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खड़गे की ‘जुबान’ पर छिड़ा सियासी संग्राम- BJP ने चुनाव आयोग से की शिकायत, आचार संहिता के उल्लंघन का हवा दे कार्रवाई की मांग

भाजपा ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के हालिया बयान को आचार संहिता का उल्लंघन बताते हुए चुनाव आयोग में शिकायत दर्ज कराई है और उन पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है

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असम में विधानसभा चुनाव के प्रचार के दौरान कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे द्वारा दिए गए बयानों को लेकर चुनाव आयोग में औपचारिक शिकायत दर्ज कराई गई. भाजपा ने शिकायत में आरोप लगाया कि खड़गे ने मुस्लिम मतदाताओं को संबोधित करते हुए सांप्रदायिक नफरत भड़काने वाले और भड़काऊ बयान दिए, जिसमें उन्होंने संघ और भाजपा की तुलना 'जहरीले सांप' से की.

भाजपा ने चुनाव आयोग से शिकायत में क्या कहा?

भाजपा ने मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्तों को लिखे पत्र में कहा कि यह बयान आदर्श आचार संहिता ( MCC) का उल्लंघन है और भारतीय न्याय संहिता (BNS) की कई धाराओं के अंतर्गत दंडनीय अपराध है. असम विधानसभा चुनाव के लिए 9 अप्रैल को यानी आज ही के दिन वोट डाले जा रहे हैं और मतगणना 4 मई को होगी. ऐसे में चुनाव से महज एक दिन पहले दिए गए इस बयान को सांप्रदायिक शांति के लिए खतरा बताया गया है.

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मल्लिकार्जुन खड़गे ने क्या बयान दिया था?

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रैली में खड़गे ने कहा था, "अगर आप नमाज पढ़ रहे हैं और जहरीला सांप आ जाए तो नमाज छोड़कर उसे मार डालो; यह कुरान में कहा गया है”. शिकायत में उनके बयान को सांप्रदायिक उकसावा बताया गया. धार्मिक ग्रंथ का राजनीतिक हथियार बनाना, विरोधी दल को हिंसा का निशाना बताना, और मुस्लिम मतदाताओं की धार्मिक भावनाओं का चुनावी फायदे के लिए दुरुपयोग का आरोप लगाया गया.

पहले भी कथित विवादित बयान दे चुके हैं खड़गे

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शिकायत में उल्लेख किया गया कि खड़गे ने इसी तरह के बयान महाराष्ट्र (2024) और कर्नाटक (2023) चुनावों में भी दिए थे, जिससे सांप्रदायिक उत्तेजना का पैटर्न साबित होता है. शिकायत में एमसीसी के पैरा 3 के विभिन्न प्रावधानों का हवाला दिया गया है, जिसमें धर्म के नाम पर अपील, सांप्रदायिक तनाव बढ़ाना और अलग-अलग समुदायों के बीच दुश्मनी फैलाने पर रोक है. साथ ही बीएनएस की धारा 196 (धार्मिक समूहों के बीच शत्रुता भड़काना), 197, 302 (धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाना), 353, 192, 152 (राष्ट्रीय एकता को खतरा) और 189 के तहत अपराध दर्ज करने की मांग की गई है.

कई धाराओं के तहत कार्रवाई की मांग

लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 123(3) और 123(3ए) के तहत इसे 'भ्रष्ट आचरण' बताया गया है, जो चुनाव रद्द होने का आधार बन सकता है. धार्मिक संस्थाओं के दुरुपयोग निवारण अधिनियम 1988 और आईटी एक्ट के प्रावधानों का भी उल्लंघन माना गया है.

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कारण बताओ नोटिस जारी करने की मांग

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शिकायतकर्ताओं ने चुनाव आयोग से अनुरोध किया कि कांग्रेस और खड़गे को तुरंत कारण बताओ नोटिस जारी किया जाए, विवादित बयान वापस लिया जाए और सार्वजनिक माफी मांगी जाए. साथ ही खड़गे और कांग्रेस पर प्रचार प्रतिबंध लगाया जाए. असम पुलिस और मुख्य निर्वाचन अधिकारी को निर्देश दिए जाएं कि बीएनएस और आरपी एक्ट के तहत एफआईआर दर्ज की जाए. सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म से वीडियो क्लिप हटाई जाएं.

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