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तुम्मदिहेट्टी परियोजना: तेलंगाना की सिंचाई परियोजना पर CM फडणवीस का बड़ा फैसला, महाराष्ट्र करेगा स्वतंत्र मूल्यांकन
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि जल आवंटन और वैधानिक स्वीकृतियों से संबंधित मामले केंद्रीय जल आयोग (सीडब्ल्यूसी) के अधिकार क्षेत्र में आते हैं. सीडब्ल्यूसी द्वारा राज्य से प्रतिक्रिया मांगे जाने के बाद महाराष्ट्र तथ्यात्मक निष्कर्षों के आधार पर अपना आधिकारिक रुख प्रस्तुत करेगा.
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महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने सोमवार को घोषणा की कि राज्य तेलंगाना की थुम्मिडीहेट्टी सिंचाई परियोजना की प्रस्तावित ऊंचाई वृद्धि का स्वतंत्र मूल्यांकन करेगा, जिससे अंतर-राज्यीय सहयोगात्मक संबंधों को बनाए रखते हुए स्थानीय हितों की रक्षा सुनिश्चित की जा सके.
दोनों राज्यों के अधिकारियों की संयुक्त समिति करेगी जांच
यह निर्णय एक उच्चस्तरीय बैठक के बाद लिया गया, जिसमें तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी और सिंचाई मंत्री उत्तम कुमार रेड्डी के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने परियोजना की ऊंचाई 148 मीटर से बढ़ाकर 152 मीटर करने के लिए महाराष्ट्र से औपचारिक सहमति का अनुरोध किया.
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मुख्यमंत्री फडणवीस ने सहयोग के माध्यम से पड़ोसी राज्यों के मुद्दों को हल करने की महाराष्ट्र की परंपरा पर प्रकाश डालते हुए कहा कि राज्य तेलंगाना की सहायता करने के लिए सकारात्मक रुख रखता है, बशर्ते इससे महाराष्ट्र के नागरिकों को कोई नुकसान न हो.
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मुख्यमंत्री फडणवीस ने कहा कि पिछली स्वीकृतियों से पता चला है कि वास्तविक जलमग्न क्षेत्र प्रारंभिक अनुमानों से अधिक है. परिणामस्वरूप सरकार ने दोनों राज्यों के मुख्य सचिवों और सिंचाई सचिवों की एक संयुक्त समिति गठित करने का आदेश दिया है ताकि एक विस्तृत तकनीकी मूल्यांकन किया जा सके.
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तकनीकी आपत्तियों की भी होगी संयुक्त समीक्षा
संयुक्त अध्ययन में परियोजना स्थलों के स्थानांतरण से जलमग्न क्षेत्रों पर पड़ने वाले प्रभाव, संबंधित वन्यजीव अभयारण्यों को शामिल करने और आवश्यक गैर-नदी तल भूमि की सीमा का विश्लेषण किया जाएगा.
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इसके अलावा, महाराष्ट्र के अध्ययन के संबंध में तेलंगाना द्वारा उठाई गई किसी भी विसंगति या तकनीकी आपत्ति की समीक्षा दोनों राज्यों के अधिकारियों द्वारा संयुक्त रूप से की जाएगी, और आवश्यकता पड़ने पर विशेषज्ञों से परामर्श लिया जाएगा.
जल आवंटन और वैधानिक मंजूरी पर CWC की भूमिका
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि जल आवंटन और वैधानिक स्वीकृतियों से संबंधित मामले केंद्रीय जल आयोग (सीडब्ल्यूसी) के अधिकार क्षेत्र में आते हैं. सीडब्ल्यूसी द्वारा राज्य से प्रतिक्रिया मांगे जाने के बाद महाराष्ट्र तथ्यात्मक निष्कर्षों के आधार पर अपना आधिकारिक रुख प्रस्तुत करेगा. स्वतंत्र तकनीकी समीक्षा और उसके बाद की चर्चाओं के बाद परियोजना पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा.
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क्या है तुम्मदिहेट्टी सिंचाई परियोजना?
डॉ. बीआर अंबेडकर प्राणहिता-चेवेल्ला परियोजना का एक प्रमुख घटक रही तुम्मदिहेट्टी परियोजना, तेलंगाना के कुमराम भीम आसिफाबाद जिले (पूर्व में आदिलाबाद जिला) के कौतला मंडल के तुम्मदिहेट्टी गांव में प्राणहिता नदी (गोदावरी की एक सहायक नदी) पर स्थित है.
इसका उद्देश्य आदिलाबाद जिले के सूखाग्रस्त क्षेत्रों में लगभग 2 लाख एकड़ भूमि की सिंचाई करना है और प्राणहिता नदी से जल का दोहन करके क्षेत्रीय सिंचाई आवश्यकताओं को पूरा करना है.
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152 मीटर ऊंचाई के प्रस्ताव पर क्यों है चर्चा?
तेलंगाना 152 मीटर की बैराज ऊंचाई (जिससे लगभग 2,300 एकड़ संभावित जलमग्नता की संभावना है) के लिए जोर दे रहा है ताकि जल उपयोग और गुरुत्वाकर्षण प्रवाह को अधिकतम किया जा सके, जबकि पड़ोसी राज्य महाराष्ट्र में भूमि जलमग्नता को कम करने के लिए 150 मीटर जैसी कम ऊंचाई वाले बैराज विकल्पों पर चर्चा जारी है.
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इस बैठक में महाराष्ट्र के जल संसाधन मंत्री गिरीश महाजन, तेलंगाना के सिंचाई मंत्री उत्तम कुमार रेड्डी, महाराष्ट्र के मुख्य सचिव राजेश अग्रवाल, तेलंगाना के मुख्य सचिव संजय जाजू, मुख्यमंत्री के अतिरिक्त मुख्य सचिव लोकेश चंद्र, प्रधान सचिव श्रीकर परदेशी, जल संसाधन विभाग के प्रधान सचिव एकनाथ दावले, सचिव जयंत बोरकर और प्रकाश मिसल के साथ-साथ दोनों राज्यों के अन्य वरिष्ठ अधिकारी व्यक्तिगत रूप से और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से उपस्थित रहे.