तमिलनाडु में CM विजय का सबसे बड़ा एक्शन... चेन्नई नगर निगम के 7 अधिकारी सस्पेंड, GPay की जांच में खुला राज
तमिलनाडु में मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय की भ्रष्टाचार विरोधी मुहिम के तहत चेन्नई नगर निगम के सात अधिकारियों को सस्पेंड कर उनके खिलाफ FIR दर्ज की गई है. छापेमारी के दौरान एक इंजीनियर अपने GPay अकाउंट में हुए 2.39 लाख रुपये के संदिग्ध लेन-देन का संतोषजनक हिसाब नहीं दे पाया.
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तमिलनाडु की सत्ता संभालने के साथ ही मुख्यमंत्री विजय के आदेश पर सूबे में भ्रष्टाचार के खिलाफ ताबड़तोड़ कार्रवाई हो रही है. ताजा मामला चेन्नई नागर निगम का हैं जहां सात अधिकारियों को सस्पेंड कर उनके खिलाफ FIR दर्ज की गई है. बताया जा रहा है कि यह कदम हाल ही में उत्तर और मध्य चेन्नई के दो प्रमुख जोन में हुई अचानक छापेमारी के बाद उठाया गया, जहां जांच टीम को बड़ी मात्रा में नकदी और कई संदिग्ध डिजिटल ट्रांजैक्शन के रिकॉर्ड मिले. यह कार्रवाई भले ही चेन्नई नगर निगम के अधिकारियों से जुड़ी हो लेकिन इसका असर पूरे प्रदेश पर अच्छी तरह से पड़ा है.
GPay ट्रांजैक्शन ने बढ़ाई अधिकारियों की मुश्किलें
जांच के दौरान सबसे ज्यादा चर्चा एक असिस्टेंट एग्जीक्यूटिव इंजीनियर के मामले की रही. अधिकारियों के अनुसार, उसके मोबाइल फोन की जांच में गूगल पे (GPay) अकाउंट से जुड़े 2.39 लाख रुपये के लेन-देन सामने आए. जब उससे इन ट्रांजैक्शन का हिसाब मांगा गया, तो वह कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे सका. इसके बाद जांच एजेंसियों ने पूरे मामले को गंभीर मानते हुए आगे की कार्रवाई शुरू कर दी.
DVAC की रिपोर्ट के बाद शुरू हुई बड़ी कार्रवाई
यह कार्रवाई तमिलनाडु के भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (DVAC) की रिपोर्ट के आधार पर की गई है. विजिलेंस टीम ने अपनी विस्तृत जांच रिपोर्ट चेन्नई नगर निगम को सौंपी थी. रिपोर्ट मिलते ही संबंधित अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर विभागीय जांच शुरू कर दी गई. जांच का दायरा जोन-6 और जोन-9 तक फैला हुआ है. इनमें कोलाथुर, अयानवरम, पेराम्बुर, मायलापुर, थाउजेंड लाइट्स और मुंगमबक्कम जैसे इलाके शामिल हैं. इन क्षेत्रों से लंबे समय से भ्रष्टाचार की शिकायतें मिल रही थीं, जिसके बाद विजिलेंस ने योजनाबद्ध तरीके से छापेमारी की.
रिश्वतखोरी और फर्जी बिलिंग पर सरकार का सख्त रुख
जानकारी देते चलें कि दिलचस्प बात यह है कि चेन्नई नगर निगम में यह कुछ ही दिनों के भीतर दूसरी बड़ी कार्रवाई है. इससे पहले भी छह अधिकारियों को रिश्वत लेने, फर्जी बिलिंग करने और नौकरी दिलाने के नाम पर पैसे वसूलने के आरोप में सस्पेंड किया गया था. अब सरकार का रुख पहले से कहीं ज्यादा सख्त नजर आ रहा है. अधिकारियों का कहना है कि यदि विभागीय जांच में आरोप सही साबित होते हैं, तो दोषियों को केवल सस्पेंड नहीं रखा जाएगा, बल्कि उन्हें सरकारी सेवा से सीधे बर्खास्त भी किया जा सकता है.
अपनों पर भी कार्रवाई से दिया साफ संदेश
सीएम विजय ने यह भी साफ संदेश दिया है कि भ्रष्टाचार के मामलों में किसी को विशेष छूट नहीं मिलेगी. हाल ही में सत्ताधारी दल 'तमिलगा वेत्री कड़गम' (TVK) के एक पंचायत नेता का कथित रिश्वत लेते हुए वीडियो सामने आया था. मामला सामने आने के तुरंत बाद पार्टी ने उस नेता के खिलाफ कार्रवाई करते हुए उसे संगठन से बाहर कर दिया. इससे सरकार ने यह संकेत दिया है कि कार्रवाई केवल सरकारी कर्मचारियों तक सीमित नहीं रहेगी.
जनता को भी बनाया भ्रष्टाचार के खिलाफ साझेदार
भ्रष्टाचार के खिलाफ इस अभियान में आम लोगों की भागीदारी बढ़ाने के लिए सरकार ने DVAC की निगरानी में एक विशेष व्हाट्सएप हेल्पलाइन भी शुरू की है. इस पर नागरिक रिश्वत मांगने की शिकायत के साथ फोटो, वीडियो और अन्य डिजिटल सबूत सीधे भेज सकते हैं. सरकार का दावा है कि हर शिकायत की जांच कर दोषियों के खिलाफ त्वरित कार्रवाई की जाएगी.
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बताते चलें कि तमिलनाडु में शुरू हुई यह मुहिम अब केवल प्रशासनिक कार्रवाई नहीं, बल्कि साफ-सुथरे शासन की दिशा में एक बड़ा संदेश बनती नजर आ रही है. आने वाले दिनों में विभागीय जांच के नतीजे इस अभियान की दिशा और असर दोनों तय करेंगे.