Advertisement

'कच्चे तेल और ईंधन की कोई कमी नहीं...', वैश्विक तेल संकट की आशंका पर मोदी सरकार ने दिया बड़ा भरोसा

खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते संघर्ष के बीच केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने कहा है कि भारत में कच्चे तेल और ईंधन का पर्याप्त भंडार मौजूद है. सरकार हालात पर नजर रखे हुए है और देश में पेट्रोल, डीजल व अन्य ईंधन की आपूर्ति सामान्य बनी हुई है.

Piyush Goyal (File Photo)

एशिया और खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते संघर्ष के कारण दुनिया भर में ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ रही है. समुद्री मार्गों में बाधा आने की खबरों के बीच भारत सरकार ने देशवासियों को भरोसा दिलाया है कि कच्चे तेल और ईंधन की आपूर्ति को लेकर घबराने की जरूरत नहीं है. केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने शनिवार को कहा कि भारत किसी भी स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार है और देश के पास पर्याप्त भंडार मौजूद है.

ईंधन आपूर्ति को लेकर सरकार का भरोसा

'सीएनबीसी-टीवी18 इंडिया बिजनेस लीडर्स अवार्ड्स 2026' समारोह में बोलते हुए पीयूष गोयल ने कहा कि कच्चे तेल और ईंधन के मामले में भारत की स्थिति मजबूत है. उन्होंने स्पष्ट किया कि पेट्रोल, डीजल, विमानन ईंधन और अन्य ऊर्जा संसाधनों की आपूर्ति में फिलहाल किसी तरह की बाधा नहीं आई है. गोयल के मुताबिक सरकार लगातार हालात पर नजर बनाए हुए है और यदि वैश्विक स्तर पर स्थिति और बिगड़ती है, तब भी देश की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त व्यवस्था की गई है. उन्होंने यह भी कहा कि भारत ने अपने ऊर्जा स्रोतों को विविध बनाने की दिशा में लंबे समय से काम किया है, जिसका फायदा आज मिल रहा है.

आम लोगों के लिए बढ़ाया गया केरोसिन उत्पादन

सरकार ने आम नागरिकों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए केरोसिन के उत्पादन में भी बढ़ोतरी की है. इसका मकसद यह है कि यदि किसी वजह से एलपीजी की आपूर्ति में देरी होती है, तो लोगों के पास खाना पकाने का एक वैकल्पिक साधन उपलब्ध रहे. पीयूष गोयल ने कहा कि सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि आम आदमी को किसी भी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े. इसी कारण एलपीजी और एलएनजी की जरूरतों को पूरा करने के लिए विभिन्न देशों से आयात की व्यवस्था भी मजबूत की जा रही है.

होर्मुज जलडमरूमध्य बना वैश्विक चिंता का केंद्र

इस बीच खाड़ी क्षेत्र में जारी तनाव ने अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार को प्रभावित किया है. अमेरिका और इजराइल के साथ ईरान का संघर्ष अब तीसरे सप्ताह में पहुंच चुका है. इस संघर्ष के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य में समुद्री यातायात प्रभावित हुआ है, जो दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल आपूर्ति मार्गों में से एक माना जाता है. होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर दुनिया के बड़े हिस्से में कच्चे तेल की आपूर्ति होती है. यदि यहां किसी तरह की रुकावट आती है तो उसका असर वैश्विक बाजार पर पड़ सकता है. इसी वजह से कई देश इस क्षेत्र की स्थिति पर बारीकी से नजर रखे हुए हैं.

अमेरिका ने देशों से की समुद्री सुरक्षा की अपील

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस मुद्दे पर अंतरराष्ट्रीय सहयोग की जरूरत पर जोर दिया है. उन्होंने चीन, फ्रांस, जापान, दक्षिण कोरिया और ब्रिटेन सहित कई देशों से अपील की है कि वे होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा के लिए अपने जहाज भेजें. ट्रंप का कहना है कि यह समुद्री मार्ग वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण है और इसे सुरक्षित बनाए रखना सभी देशों की जिम्मेदारी है. उन्होंने यह भी दावा किया कि अमेरिका ने ईरान की सैन्य क्षमता को काफी हद तक कमजोर कर दिया है, लेकिन इसके बावजूद समुद्री मार्ग पर खतरे पूरी तरह खत्म नहीं हुए हैं.

बहरहाल, वैश्विक स्तर पर बढ़ते तनाव के बीच भारत सरकार स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है. ऊर्जा आपूर्ति को सुरक्षित रखने के लिए अलग-अलग देशों से आयात के विकल्प तलाशे जा रहे हैं और घरेलू स्तर पर भी तैयारी मजबूत की जा रही है. सरकार का कहना है कि आम लोगों को घबराने की जरूरत नहीं है. देश के पास पर्याप्त भंडार मौजूद है और यदि हालात चुनौतीपूर्ण होते हैं, तब भी भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में सक्षम रहेगा. यही भरोसा सरकार देशवासियों को दे रही है.

Advertisement

यह भी पढ़ें

Advertisement

अधिक →