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दिल्ली में विपक्ष की महारैली से पहले सियासी ट्विस्ट! CJP की एंट्री पर खरगे ने कह दी चौंकाने वाली बात, दिपके भी रह गए खामोश
दिल्ली के रामलीला मैदान में 1 नवंबर को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और SIR के विरोध में INDIA गठबंधन की बड़ी रैली प्रस्तावित है. इसमें CJP के शामिल होने को लेकर सस्पेंस बना हुआ है. पार्टी संस्थापक अभिजीत दिपके ने रैली का समर्थन किया है, लेकिन कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने CJP के शामिल होने से इनकार किया है.
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देश की राजधानी दिल्ली में इन दिनों सियासी गतिविधियां तेज हो गई हैं. मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर विपक्षी दलों ने सरकार और चुनाव आयोग के खिलाफ मोर्चा खोल रखा है. इसी कड़ी में कांग्रेस के नेतृत्व वाले INDIA गठबंधन ने 1 नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में बड़ी रैली आयोजित करने की तैयारी की है. इस रैली को लेकर अब कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) की भागीदारी चर्चा का विषय बन गई है. दिपके ने रैली का समर्थन किया है, लेकिन कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने CJP के शामिल होने से इनकार किया है.
दरअसल, CJP के संस्थापक अभिजीत दिपके ने सोशल मीडिया पर INDIA गठबंधन की प्रस्तावित रैली का समर्थन किया था. इसके बाद कांग्रेस और CJP के बीच संपर्क होने की खबरें सामने आईं. कांग्रेस के कुछ वरिष्ठ नेताओं के मुताबिक, CJP को रैली में आमंत्रित किए जाने की संभावना भी जताई गई थी. हालांकि, पार्टी की ओर से अभी तक रैली में शामिल होने को लेकर अंतिम निर्णय की पुष्टि नहीं हुई है.
CJP की एंट्री पर खरगे ने क्या कहा?
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इस पूरे घटनाक्रम के बीच कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे का बयान काफी अहम माना जा रहा है. हिंदुस्तान की एक रिपोर्ट के मुताबिक, बेंगलुरु में जब उनसे पूछा गया कि क्या CJP भी 1 नवंबर की रैली में शामिल होगी, तो उन्होंने साफ तौर पर इससे इनकार कर दिया. दूसरी तरफ, CJP के प्रवक्ता ने कहा कि रैली में भाग लेने को लेकर अभी फैसला नहीं लिया गया है. CJP के समर्थन और खरगे के बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में इस मुद्दे पर चर्चा तेज हो गई है. हालांकि, कांग्रेस की रणनीति या किसी दल को सुर्खियों में आने से रोकने के इरादे को लेकर कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है. ऐसे में फिलहाल यह देखना दिलचस्प होगा कि रैली के दिन CJP की भूमिका क्या रहती है.
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ज्ञानेश कुमार के खिलाफ होगी प्रतीकात्मक महाभियोग की कार्यवाही
रैली से पहले विपक्षी दलों ने 30 अक्टूबर को एक और अहम कार्यक्रम की तैयारी की है. इसमें मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रतीकात्मक 'जन महाभियोग' की कार्यवाही आयोजित की जाएगी. इसके लिए पूर्व लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार को अध्यक्षता की जिम्मेदारी सौंपी गई है. कार्यक्रम में लोकसभा और राज्यसभा के विपक्षी नेताओं के शामिल होने की बात कही गई है. इस प्रतीकात्मक कार्यवाही में राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे प्रस्ताव पेश करेंगे. इसके बाद INDIA गठबंधन के नेता अपनी बात रखेंगे. लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी बहस का समापन करेंगे. अंत में प्रस्ताव पर मतदान कराया जाएगा. इस दौरान नागरिक समाज के कुछ प्रतिनिधियों और SIR से प्रभावित लोगों को भी अपनी बात रखने का मौका दिया जाएगा. जानकारी देते चलें कि यह संसद की आधिकारिक महाभियोग प्रक्रिया नहीं, बल्कि विपक्ष की ओर से आयोजित एक प्रतीकात्मक राजनीतिक कार्यवाही है.
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रामलीला मैदान की जगह खरगे के आवास पर होगा कार्यक्रम
विपक्ष की योजना पहले इस कार्यक्रम को अशोक होटल या रामलीला मैदान में आयोजित करने की थी. हालांकि, आयोजन के लिए अनुमति नहीं मिलने के बाद कांग्रेस ने इसे पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के आवास पर आयोजित करने का फैसला किया. कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने भी इस संबंध में जानकारी दी है.
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1 नवंबर की रैली पर टिकी निगाहें
अब विपक्षी दलों का अगला बड़ा लक्ष्य 1 नवंबर को रामलीला मैदान में होने वाली महारैली है. इस आयोजन के जरिए कांग्रेस और INDIA गठबंधन चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली, SIR और मतदाता अधिकारों से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाने की तैयारी में हैं. राहुल गांधी समेत कई विपक्षी नेताओं ने इस रैली में अधिक से अधिक लोगों से पहुंचने की अपील की है.
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बताते चलें कि ऐसे में दिल्ली की यह रैली केवल एक विरोध प्रदर्शन तक सीमित नहीं रहने वाली, बल्कि चुनाव आयोग और मतदाता सूची से जुड़े विवादों पर विपक्ष की एकजुटता दिखाने का बड़ा मंच बन सकती है. अब सबकी नजर इस बात पर रहेगी कि रैली में कौन-कौन से दल और नेता शामिल होते हैं और CJP अपनी ओर से क्या रुख अपनाती है.