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‘हमें खेद है… आजादी के 78 साल बाद भी हम…’ किस मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने जताया अफसोस, जानिए

सुप्रीम कोर्ट ने खेद जताते हुए कहा कि आज़ादी के 78 साल बाद भी भारतीय अदालतें कोलोनियल लैंड अनुदानों से जुड़े मामलों के बोझ तले दबीं हुई हैं, जबकि आजाद भारत एक स्वतंत्र और संप्रभु राष्ट्र है.

Supreme Court of India
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देश की न्याय व्यवस्था आज भी ब्रिटिश और पुर्तगाली शासन के समय के विवादों को सुलझाने में फंसी हुई है. सुप्रीम कोर्ट ने खेद जताते हुए कहा कि आज़ादी के 78 साल बाद भी भारतीय अदालतें कोलोनियल लैंड अनुदानों से जुड़े मामलों के बोझ तले दबीं हुई हैं, जबकि आजाद भारत एक स्वतंत्र और संप्रभु राष्ट्र है. सर्वोच्च अदालत ने यह टिप्पणी दिव्याग्ना कुमारी व अन्य बनाम भारत सरकार के मामले में की.

न्यायमूर्ति सूर्यकांत, न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता और न्यायमूर्ति एन. कोटिश्वर सिंह की पीठ ने दादरा और नगर हवेली में पुर्तगाली काल के अनुदान पाने वाले वंशजों द्वारा कलेक्टर के 1974 के फैसले के खिलाफ दायर अपीलों को खारिज कर दिया. अपील में 1919 के ऑर्गेनाइजाकाओ एग्रेरिया (OA) के तहत गैर-खेती के लिए दी गई कृषि रियायतों को रद्द करने का फैसला चुनौती के रूप में पेश किया गया था.

जिन्होंने कभी इस देश का शोषण किया- SC

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SC ने कहा कि इस मामले में शायद सबसे चौंकाने वाली बात यह नहीं है कि इस न्यायालय को केवल आधी सदी से भी पहले शुरू हुए विवाद का निपटारा करने के लिए बुलाया गया है, बल्कि यह और भी गहरी विडंबना है कि आजादी के 78 साल बाद भी यह अदालत औपनिवेशिक शक्तियों की ओर से भूमि अधिकारों से जुड़े विवाद को सुलझाने में लगा हुआ है, जिन्होंने कभी इस देश की संपत्ति और संसाधनों का शोषण किया था.

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कब हुई इस लड़ाई की शुरुआत?

जब 1974 में राज्य प्रशासन ने कलेक्टर के जरिए पुर्तगाली अनुदानों को रद्द कर दिया तब से ही दादरा और नगर हवेली में भूमि को लेकर लंबी कानूनी लड़ाई तब शुरू हुई. ये क्षेत्र 1954 में पुर्तगाली शासन से मुक्त हुए थे और 1961 के संविधान के दसवें संशोधन के तहत भारत संघ में शामिल किए गए. 

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न्यायमूर्ति सूर्या कांत ने कहा कि इस मामले में सबसे चौंकाने वाली बात यह नहीं है कि अदालत आधे सदी से अधिक पुराने विवाद को निपटाने के लिए बुलाई गई है, बल्कि यह गहरी विडंबना है कि स्वतंत्रता के 78 साल बाद भी अदालत उन भूमि अधिकारों से जुड़े विवाद को सुलझाने में लगी है.

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