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पंजाब यूनिवर्सिटी में लहराया भगवा, छात्र संघ चुनाव में ABVP की ऐतिहासिक जीत, जानें कैसे हुआ कमाल

ABVP ने पंजाब यूनिवर्सिटी में इतिहास रच दिया है. एबीवीपी चार-कोणीय मुकाबले में बड़ी जीत दर्ज की है. अंकित बिधान क़रीब 500 से अधिक वोटों के अंतर से मुकाबला जीतकर प्रेसिडेंट बन गए हैं.

Image Source: VIDEOGRAB/ @ABVPVoice
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अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) के उम्मीदवार अंकित बिधान ने सोमवार को पंजाब विश्वविद्यालय छात्र परिषद (पीयूसीएससी) चुनाव में अध्यक्ष पद पर जीत दर्ज की. चार-कोणीय मुकाबले में उन्होंने 500 से अधिक वोटों के अंतर से जीत हासिल की. अंकित बिधान ने इस जीत को पूरी जेन-जी की जीत बताया. 

वोटिंग से एक दिन पहले, शिरोमणि अकाली दल (एसएडी) के स्टूडेंट विंग, स्टूडेंट ऑर्गनाइजेशन ऑफ इंडिया (एसओआई) ने एबीवीपी को अपना समर्थन दिया. पंजाब यूनिवर्सिटी के इतिहास में पहली बार एबीवीपी ने लगातार दूसरी बार स्टूडेंट काउंसिल चुनाव में टॉप पोस्ट जीती.

पीयूडीएफ के अरमान सिंह भिंडर ने वाइस-प्रेसिडेंट का पद जीता, जबकि निर्दलीय उम्मीदवार ध्यान सिंह और विशाल बामल ने क्रमशः सेक्रेटरी और जॉइंट सेक्रेटरी के पद जीते. चुनाव में कुल 16 उम्मीदवार मैदान में थे.

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टॉप पोस्ट के लिए मुकाबला कांग्रेस के स्टूडेंट विंग एनएसयूआई के गुरमन सिंह सिद्धू, 'आप' समर्थित एएसएपी के आदिल बीर सिंह, और 'साथ' के अंकित बिधान और दर्शप्रीत सिंह के बीच था.

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टॉप पोस्ट पर जीत पर प्रतिक्रिया देते हुए सीनियर भाजपा नेता बी. एल. संतोष ने 'एक्स' पर लिखा, "एबीवीपी के अंकित बिधान ने पंजाब यूनिवर्सिटी स्टूडेंट यूनियन प्रेसिडेंट का चुनाव शानदार ढंग से जीता. यह लगातार दूसरी बार है. पिछले 48 घंटों में एसओआई ने भी एबीवीपी उम्मीदवार का समर्थन किया. इस शानदार जीत के लिए अंकित बिधान और एबीवीपी को बधाई." बिधान ने कहा, "यह सिर्फ मेरी जीत नहीं, बल्कि पूरी जेन जी की जीत है." नतीजों से पता चलता है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और एबीवीपी युवा पीढ़ी के दिलों में जगह रखते हैं.

लगभग 16,500 छात्र वोट डालने के लिए योग्य थे, जिनमें 9,000 महिला वोटर और एक ट्रांसजेंडर वोटर शामिल थे. पिछले साल की तुलना में वोटरों की संख्या में 344 की बढ़ोतरी हुई.

अभिराज सिंह ने जीजीडीएसडी कॉलेज, सेक्टर 32 में प्रेसिडेंट का पद जीता, जबकि परमिंदर सिंह ने पोस्ट ग्रेजुएट गवर्नमेंट कॉलेज, सेक्टर 46 में प्रेसिडेंट का पद जीता.

वोटिंग के दौरान छात्रों ने विरोध किया और दावा किया कि उन्हें वोट डालने के लिए पर्याप्त समय नहीं मिला. एक पोलिंग स्टेशन पर छात्रों और पुलिसकर्मियों के बीच हाथापाई की खबरें भी आईं.

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पंजाब यूनिवर्सिटी एबीवीपी के निवर्तमान प्रेसिडेंट गौरव वीर सिंह सोहल ने कहा कि संगठन ने अधिकारियों से वोटिंग का समय बढ़ाने की मांग की थी. उन्होंने कहा कि लंबे वीकेंड के कारण वोटर टर्नआउट कम रहने की उम्मीद थी.


PU में ABVP की जीत पर अमित शाह और पीयूष गोयल ने दी बधाई 

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पंजाब यूनिवर्सिटी छात्रसंघ चुनाव में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) ने लगातार दूसरी बार शानदार जीत दर्ज की. इस जीत पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने परिषद के कार्यकर्ताओं को बधाई दी है.


अमित शाह ने 'एक्स' पर लिखा, "पंजाब यूनिवर्सिटी छात्रसंघ चुनाव में एबीवीपी की शानदार जीत पर परिषद के सभी कार्यकर्ताओं को हार्दिक बधाई. लगातार दूसरी बार मिली यह जीत युवा शक्ति के राष्ट्र प्रथम की विचारधारा पर अटूट विश्वास का प्रमाण है. मुझे पूर्ण विश्वास है कि परिषद के कार्यकर्ता स्वामी विवेकानंद के आदर्शों पर चलते हुए छात्रहित के लिए निरंतर संकल्पित भाव से कार्य करते रहेंगे."

वहीं, केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने भी 'एक्स' पर बधाई देते हुए कहा, "पंजाब यूनिवर्सिटी छात्रसंघ चुनाव में एबीवीपी की लगातार दूसरी जीत पर परिषद के सभी कार्यकर्ताओं को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं. यह जीत केवल एक चुनावी सफलता नहीं बल्कि विश्वविद्यालय के युवाओं के विश्वास और परिषद के कार्यकर्ताओं की वर्षों की मेहनत, प्रतिबद्धता और छात्रहित के प्रति समर्पण की जीत है."

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पीयूष गोयल ने लिखा, "स्वामी विवेकानंद के विचारों से प्रेरित होकर एबीवीपी पंजाब के कार्यकर्ता इसी ऊर्जा के साथ विद्यार्थियों की आवाज बनें और छात्रहित के लिए निरंतर सक्रिय रहते हुए विश्वविद्यालय के विकास में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएं."

बता दें कि अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) भारत और दुनिया का सबसे बड़ा छात्र संगठन है. इसकी स्थापना 9 जुलाई 1949 को हुई थी. इसके संस्थापक बलराज मधोक थे और मुख्य कार्यवाहक प्रो. यशवंतराव केलकर थे.

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इस संगठन का ध्येय वाक्य 'ज्ञान, शील और एकता' है. संगठन का मुख्य उद्देश्य राष्ट्रीय पुनर्निर्माण है. यह छात्रशक्ति को राष्ट्रशक्ति मानकर देश के विकास में युवाओं की भागीदारी सुनिश्चित करता है. पंजाब यूनिवर्सिटी में लगातार दूसरी जीत को इसी विचारधारा पर युवाओं के भरोसे के तौर पर देखा जा रहा है.

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