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‘परशुराम’ के अवतार में राहुल गांधी, एक हाथ में फरसा तो दूसरे में संविधान, कांग्रेस को क्यों आई ‘ब्राह्मणों’ की याद?

सियासत में हर छोटी बात का बड़ा मतलब होता है, हर कदम एक रणनीतिक चाल होती है और राहुल गांधी के जन्मदिन पर लगा एक पोस्टर कांग्रेस की नई रणनीति की ओर बड़ा इशारा कर रहा है.

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19 Jun 2026
( Updated: 19 Jun 2026
11:57 AM )
‘परशुराम’ के अवतार में राहुल गांधी, एक हाथ में फरसा तो दूसरे में संविधान, कांग्रेस को क्यों आई ‘ब्राह्मणों’ की याद?
Image Source- Screengrab/IANS Video
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एक हाथ में फरसा, दूसरे हाथ में संविधान की किताब और परशुराम की वेशभूषा… ये किसी साधु महात्मा की बात नहीं हो रही है. ये एक तस्वीर की बात हो रही है जो कांग्रेस सांसद राहुल गांधी की है. उनके 56वें जन्मदिन पर कार्यकर्ताओं ने वाराणसी में उनका एक खास पोस्टर बनाया. जिसमें उनको भगवान परशुराम जैसा रूप दिया है. कहने को तो यह महज एक पोस्टर है लेकिन सियासत में हर प्रतीक हर पोस्टर में एक बड़ा संदेश छिपा होता है. 

वाराणसी में यूथ कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने राहुल गांधी का जन्मदिन मनाया. राहुल के पोस्टर पर दूध और गंगाजल चढ़ाया. पोस्टर में राहुल के परशुराम अवतार की चर्चा मीडिया जगत में ही नहीं सियासी हलकों में भी होने लगी. 

दरअसल, राहुल के इस पोस्टर के पीछे मिशन 2027 की दूरगामी सोच बताई जा रही है. भले ही पोस्टर कार्यकर्ताओं ने बनवाया हो, लेकिन मैसेज आलाकमान की ओर से दिया जा रहा है और टारगेट UP के ब्राह्मण वोटर्स हैं. इस पोस्टर के जरिए कांग्रेस ब्राह्मण वोटर्स को साधने निकली है, क्योंकि भगवान परशुराम ब्राह्मण समाज से जुड़े हुए हैं. 

ब्राह्मणों को साधने के लिए कांग्रेस का सॉफ्ट दांव!

अल्पसंख्यक और दलित पिछड़े वर्गों के उदय का राग अलाप रही कांग्रेस भी भलि भांति जानती है कि वह बहुसंख्यकों को साधे बिना काम नहीं चलेगा. 

वहीं, राहुल गांधी के पोस्टर में संविधान की किताब के साथ दिखाकर कांग्रेस संविधान की रक्षा और न्याय का संदेश भी दे रही है. इसी नीति को अपनाते हुए कांग्रेस ने लोकसभा 2024 के चुनावों में अपनी इमेज चमकाई और सीटों में अच्छी खासी बढ़ोतरी की, लेकिन इस पोस्टर के जरिए कांग्रेस संदेश देना चाह रही है कि वह सनातनी मूल्यों के साथ संवैधानिक समानता में यकीन रखती है. 

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पार्टी सॉफ्ट हिंदुत्व की छवि बनाने की कोशिश कर रही है, क्योंकि BJP की कट्टर हिंदुत्व की छवि के आगे बिना कार्ड खेले उसका काम नहीं चलेगा. 

भले ही राहुल गांधी के साथी और पार्टी के लोग ही ब्राह्मण, सनातन और हिंदुत्व पर नफरती बयानबाजी करें, लेकिन राहुल गांधी ने पिछले कुछ साल में खुदको कट्टर हिंदू साबित करने की कोशिश की. चाहें वह केदारनाथ-महाकाल की यात्राएं हों या खुद को 'जनेऊधारी हिंदू' बताना. समय-समय पर राहुल मंदिर भी जाते रहे हैं. 

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जनरल वर्ग के जो वोटर्स कांग्रेस के लिए कट्टर थे उन्होंने भी अब साथ छोड़ दिया, ऐसे में कांग्रेस को फिर से दिल में जगह बनाने के लिए कई पापड़ बेलने पड़ रहे हैं. ऐसे में कांग्रेस को परशुराम से लेकर महादेव तक सब याद आ रहे हैं. 

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