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जामिया में धर्मांतरण का खेल, रिपोर्ट से हुआ बड़ा खुलासा!
जामिया में धर्मांतरण के खेल का खुलासा हुआ है। एक NGO की रिपोर्ट में जामिया को लेकर तमाम तरह के खुलासे हुए हैं, जिससे हड़कंप मच गया है। पूरी ख़बर इस रिपोर्ट में जान लीजिए।
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कहने को तो विश्वविद्यालयों में बच्चों को शिक्षा दी जाती है, उन्हें देश को आगे ले जाने वाली पीढ़ियों के तौर पर तैयार किया जाता है, जो बच्चा जैसा है, भले ही वो किसी धर्म-जाति-पंथ का है, उसे उसी तरह स्वीकारा जाता है, लेकिन सरकार से भारी-भरकम टैक्सपेयर्स मनी लेने वाली राजधानी दिल्ली स्थित देश की जानी मानी सेंट्रल यूनिवर्सिटी, जामिया मिल्लिया इस्लामिया में कुछ उल्टा ही हो रहा है। यहाँ शिक्षा और शिक्षक के हर मापदंड को तार-तार किया जा रहा है। कभी बाटला हाऊस एनकाउंटर तो कभी अर्बन नक्सल का सपोर्ट तो कभी खाड़ी देशों के एजेंडे को आगे बढ़ाना तो कभी दिवाली या दोपोत्सव समारोह पर हमला, जामिया मिल्लिया इस्लामिया आए दिन नए-नए विवादों की वजह से सुर्खियों में रहता है।
यूनिवर्सिटी में सक्रिय हुआ धर्मांतरण गैंग !
जामिया मिल्लिया इस्लामिया पिछले कई महीनों से गलत वजहों से सुर्खियों में है। अब देखिए न इन धर्मांतरण गैंग वालों ने यूनिवर्सिटी को भी नहीं छोड़ा। रिपोर्ट के अनुसार यहाँ हिन्दू छात्राओं पर सॉफ़्ट और हार्ड, By Hook or By Crook, धर्मांतरण का जाल फेंका जा रहा है। कई डिपार्टमेंट्स से ऐसी शिकायतें आ रही हैं कि वहां हिन्दू छात्राओं से धार्मिक आधार पर भेदभाव किया जा रहा है, उन्हें धर्मांतरण की ओर धीरे-धीरे धकेला जा रहा है।
जामिया को बड़ा मदरसा बनाने पर अड़े कट्टरपंथी !
जामिया मिल्लिया इस्लामिया की गिनती देश के चुनिंदा और टॉप यूनिवर्सिटी में होती है। यहाँ देश के साथ-साथ दुनिया के अन्य देशों से भी छात्र और स्कॉलरशिप पढ़ने आते हैं। लेकिन जिस तरह की घटना यहाँ हो रही है वो काफी चौंकाने वाली हैं।
क्या है सॉफ़्ट और हार्ड कन्वर्जन?
देश में इन दिनों दो तरह से धर्मांतरण का खेल हो रहा है। एक है सॉफ़्ट और एक है हार्ड कन्वर्जन। सॉफ़्ट का सीधा-सीधा मतलब है कि सिलेबस ऐसा डिज़ाइन करो, क्लास का माहौल ऐसा बनाओ, टीचर्स ऐसा पढ़ाए कि दूसरे समाज की लड़कियाँ अपने धर्म को हीन भावना से देखने लगें, उन्हें अपने धर्म-संस्कृति और समाज में हर चीज ख़राब लगे, जबकि दूसरा धर्म, मसलन इस्लाम जातिविहीन, ऊँच-नीच से परे, महिलाओं को काफ़ी सम्मान देने वाला नज़र आए। वहीं दूसरा तरीक़ा है रेप, कत्ल, हमला या फिर तलवार की धार पर धर्मांतरण कराना।
जामिया में धर्मांतरण रैकेट से परेशान हुई छात्रा !
बीते महीने जामिया में एक छात्रा के साथ धर्मांतरण साज़िश हुई, उसे इसके लिए उकसाया गया। Entrance Test से लेकर क्लास में उसके साथ भेदभाव हुआ और कथित तौर पर क्लास के ही किसी टीचर या फ़िर क्लर्क स्टाफ़ ने उसका नंबर बाँट दिया, (हालाँकि इस बात की पुष्टि नहीं हो पाई है कि नंबर किसने बाँटे) जिससे उसे धर्मांतरण की धमकियाँ आने लगीं, जिस कारण छात्रा ने यूनिवर्सिटी में आना बंद कर दिया। इसी को वजह बनाकर विभाग ने उसे परीक्षा देने से रोक दिया और प्रताड़ित किया, जैसा कि आरोप लड़की ने लगाया। NMF ने ही इस मामले को प्रमुखता से उठाया था और पीड़ित लड़की से बात की थी, सुनिए तब लड़की ने क्या कहा था।
तो देखा आपने कि किस तरह लड़की को धर्मांतरण के लिए पहले तो प्रेरित किया गया फिर प्रताड़ित किया जाने लगा!
क्या है ताज़ा मामला?
एक ‘Call For Justice’ नाम के NGO ने जामिया यूनिवर्सिटी पर गंभीर आरोप लगाए हैं। NGO ने कहा कि यूनिवर्सिटी में पढ़ने वाले हिन्दू छात्र-छात्रा, फैकल्टी मेंबर्स और स्टॉफ संस्थागत भेदभाव का शिकार हैं।
एक निजी वेबसाइट ने NGO के हवाले से लिखा कि जामिया में एक ग्रुप और तबका सक्रिय रूप से हिन्दू छात्रा-स्टॉफ या फ़ैकल्टी मेंबर्स को धर्मांतरण के लिए उकसाता है, प्रेरित करता है और इससे काम न चले तो उसे धमकाता है। और इससे भी काम न चले तो सिस्टम का इस्तेमाल कर उनका जीवन मुहाल कर देता है, उसे क्लास, परीक्षा, इवेंट्स में भेदभाव का शिकार होना पड़ता है, उससे सख़्ती से पेश आते हैं। छात्र-छात्रों के साथ हर वो कुछ चुपके के साथ, नियम का हवाला देकर होता है जो आपने एक पीड़ित लड़की की ज़ुबानी इस वीडियो में ही सुनी। इस संबंध में लड़की ने पुलिस में शिकायत भी की है, जिसकी कॉपी आप देख भी सकते हैं।
धर्मांतरण और पीड़िता की शिकायत पर कार्रवाई की जगह जामिया ने पीड़िता को ही भेजा लीगल नोटिस!
हद तो तब हो गई जब जामिया ने हिन्दू छात्रा की शिकायत पर कोई कार्रवाई की जगह उसे ही लीगल नोटिस भेज दिया।
कलमा पढ़ो, इस्लाम पर ईमान लाओ नहीं तो…
NGO और अन्य रिपोर्टस की मानें तो हिंदुओं को कलमा पढ़ने के लिए प्रेरित किया जाता है, और अगर कोई नहीं माने तो उसे प्रताड़ित भी किया जाता है। इस संबंध में Call For Justice ने एक 6 सदस्यीय Fact Finding Committee भी गठित की थी, जिसकी रिपोर्ट सामने आ गई है।
समिति में कौन-कौन सदस्य शामिल थे?
समिति में दिल्ली उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश शिव नारायण ढींगरा, वरिष्ठ वकील राजीव तिवारी और पूर्णिमा, दिल्ली के पूर्व पुलिस आयुक्त एस.एन. श्रीवास्तव, दिल्ली सरकार के पूर्व सचिव नरेंद्र कुमार और किरोड़ीमल कॉलेज के सहायक प्रोफेसर डॉ. नदीम अहमद शामिल थे।
इस समिति की रिपोर्ट ने जामिया में हिंदुओं के साथ धार्मिक भेदभाव की पोल खोल दी है। हिन्दू स्टूडेंट्स, स्टॉफ और फ़ैकल्टी मेंबर्स को एसिड अटैक और रेप की धमकी दी गई और कहा गया कि अगर उन्होंने धर्मांतरण का विरोध किया तो उनके साथ बुरा होगा।
हिन्दू छात्र-छात्रों को परीक्षा में जानबूझकर कर दिया जाता है फेल!
जी हाँ! हिन्दू छात्र-छात्रों को परीक्षा में जानबूझकर फेल किया जाता है ताकि उन्हें डराया जा सके। और तो और मुस्लिम छात्र और फ़ैकल्टी मेंबर्स पर भी इस तरह की गतिविधि को बढ़ावा देने के आरोप लग रहे हैं।
हिन्दू SC/ST लड़कियाँ लव जिहाद गैंग के निशाने पर!
Fact Finding Committee की रिपोर्ट से एक और ख़ौफ़नाक बात पता चली है। कहा जा रहा है कि यूनिवर्सिटी के एडमिशन में हिन्दू SC/ST लड़कियों और छात्रों को ज्यादा तरजीह और ट्रीटमेंट दी जाती है ताकि उन्हें लव जिहाद की ओर धकेला जा सके और उनकी धार्मिक मान्यताओं को ख़त्म कर दूसरी ओर मोड़ने में आसानी हो। समाचार वेबसाइट Zee News पर छपी ख़बर के मुताबिक कई छात्र-छात्राओं ने इसी सब से परेशान होकर जामिया को अलविदा कह दिया। जामिया में रेडिकल मुस्लिम संगठनों के वर्चस्व की ओर भी ये रिपोर्ट इशारा कर रही है।
इस्लाम पर ईमान लाओ, तुम्हारी और तुम्हारे बच्चों की ज़िंदगी बना दूँगा !
इससे पहले जुलाई में भी ‘Organiser’ में एक रिपोर्ट सामने आई थी कि किस तरह Department of Natural Science में सहायक के तौर पर काम करने वाले राम निवास (वाल्मीकि) पर जातिगत टिप्पणी की गई और उस पर धर्मांतरण के लिए दबाव बनाया गया। इस संबंध में जामिया के तत्कालीन प्रोफेसर नाज़िम हुसैन अल जाफरी, उप रजिस्ट्रार शाहिद तसलीम, और कार्यकारी रजिस्ट्रार एम. नसीम हैदर पर गंभीर आरोप लगे। इस मामले में जामिया नगर पुलिस थाने में 15 जुलाई 2024 को FIR (FIR No 29/2024) भी दर्ज हुई थी।
अब देखने वाली बात होगी कि जामिया और पुलिस इस रिपोर्ट के आधार पर क्या कार्रवाई करती है। हालाँकि जिस तरह के मामले जामिया से सामने आ रहे हैं वो काफ़ी चिंताजनक और निंदनीय है। इस तरह की घटना एक शैक्षनिक संस्थान में होना काफ़ी दुखद है। पूरे मामले में पीड़िता और NGO की रिपोर्ट कितनी सच है, ये तो पुलिस की जाँच के बाद ही पता चलेगा। NMF News ने तो वही रिपोर्ट किया है जो मीडिया में उपलब्ध हैं और पीड़िता का बयान, जिसे हमने ही दिखाया था।
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