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सुप्रीम कोर्ट की WhatsApp को दो टूक, मेटा से साझा न करें डेटा, भारतीय नागरिकों की निजता से खिलवाड़ बंद हो

सुप्रीम कोर्ट ने निजता का हवाला देते हुए व्हाट्सएप को मेटा के साथ डेटा साझा करने से रोक दिया है. इसे देश की गोपनीयता नीति के खिलाफ माना है.

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03 Feb 2026
( Updated: 03 Feb 2026
09:46 AM )
सुप्रीम कोर्ट की WhatsApp को दो टूक, मेटा से साझा न करें डेटा, भारतीय नागरिकों की निजता से खिलवाड़ बंद हो
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निजता का अधिकार (Right to Privacy) हर नागरिक को संविधान ने दिया है. अगर कोई या फिर किसी के द्वारा इसका उल्लंघन किया जाता है, तो यह अपराधन की श्रेणी में आता है. आज टेक्नोलॉजी के आ जाने से सबकुछ आसान तो हो गया है, लेकिन प्राइवेसी पर खतरे के बादल भी मंडराते रहते हैं. इसी कड़ी में व्हाट्सएप और मेटा की विवादित प्राइवेसी पॉलिसी मामले में सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने बेहद सख्त रुख अपना या है. न्यायालय ने दो टूक शब्दों में कहा कि डेटा शेयरिंग की यह प्रक्रिया भारती नागरिकों की निजता का खुला उल्लंघन है.

CJI सूर्यकांत की दो टूक

सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) ने सख्त लहजे में निर्देश देते हुए कहा, ‘हम आपको मेटा के साथ यूजर्स की एक भी जानकारी साझा करने की अनुमति नहीं देंगे. इस देश की गोपनीय नीतियों और नागरिकों की प्राइवेसी के साथ खेलने की इजाजत कतई नहीं दी जा सकती है’.

सीजेआई ने पूछे तीखे सवाल

सीजेआई सूर्यकांत ने व्हाट्सएप की नई निति की भाषा पर सख्त टिप्पणी की. उन्होंने पूछा, ‘आपने अपनी नीतियों को इतनी चालाकी और जटिलता से तैयार किया है कि इसे समझाना नामुमकिन है. क्या देश का एक साधाराण नागरिक, जैसे कोई घरेलू सहायक, निर्माण मज़दूर या छोटा रेहड़ी-पटरी वाला, इस तकनीकी मायाजल को समझ पाएगा?’ उन्होंने आगे कहा कि, ‘सबसे पहले तो आपने लोगों को इस ऐप की ‘लत’ लगाई और अब उनकी मजबूरी का फायदा उठाया जा रहा है’.

सॉलिसिटर जनरल (SG) तुषार मेहता ने क्या कहा?

सुनवाई के दौरान तुषार मेहता ने कहा कि व्हाट्सएप यूजर्स को सर्फ दो ही ऑप्शन दे रहा है- ‘या तो पॉलिसी स्वीकार करो या ऐप का इस्तेमाल बंद कर दो’. इस पर कोर्ट ने कहा कि बिहार के दूरदराज इलाकों या तमिलनाडु के गांवों में रहने वाले लोग, जिन्हें अंग्रजी नहीं आती, वे इस नीति के ख़तरनाक परिणामों को कभी नहीं समझ पाएंगे.

अब 3 जजों की बेंच करेंगे सुनवाई

मामले की गंभीरता को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट अब सभी पक्षों को नोटिस जारी किया है. अब इन अपीलों पर विस्तृत सुनवाई कोर्ट की 3 जजों की बेंच के सामने होगी. 

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