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CJP की बढ़ीं मुश्किलें...12 साल की बच्ची को प्रदर्शन में लाने पर Zero FIR की मांग, सौरभ-अभिजीत के खिलाफ POCSO एक्ट में शिकायत!
CJP FIR: वकील रिंकी चटर्जी सिंह ने सौरव दास, अभिजीत दीपके और CJP के अन्य आयोजकों के खिलाफ जीरो एफआईआर दर्ज कराने के लिए शिकायत दी है. उनका कहना है कि प्रदर्शन में एक 12 साल की बच्ची को शामिल किया गया था और लाठीचार्ज के दौरान उसके साथ बदसलूकी हुई.
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CJP FIR: 20 जुलाई को दिल्ली के जंतर मंतर पर नीट पेपर लीक के विरोध में एक प्रदर्शन किया गया था. इस प्रदर्शन का आयोजन कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) की ओर से किया गया था. प्रदर्शन के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प हुई, जिसके बाद लाठीचार्ज भी हुआ. इसी घटना को लेकर अब एक नया विवाद सामने आ गया है. वकील रिंकी चटर्जी सिंह ने सौरव दास, अभिजीत दीपके और CJP के अन्य आयोजकों के खिलाफ जीरो एफआईआर दर्ज कराने के लिए शिकायत दी है. उनका कहना है कि प्रदर्शन में एक 12 साल की बच्ची को शामिल किया गया था और लाठीचार्ज के दौरान उसके साथ बदसलूकी हुई. उनका मानना है कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और अगर किसी बच्चे की सुरक्षा से समझौता हुआ है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई होनी चाहिए.
बच्ची को प्रदर्शन में लाने पर उठे सवाल
रिंकी चटर्जी सिंह का कहना है कि 12 साल की बच्ची अभी इतनी छोटी है कि उसे कानून की नजर में विशेष देखभाल और सुरक्षा की जरूरत होती है. ऐसे में सवाल यह उठता है कि आखिर उसे एक ऐसे प्रदर्शन में क्यों लाया गया, जहां तनाव और टकराव की संभावना पहले से मौजूद थी. उनका कहना है कि यदि किसी नाबालिग बच्चे को ऐसे माहौल में ले जाया गया, जहां उसकी सुरक्षा खतरे में पड़ सकती थी, तो यह बेहद गंभीर मामला है. इसी आधार पर उन्होंने आयोजकों के खिलाफ पॉक्सो एक्ट (POCSO Act) धारा 13, 14 और 15 के साथ-साथ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 153 के तहत मामला दर्ज करने की मांग की है.
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#WATCH | Siliguri, West Bengal: On submitting a complaint for registration of a Zero FIR against Saurav Das, Abhijeet Dipke, and CJP organisers under sections of the POCSO Act, Advocate Rinki Chatterjee Singh says, "The FIR was filed over an incident at Jantar Mantar on July 20,… pic.twitter.com/N0GuAenHkH
— ANI (@ANI) ?ref_src=twsrc%5Etfw">August 5, 2026Advertisement
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पुलिस कार्रवाई और प्रधानमंत्री को लेकर बयान
वकील के अनुसार, प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने लाठीचार्ज किया. उनका आरोप है कि इस दौरान देश और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ आपत्तिजनक भाषा का भी इस्तेमाल किया गया. इसके बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इंस्टाग्राम पर एक लाइव वीडियो जारी किया. इस वीडियो में उन्होंने कहा कि वह युवाओं की भावनाओं को समझते हैं और उनके भविष्य को ध्यान में रखते हुए उनके खिलाफ किसी भी तरह की कानूनी कार्रवाई नहीं करेंगे. उन्होंने यह भी कहा कि वह युवाओं की बातों को माफ करते हैं.
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आयोजकों ने प्रधानमंत्री से मांगी माफी
प्रधानमंत्री के बयान के बाद CJP के आयोजक अभिजीत दीपके और सौरव दास ने भी एक वीडियो जारी किया. इस वीडियो में उन्होंने कहा कि पुलिस ने प्रदर्शन के दौरान 12 साल की बच्चियों पर लाठी चलाई और उनके साथ बदसलूकी की. उन्होंने इस घटना को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए प्रधानमंत्री से माफी मांगने की मांग की. उनका कहना था कि यदि किसी नाबालिग बच्ची के साथ ऐसा व्यवहार हुआ है तो इसकी जिम्मेदारी तय होनी चाहिए और सरकार को इस पर जवाब देना चाहिए.
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फंडिंग और साजिश के आरोप
रिंकी चटर्जी सिंह ने इस पूरे मामले में प्रदर्शन की फंडिंग पर भी सवाल उठाए हैं. उन्होंने पूछा कि इस तरह के कार्यक्रमों के लिए पैसा कहां से आता है और इसके पीछे कौन लोग हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ ऐसे लोग और संगठन सक्रिय हैं जो सरकार के खिलाफ माहौल बनाने की कोशिश कर रहे हैं. उन्होंने इसे तथाकथित "डीप स्टेट" की साजिश बताया और कहा कि कुछ दलाल और देश विरोधी ताकतें मिलकर मोदी सरकार को अस्थिर करने की कोशिश कर रही हैं. हालांकि, इन आरोपों के समर्थन में उन्होंने सार्वजनिक रूप से कोई प्रमाण पेश नहीं किया है, इसलिए इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि होना अभी बाकी है.
अब जांच पर टिकी हैं सभी की नजरें
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फिलहाल यह मामला शिकायत के स्तर पर है और आगे क्या कार्रवाई होगी, यह जांच एजेंसियों और पुलिस की जांच पर निर्भर करेगा. इस पूरे विवाद में एक तरफ नाबालिग बच्ची की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल उठाए जा रहे हैं, तो दूसरी ओर प्रदर्शन, पुलिस कार्रवाई और राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप भी चर्चा का विषय बने हुए हैं. अब सभी की नजर इस बात पर है कि जांच में क्या तथ्य सामने आते हैं और कानून के अनुसार आगे क्या कदम उठाए जाते हैं.