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'कानून का उल्लंघन किया तो खैर नहीं...', 'संसद चलो' मार्च से पहले एक्शन मोड में दिल्ली पुलिस, कॉकरोच जनता पार्टी को चेतावनी

दिल्ली पुलिस ने सोमवार को प्रस्तावित 'संसद चलो' मार्च की अनुमति देने से इनकार कर दिया है. पुलिस का कहना है कि प्रदर्शन के लिए नई मंजूरी नहीं ली गई और संसद की ओर बढ़ने पर प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया जा सकता है.

'कानून का उल्लंघन किया तो खैर नहीं...', 'संसद चलो' मार्च से पहले एक्शन मोड में दिल्ली पुलिस, कॉकरोच जनता पार्टी को चेतावनी
Image Source: X/ @CJP_for_India
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देश की राजधानी दिल्ली में सोमवार को प्रस्तावित 'संसद चलो' मार्च को लेकर माहौल लगातार गर्माता जा रहा है. दिल्ली पुलिस ने साफ कर दिया है कि इस मार्च की अनुमति नहीं दी जाएगी. पुलिस का कहना है कि संसद के आसपास का इलाका हाई सिक्योरिटी जोन है और यहां बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारियों के पहुंचने से कानून-व्यवस्था प्रभावित हो सकती है. इसके साथ ही आम लोगों की सुरक्षा और राजधानी की यातायात व्यवस्था पर भी असर पड़ने की आशंका जताई गई है. पुलिस ने यह भी चेतावनी दी है कि यदि कोई समूह संसद की ओर बढ़ने की कोशिश करता है तो उसे हिरासत में लिया जा सकता है.

मार्च के लिए नहीं मांगी गई अनुमति

दिल्ली पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, प्रदर्शन कर रहे संगठन को जंतर-मंतर पर केवल एक दिन के धरने की अनुमति दी गई थी. इसके लिए आयोजकों की ओर से लिखित सहमति भी दी गई थी. पुलिस का आरोप है कि निर्धारित समय समाप्त होने के बाद भी प्रदर्शन जारी रखा गया और 'संसद चलो' मार्च के लिए अलग से कोई आवेदन नहीं दिया गया. अधिकारियों का कहना है कि आयोजकों को पहले ही नियमों की जानकारी दे दी गई थी, लेकिन इसके बावजूद बिना औपचारिक मंजूरी के कार्यक्रम आगे बढ़ाया गया. पुलिस का यह भी कहना है कि संसद मार्च की जानकारी उन्हें बाद में मिली और उन्होंने खुद आयोजकों से संपर्क कर अनुमति संबंधी प्रक्रिया पूरी करने को कहा, लेकिन कोई आधिकारिक आवेदन नहीं मिला. ऐसे में प्रस्तावित मार्च को कानूनी मंजूरी नहीं दी जा सकती.

आयोजकों ने पुलिस के दावों को बताया गलत

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दूसरी तरफ प्रदर्शन कर रहे संगठन ने पुलिस के आरोपों को खारिज किया है. संगठन की प्रवक्ता वैष्णवी गौर का कहना है कि पुलिस को काफी पहले ही संसद मार्च की जानकारी दे दी गई थी. उनके मुताबिक यह सूचना आमने-सामने हुई बातचीत के दौरान साझा की गई थी. उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें पहले से अंदाजा था कि पुलिस इस मार्च की अनुमति नहीं देगी. ऐसे में अब अनुमति नहीं मिलने की बात कोई नई नहीं है. यानी एक तरफ पुलिस लिखित आवेदन न मिलने की बात कह रही है, जबकि दूसरी ओर आयोजकों का दावा है कि प्रशासन पहले से पूरी योजना से अवगत था. इसी विरोधाभास ने पूरे मामले को और अधिक चर्चा में ला दिया है.

जंतर-मंतर पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम

प्रदर्शन को देखते हुए जंतर-मंतर और उसके आसपास सुरक्षा व्यवस्था काफी मजबूत कर दी गई है. पुलिस ने इलाके के दोनों ओर अतिरिक्त जवान तैनात किए हैं. रैपिड एक्शन फोर्स की टीमें भी मौके पर मौजूद हैं. अधिकारियों के मुताबिक शनिवार और रविवार को बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी तैनात रहे, जबकि सोमवार को प्रस्तावित मार्च को देखते हुए अतिरिक्त पुलिस बल और अर्धसैनिक बलों को भी तैयार रहने के निर्देश दिए गए हैं. प्रशासन की कोशिश है कि किसी भी स्थिति में संसद क्षेत्र की सुरक्षा से समझौता न हो और राजधानी में सामान्य जनजीवन प्रभावित न होने पाए.

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सोनम वांगचुक को अस्पताल ले जाने पर भी विवाद

इसी प्रदर्शन के दौरान लद्दाख के सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को शनिवार सुबह जंतर-मंतर से हटाकर सफदरजंग अस्पताल ले जाया गया. वह राष्ट्रीय परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों और अन्य मुद्दों को लेकर लंबे समय से भूख हड़ताल पर बैठे थे. दिल्ली पुलिस का कहना है कि यह कदम दिल्ली हाई कोर्ट के आदेश और डॉक्टरों की सलाह के बाद उठाया गया. अधिकारियों के अनुसार वांगचुक के स्वास्थ्य में गिरावट आ रही थी और उन्हें गंभीर डिहाइड्रेशन की शिकायत थी. हालांकि इस कार्रवाई को लेकर भी विवाद खड़ा हो गया. प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर दबाव बनाने और धरना कमजोर करने के आरोप लगाए. वहीं पुलिस ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि पूरी कार्रवाई केवल स्वास्थ्य कारणों से की गई और इसमें किसी तरह की सख्ती या मारपीट नहीं हुई.

मारपीट और बिजली काटने के आरोपों पर पुलिस का जवाब

प्रदर्शनकारी संगठन ने पुलिस पर मारपीट और धरना स्थल की बिजली काटने जैसे आरोप भी लगाए. लेकिन दिल्ली पुलिस ने इन दावों को पूरी तरह गलत बताया है. अधिकारियों का कहना है कि किसी भी प्रदर्शनकारी के साथ अभद्र व्यवहार नहीं किया गया. पुलिस के अनुसार बीमार पड़े अन्य लोगों की भी मदद की गई और जरूरत पड़ने पर उन्हें चिकित्सकीय सहायता उपलब्ध कराई गई.

नए पुलिस कमिश्नर की निगरानी में बनी रणनीति

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सूत्रों के मुताबिक नए पुलिस कमिश्नर अनुराग कुमार ने पूरे घटनाक्रम को लेकर वरिष्ठ अधिकारियों के साथ कई दौर की बैठकें कीं. इन्हीं बैठकों में सुरक्षा व्यवस्था, भीड़ नियंत्रण और संवेदनशील हालात से निपटने की रणनीति तैयार की गई. इसके बाद देर रात अधिकारियों को विशेष जिम्मेदारियां सौंपी गईं और तड़के कार्रवाई की योजना को अमल में लाया गया.

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बहरहाल, सोमवार का दिन बेहद अहम माना जा रहा है. एक ओर प्रदर्शनकारी संसद की ओर मार्च निकालने की तैयारी में हैं, तो दूसरी ओर दिल्ली पुलिस किसी भी तरह की अव्यवस्था रोकने के लिए पूरी तरह सतर्क है. अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि विरोध प्रदर्शन किस दिशा में आगे बढ़ता है और प्रशासन हालात को किस तरह संभालता है.

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