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दिया नहीं, लिया गया! NEET छात्र के अबू धाबी सेंटर मिलने के मामले में NTA का बड़ा खुलासा, सामने आई सच्चाई

NEET री-एग्जाम शुरू हो चुका है. एयरफोर्स से पेपर की ढुलाई से लेकर चप्पे-चप्पे पर सुरक्षा इंतजाम किए गए हैं. इसी बीच एक छात्र के नागपुर की जगह अबू धाबी सेंटर मिलने के मामले में NTA का बड़ा खुलासा हुआ है.

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21 Jun 2026
( Updated: 21 Jun 2026
12:51 PM )
दिया नहीं, लिया गया! NEET छात्र के अबू धाबी सेंटर मिलने के मामले में NTA का बड़ा खुलासा, सामने आई सच्चाई
NEET RE Exam/ Image: @IANS
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राष्ट्रव्यापी विवाद, पेपर लीक की चिंता और व्यापक सुरक्षा तैयारियों के बीच राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) द्वारा आयोजित 'नीट-यूजी 2026' का बहुप्रतीक्षित री-एग्जाम आखिरकार शुरू हो गया है. इस अत्यंत महत्वपूर्ण परीक्षा के निष्पक्ष, सुरक्षित और सुविधाजनक आयोजन के लिए एनटीए ने व्यापक तैयारियां की हैं, जिसमें 22 लाख से अधिक अभ्यर्थी भाग ले रहे हैं.

नीट की परीक्षा को लेकर अभूतपूर्व सुरक्षा व्यवस्था

एनटीए के अनुसार, यह परीक्षा भारत के 551 शहरों में स्थित 5,440 परीक्षा केंद्रों और विदेशों के 13 देशों के 14 प्रमुख शहरों में 12 भारतीय भाषाओं में एक साथ ली जा रही है. सुरक्षा तंत्र को अभेद्य बनाने के लिए देशभर के 95 हजार से अधिक परीक्षा कक्षों में कुल 1,38,560 सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं, जिनसे राष्ट्रीय, राज्य और मंत्रालय स्तर पर लाइव मॉनिटरिंग की जा रही है. 

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इसके अलावा, किसी भी संदिग्ध गतिविधि को तुरंत पकड़ने के लिए कैमरों से प्राप्त फुटेज का आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) आधारित विश्लेषण भी किया जा रहा है. परीक्षा में नकल और अन्य अनियमितताओं को पूरी तरह रोकने के लिए इलेक्ट्रॉनिक्स कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (ईसीआईएल) और भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (बीईएल) के सहयोग से 51,311 जैमर लगाए गए हैं. स्टाफ की तैनाती के मामले में भी अभूतपूर्व प्रबंध किए गए हैं, जिसके तहत प्रत्येक कक्ष में दो इनविजिलेटर मौजूद रहेंगे. 

इसके अतिरिक्त 38,795 फ्रिस्किंग स्टाफ, 48,448 बायोमेट्रिक कर्मी, लगभग 6,700 ऑब्जर्वर और 100 से अधिक वर्चुअल ऑब्जर्वर तैनात किए गए हैं और इस बार फेस ऑथेंटिकेशन प्रणाली को भी शामिल किया गया है. गोपनीय परीक्षा सामग्री की सुरक्षा के लिए पुलिस, अर्धसैनिक बलों, भारतीय वायु सेना और डाक विभाग की सेवाएं ली गई हैं और 20 जून को देशव्यापी मॉक ड्रिल कर सभी व्यवस्थाओं को बारीकी से परखा गया था. अभ्यर्थियों की सुविधा के लिए केंद्रों पर पेयजल, ओआरएस, एम्बुलेंस, दीवार घड़ी, अतिरिक्त रफ शीट और अभिभावकों के बैठने के लिए छायादार स्थानों की पर्याप्त व्यवस्था की गई है.

नागपुर की जगह छात्र को कैसे मिल गया अबू धाबी सेंटर?

इन पुख्ता इंतजामों के बीच, परीक्षा से ठीक पहले नागपुर के छात्र अब्दुल्लाह का परीक्षा केंद्र आवंटित होने का मामला भारी चर्चा और विवाद का विषय बन गया था. छात्र ने आवेदन के दौरान परीक्षा केंद्र के लिए नागपुर, वर्धा और भंडारा को अपनी प्राथमिकताओं में चुना था, लेकिन इसके बावजूद उसे संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) का 'अबू धाबी' केंद्र आवंटित कर दिया गया. 

अबू धाबी सेंटर दिया नहीं, लिया गया!

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इस मामले के तूल पकड़ने पर एनटीए ने वेब-एक्टिविटी रिकॉर्ड का हवाला देते हुए बताया कि करेक्शन विंडो के खुले रहने के दौरान उम्मीदवार के अपने रजिस्टर्ड लॉगिन के माध्यम से ही क्रेडेंशियल्स का उपयोग करके तीन मौकों पर केंद्र बदलकर अबू धाबी किया गया था. एनटीए ने यह भी स्पष्ट किया कि सुधार सुविधा का उपयोग करने वाले लगभग 3.2 लाख उम्मीदवारों में से 99.5 प्रतिशत से अधिक को उनकी पसंद का ही शहर आवंटित किया गया है. 

NTA की आई पूरे मामले में सफाई!

इसके बावजूद, एजेंसी की यह स्पष्ट प्राथमिकता थी कि कोई भी छात्र किसी प्रशासनिक संदेह के कारण परीक्षा देने से वंचित न रहे. इसलिए, 19 जून की शाम यानी परीक्षा से ठीक 48 घंटे पहले केंद्र बदलने का एक अनौपचारिक अनुरोध प्राप्त होने पर भी एनटीए कर्मचारियों ने तुरंत कार्रवाई की और छात्र के पिता से संपर्क करके केंद्र को संशोधित कर नागपुर के 'पीएम श्री केन्द्रीय विद्यालय अजनी' में आवंटित कर दिया. 

हालांकि, छात्र के पिता मोहम्मद तालिब ने एनटीए के इस दावे को सिरे से खारिज कर दिया कि उन्होंने स्वयं अबू धाबी का विकल्प चुना था. उन्होंने केंद्र आवंटन में हुई इस कथित गड़बड़ी को लेकर एनटीए की कार्यप्रणाली पर कड़े सवाल उठाते हुए कहा कि इसके कारण उनके बेटे को गंभीर मानसिक तनाव का सामना करना पड़ा है और वह परीक्षा देने से भी हिचकिचा रहा था. नागपुर में ही केंद्र मिल जाने पर उन्होंने सभी सहयोगियों का आभार जताते हुए राहत की सांस ली और कहा कि एनटीए के आरोपों पर वे भविष्य में अपनी प्रतिक्रिया जरूर देंगे.

क्या विदेश में भी होती है NEET की परीक्षा?

अबू धाबी केंद्र के इस पूरे विवाद से कई लोगों में यह उत्सुकता भी जगी कि क्या नीट की परीक्षा भारत के बाहर भी होती है. दरअसल, यह परीक्षा केवल भारत में ही नहीं बल्कि विदेशों के 14 प्रमुख केंद्रों पर भी आयोजित की जाती है. इन विदेशी केंद्रों में मुख्य रूप से खाड़ी देश जैसे दुबई, अबू धाबी, शारजाह, रियाद, दोहा, मस्कट, कुवैत सिटी और मनामा शामिल हैं. इसके अतिरिक्त सिंगापुर, कुआलालंपुर, बैंकॉक, काठमांडू, कोलंबो और लागोस में भी इसके परीक्षा केंद्र बनाए जाते हैं. 

पेपर लीक या पर्चा आउट होने की किसी भी संभावना को पूरी तरह से समाप्त करने के लिए इन सभी विदेशी केंद्रों पर परीक्षा भारतीय समयानुसार एक साथ ही (सिंक्रोनाइज़्ड तरीके से) आयोजित होती है और छात्रों के पास फॉर्म भरते समय इन विदेशी केंद्रों को चुनने का स्पष्ट विकल्प रहता है. कुल मिलाकर तमाम प्रशासनिक और तकनीकी सुधारों के साथ री-एग्जाम सुचारू रूप से शुरू हो चुका है.

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अंत में, एनटीए ने छात्रों व अभिभावकों से सोशल मीडिया पर फैल रही पेपर लीक और अन्य अफवाहों को पूरी तरह निराधार बताते हुए केवल आधिकारिक सूचनाओं पर ही भरोसा करने की अपील की है, साथ ही सभी अभ्यर्थियों को पूरे आत्मविश्वास के साथ परीक्षा देने का संदेश व शुभकामनाएं दी हैं.

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