यों में से एक था.

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गुरुवार को मुख्यमंत्री आवास के सभागार में हिंदुजा फाउंडेशन द्वारा प्रकाशित पुस्तक ‘प्रारंभिक उत्तर भारत व इसके सिक्के’ का विमोचन किया. इस अवसर पर उन्होंने फाउंडेशन द्वारा संग्रहित दुर्लभ और प्राचीन ऐतिहासिक सिक्कों का अवलोकन भी किया. कार्यक्रम में हिंदुजा फाउंडेशन के जनकल्याणकारी कार्यों को दर्शाती लघु फिल्म का प्रदर्शन भी किया गया.

भारत ने सभी को दिया समान अवसर

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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि दुनिया की कौन सी ऐसी जाति, मत व संप्रदाय हैं जिसकी भारत ने मदद नहीं की और शरण देकर फलने-फूलने का अवसर नहीं दिया. दुनिया के अंदर क्या कोई और देश या मत, मजहब है जो इस बात की घोषणा करता हो "अयं निजः परो वेति गणना लघुचेतसाम्, उदारचरितानां तु वसुधैव कुटुम्बकम्", ये केवल भारत ही कर सकता है. मुख्यमंत्री योगी ने “दुर्लभं भारते जन्म, मानुष्यं तत्र दुर्लभम्” का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत में जन्म लेना सौभाग्य है और मनुष्य के रूप में जन्म लेना उससे भी अधिक दुर्लभ. उन्होंने कहा कि पश्चिमी विद्वानों द्वारा लंबे समय तक यह प्रचार किया गया कि भारत कभी एक इकाई नहीं था, जबकि वर्ष 1947 का विभाजन स्वयं ब्रिटिश साजिश का परिणाम था. उन्होंने “उत्तरं यत् समुद्रस्य हिमाद्रेश्चैव दक्षिणम्. वर्षं तद् भारतं नाम भारती यत्र सन्ततिः॥” श्लोक का उल्लेख करते हुए कहा कि यही भारतवर्ष है, जिसमें ऐतिहासिक रूप से आज का पाकिस्तान और बांग्लादेश भी सम्मिलित रहे हैं। हजारों वर्षों की इस विरासत को भुलाने वाले ही भारत की अखंडता पर प्रश्न उठाते हैं.

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सिक्कों में सुरक्षित भारत का प्रामाणिक इतिहास

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मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि पुस्तक में अयोध्या, मथुरा, कौशाम्बी, काशी और पांचाल सहित अनेक क्षेत्रों के तांबे, चांदी और मिश्रित धातुओं से बने सिक्के उस समय की ऐतिहासिक, भौगोलिक और व्यापारिक स्थिति को प्रमाणित करते हैं. भारत ने सदैव तथ्य और साक्ष्य के साथ अपनी बात रखी है, जबकि पश्चिमी देशों ने लोकतंत्र को अपना योगदान बताकर इतिहास को विकृत करने का प्रयास किया. 

मापन, मुद्रा और विज्ञान की सनातन परंपरा

मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि भारत ने सबसे पहले मापन और तोल की वैज्ञानिक व्यवस्था दी. माशा, तोला जैसी इकाइयां आज भी प्रचलन में हैं, विशेषकर धातुओं और सोने की तोल में. प्राचीन सिक्कों के मापक भी उसी वैज्ञानिक प्रणाली पर आधारित थे, जो भारत की उन्नत बौद्धिक परंपरा को दर्शाते हैं। मुख्यमंत्री योगी ने मौर्य शासनकाल को भारत का स्वर्ण युग बताते हुए कहा कि उस समय विश्व की अर्थव्यवस्था में भारत की हिस्सेदारी 46 प्रतिशत थी. 15वीं सदी तक यह 24 प्रतिशत रही, लेकिन विदेशी शासकों के दोहन के कारण स्वतंत्रता के समय यह घटकर डेढ़ से दो प्रतिशत रह गई. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत आज विश्व की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन चुका है.

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विजन-2047 और विरासत पर गौरव

मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी का विजन-2047 पंच प्रण और 11 संकल्पों के साथ हर भारतीय को जोड़ता है. इसका पहला प्रण ही विरासत पर गौरव की अनुभूति करना है. अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि मंदिर, काशी विश्वनाथ धाम का पुनरोद्धार और सनातन धरोहरों का संरक्षण इसी विजन का साकार रूप है.

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सावित्री-सत्यवान ऐतिहासिक प्रमाणों से पुष्ट

कार्यक्रम में पुस्तक के लेखक प्रो. देवेन्द्र हांडा ने बताया कि ब्रिटिश म्यूजियम में संरक्षित एक सिक्के पर ‘सावित्री पुत्र जनपदस’ अंकित है. इससे सिद्ध होता है कि सावित्री-सत्यवान की कथा केवल कल्पना नहीं, बल्कि सनातन इतिहास की वास्तविक घटनाओं से जुड़ी है. उन्होंने मद्र राज तथा पोरस के वंशजों के सिक्कों का भी उल्लेख किया, जो प्रचलित ऐतिहासिक धारणाओं को चुनौती देते हैं.

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हिंदुजा फाउंडेशन का शोधपरक प्रयास

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हिंदुजा समूह के अशोक हिंदुजा ने कहा कि अब समय आ गया है कि भारत अपनी सनातन संस्कृति को वैज्ञानिक शोध और प्रमाणों के साथ दुनिया के सामने रखे. यह पुस्तक उसी दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास है. उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व की सराहना करते हुए उत्तर प्रदेश में आगे भी निवेश का भरोसा जताया. कार्यक्रम में हिंदुजा समूह के ट्रस्टी पीपी हिंदुजा, पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह, पुस्तक के लेखक प्रो. देवेन्द्र हांडा तथा हिंदुजा परिवार के वरिष्ठ सदस्य और पदाधिकारी उपस्थित रहे.

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