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टूटी पसलियां, ऑक्सीजन सपोर्ट के साथ छात्रा ने दिया RE-NEET एग्जाम, शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ऐसे बने ’देवदूत’

देशभर में लाखों अभ्यर्थियों ने नीट री-एग्जाम दिया. इन्हीं के बीच एक ऐसी छात्रा भी थीं जिनकी 9 पसलियां टूट चुकी थीं. सृष्टि दुबे परीक्षा के 7 दिन पहले भयंकर हादसे का शिकार हो गई थीं.

Image Source- IANS
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पिछले कुछ महीनों से पेपर लीक, छात्रों के सुसाइड और तनाव की खबरों ने देश के एग्जाम सिस्टम पर कई सवाल खड़े किए. इसके बाद पेपर पहुंचाने की जिम्मेदारी वायुसेना को सौंपनी पड़ी. इन सब के बीच जब NEET की परीक्षा दोबारा हो रही है तो एग्जाम सेंटर से कुछ सकारात्मक और सुखद तस्वीर भी सामने आई है. 

देशभर में लाखों अभ्यर्थियों ने नीट री-एग्जाम दिया. इन्हीं के बीच एक ऐसी छात्रा भी थीं जिनकी 9 पसलियां टूट चुकी थीं, इसके बावजूद हौंसलों में पूरी जान थी. कोलकाता की सृष्टि दुबे ने अपनी टूटी पसलियों के साथ NEET परीक्षा दी तो हर कोई दंग रह गया. केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने सृष्टि के लिए खास तौर पर दखल दिया. 

कौन हैं सृष्टि दुबे और कैसे की शिक्षा मंत्री ने मदद? 

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बताया जा रहा है कोलकाता की रहने वाली सृष्टि दुबे 14 जून को भीषण सड़क हादसे का शिकार हो गई थी. एक्सीडेंट में उन्हें गंभीर चोट आईं. जिसके बाद उनकी 9 पसलियां टूट गईं और फेफड़ों में भी गहरा डैमेज हुआ. हालत इतनी नाजुक थी कि उनकी वैस्कुलर सर्जरी करनी पड़ी और उन्हें वेंटिलेटर (आर्टिफिशियल वेंटिलेशन) पर रखा गया, लेकिन जैसे ही उनकी हालत में थोड़ा सुधार हुआ और डॉक्टरों ने वेंटिलेटर हटाया. 

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वेंटिलेटर से हटते ही सृष्टि ने सबसे पहले पिता से कहा कि उनकी  सालभर की मेहनत बर्बाद हो जाएगी. वह NEET परीक्षा देना चाहती हैं. 

पिता ने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को लिखी भावुक चिट्ठी

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इसके बाद पिता श्रीराम शिवजी दुबे ने शिक्षा मंत्री को भावुक चिट्ठी लिखी. पिता की अपील पर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने खुद संज्ञान लिया और तुरंत सृष्टि के लिए एग्जाम सेंटर में अलग कमरे की व्यवस्था करने के निर्देश दिए. सृष्टि ने कोलकाता के धाकुरिया स्थित बिनोदिनी गर्ल्स हाई स्कूल परीक्षा केंद्र पर विशेष व्यवस्था के तहत परीक्षा दी. 

उनकी गंभीर स्वास्थ्य स्थिति को देखते हुए मेडिकल सहायता उपलब्ध कराई गई. परीक्षा केंद्र पर एंबुलेंस भी तैनात रखी गई. परीक्षा शुरू होने के बाद शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने खुद छात्रा के पिता को फोन कर उनकी बेटी की स्थिति और परीक्षा के बारे में जानकारी ली.

श्रृष्टि के पिता श्रीराम शिवजी दुबे एक प्राथमिक विद्यालय में शिक्षक हैं. उन्होंने मंत्री का धन्यवाद करते हुए कहा, ‘आपकी मदद की वजह से ही मेरी बेटी आज परीक्षा दे पा रही है.’

छात्रा की मां ने भी मंत्री के प्रति आभार व्यक्त करते हुए बताया कि 14 जून को सड़क दुर्घटना में घायल होने के बाद उन्हें उम्मीद नहीं थी कि उनकी बेटी परीक्षा दे सकेगी. उन्होंने कहा, ‘डॉक्टरों ने हमें विशेष अनुमति के लिए आवेदन करने की सलाह दी थी, ताकि वह अस्पताल के कपड़ों और मेडिकल उपकरणों के साथ परीक्षा में शामिल हो सके.’

पिता ने चिट्ठी में लिखा था, आईएलएस अस्पताल हमें डॉक्टर, पैरामेडिकल स्टाफ और सभी जरूरी उपकरणों के साथ मेडिकल सपोर्ट देने को तैयार है. मेरी प्रार्थना है कि मेरी बेटी को परीक्षा में बैठने की अनुमति दी जाए. अगर परीक्षा केंद्र को सूचित कर उसे ग्राउंड फ्लोर पर कुर्सी-मेज दे दी जाए और अस्पताल के कपड़ों और चेस्ट ड्रेन जैसे जरूरी मेडिकल अटैचमेंट के साथ बैठने दिया जाए तो बड़ी कृपा होगी. शिक्षा मंत्री ने मानवीय आधार पर तुरंत इस चिट्ठी का संज्ञान लिया और NTA को हर संभव मदद के आदेश दिए.

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छात्रा से मिलेंगे धर्मेंद्र प्रधान 

धर्मेंद्र प्रधान ने छात्रा को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि वह परीक्षा में अच्छा प्रदर्शन करे और भविष्य में डॉक्टर बनकर अपने माता-पिता का नाम रोशन करे. उन्होंने यह भी कहा कि कोलकाता आने पर वह छात्रा से मिलने का प्रयास करेंगे.

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उल्लेखनीय है कि रविवार को देशभर में 20 लाख से ज्यादा अभ्यर्थियों ने कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच नीट 2026 री-एग्जाम में हिस्सा लिया. यह पुनर्परीक्षा 3 मई को आयोजित मूल परीक्षा में सामने आई अनियमितताओं के कारण कराई गई. 

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