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‘नफरत नहीं, साहस जीतता है...’, प्रियंका गांधी ने पश्चिमी देशों को घेरा, ईरानी लोगों की एकजुटता को बताया मिसाल

मिडिल ईस्ट तनाव के बीच प्रियंका गांधी ने पश्चिमी देशों पर निशाना साधा और ईरानी जनता के साहस की सराहना की. वहीं डोनाल्ड ट्रंप के कड़े बयान के बाद हालात बिगड़े, लेकिन बाद में अमेरिका-ईरान के बीच दो हफ्ते का सीजफायर हो गया.

Priyanka Gandhi (File Photo)
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मिडिल ईस्ट में चल रही जंग और तनाव की स्थिति के बीच भारत में सियासी बयानबाज़ी तेज हो गई है. कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी (Priyanka Gandhi) ने ईरान-अमेरिका तनाव के बीच पश्चिमी देशों पर तीखा हमला बोला है. उन्होंने जहां एक ओर ईरान के आम लोगों के साहस की सराहना की, वहीं दूसरी ओर पश्चिमी ताकतों की भाषा और रवैये को कठघरे में खड़ा किया. उनके इस बयान ने न सिर्फ भारत में, बल्कि वैश्विक राजनीति में भी बहस छेड़ दी है.

ट्रंप के बयान से बढ़ा तनाव

दरअसल, इस पूरे घटनाक्रम की शुरुआत अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) के उस बयान से हुई, जिसमें उन्होंने ईरान की पूरी सभ्यता को तबाह करने की चेतावनी दी थी. उन्होंने इसके लिए एक समयसीमा भी तय कर दी थी. इस बयान के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हलचल मच गई और मिडिल ईस्ट में तनाव चरम पर पहुंच गया. हालांकि बाद में हालात ने अचानक करवट ली और दोनों देशों के बीच दो हफ्ते के सीजफायर पर सहमति बन गई.

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सड़कों पर उतरे ईरानी नागरिक

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ट्रंप की धमकी के बाद ईरान में एक अलग ही तस्वीर देखने को मिली. आम नागरिक अपने देश के अहम संसाधनों को बचाने के लिए सड़कों पर उतर आए. पावर प्लांट्स और अन्य महत्वपूर्ण ठिकानों के आसपास लोगों ने मानव श्रृंखला बनाई. यह नजारा सिर्फ विरोध नहीं, बल्कि अपने देश के प्रति जिम्मेदारी और एकजुटता का प्रतीक बन गया. सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में लोग एक साथ खड़े नजर आए, जो यह दिखाता है कि संकट के समय समाज किस तरह एकजुट हो सकता है.

पश्चिम की नैतिकता पर सवाल

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प्रियंका गांधी ने इस पूरे घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि दुनिया अब सब कुछ देख रही है. उनके मुताबिक, पश्चिमी देशों की तथाकथित नैतिकता अब सवालों के घेरे में है. उन्होंने कहा कि एक ओर जहां ‘सभ्यता के अंत’ जैसी भाषा का इस्तेमाल किया जा रहा था, वहीं दूसरी ओर ईरान के लोग शांति और साहस का उदाहरण पेश कर रहे थे. उन्होंने यह भी कहा कि यह समय सच्चाई को समझने और न्याय के साथ खड़े होने का है. उनके बयान में साफ झलकता है कि वे इस मुद्दे को केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि मानवीय नजरिए से देख रही हैं.

साहस हमेशा जीतता है: प्रियंका गांधी 

अपने सोशल मीडिया पोस्ट में प्रियंका गांधी ने साफ शब्दों में कहा कि नफरत, गुस्सा और हिंसा कभी स्थायी जीत हासिल नहीं कर सकते. उन्होंने ईरान के लोगों की सराहना करते हुए कहा कि उनका साहस दुनिया के लिए एक संदेश है. यह बयान उन परिस्थितियों में आया, जब वैश्विक स्तर पर तनाव और युद्ध की आशंका बढ़ रही थी.

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सीजफायर से मिली राहत

इस बीच राहत की खबर यह रही कि अमेरिका और ईरान के बीच दो हफ्तों के लिए सीजफायर पर सहमति बन गई. यह फैसला आखिरी समय में लिया गया, जब हालात बेहद तनावपूर्ण हो चुके थे. इस कदम से न केवल ईरान, बल्कि पूरे मिडिल ईस्ट को राहत मिली है. इजरायल, अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते टकराव ने क्षेत्र में अस्थिरता बढ़ा दी थी, लेकिन अब बातचीत की उम्मीद जगी है.

राहुल गांधी की प्रतिक्रिया

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कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने भी इस मुद्दे पर अपनी राय रखी. उन्होंने ट्रंप की ‘सभ्यता खत्म करने’ वाली भाषा को अस्वीकार्य बताया. उनके मुताबिक, आधुनिक दुनिया में इस तरह की सोच के लिए कोई जगह नहीं होनी चाहिए. उन्होंने यह भी कहा कि परमाणु हथियारों का इस्तेमाल किसी भी परिस्थिति में सही नहीं ठहराया जा सकता.

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बहरहाल, ईरान और अमेरिका की बीच दो हफ्ते के सीजफायर ने थोड़ी राहत जरूर दी है, लेकिन असली चुनौती अब बातचीत को सफल बनाने की है. आने वाले दिनों में यह साफ होगा कि क्या यह अस्थायी शांति स्थायी समाधान का रास्ता बन पाती है या नहीं.

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