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खामेनेई के अंतिम संस्कार में शामिल नहीं होंगे PM मोदी, दो हाई लेवल गेस्ट भेजेगा भारत, जानें कौन करेगा प्रतिनिधित्व

ईरान के दिवंगत पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की तदफीन में शामिल होने को लेकर बड़ी ख़बर सामने आ रही है. विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट कर दिया है कि PM मोदी ईरान नहीं जाएंगे, बल्कि सरकार ने दो उच्च स्तरीय डेलिगेशन को तेहरान भेजने का फैसला किया है.

PM Modi will not Attend Khamenei Tadfin/ Image Source: IANS
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ईरान के दिवंगत सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह खामेनेई के तदफीन यानी अंतिम संस्कार की तैयारियां पूरी हो चुकी हैं. 4 जुलाई से 9 जुलाई के बीच रस्म अदायगी होगी. स्थानीय मीडिया के अनुसार, अपने नेता को आखिरी विदाई देने से पहले तेहरान के ग्रैंड मोसल्ला परिसर में अंतिम तैयारियां पूरी कर ली गई हैं. इसी परिसर में देश-विदेश से आने वाले लोगों और प्रतिनिधिमंडलों की मौजूदगी में खामेनेई को श्रद्धांजलि दी जाएगी.

खामेनेई के अंतिम संस्कार में शामिल नहीं होंगे पीएम मोदी!

इसी बीच बड़ी ख़बर सामने आ रही है कि प्रधानमंत्री मोदी स्वयं खामेनेई के अंतिम संस्कार कार्यक्रम में शामिल नहीं होंगे. भारत के विदेश मंत्रालय की ओर से जारी बयान के मुताबिक बिहार के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) सैयद अता हसनैन और विदेश राज्य मंत्री पबित्रा मार्गेरिटा 3 जुलाई को ईरान रवाना होंगे. दोनों नेता ईरान के दिवंगत सर्वोच्च नेता ग्रैंड अयातुल्ला सैयद अली खामेनेई के अंतिम संस्कार में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे.

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भारत की ओर से कौन होगा खामेनेई के तदफीन में शामिल?

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विदेश मंत्रालय की ओर से जारी बयान के अनुसार, दोनों नेता 3 जुलाई को इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान पहुंचेंगे और जनाजे में शामिल होंगे. मंत्रालय ने कहा कि इस उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल की उपस्थिति भारत और ईरान के बीच लंबे समय से चले आ रहे सभ्यतागत संबंधों और दोनों देशों के लोगों के बीच गहरे संपर्क को दर्शाती है. यही संबंध दोनों देशों के राजनीतिक और आर्थिक सहयोग की मजबूत नींव भी हैं.

भारत की ओर से जैन मुनि भी होंगे खामेनेई के अंतिम संस्कार में शामिल!

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भारत और ईरान के बीच ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और आर्थिक रिश्ते लंबे समय से रहे हैं. भारत के विभिन्न राजनीतिक दलों को ईरान ने इस कार्यक्रम में शामिल होने का निमंत्रण दिया है. पीडीपी की महबूबा मुफ्ती भी इसमें हिस्सा लेने के लिए ईरान रवाना हो गई हैं. उनके अलावा जैन मुनि लोकेश को भी न्योता गया है, और उन्होंने अमेरिका से सीधे तेहरान पहुंचने की बात कही है.

इसी बीच न्यूज एजेंसी तसनीम ने राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन का संदेश जारी किया. इसमें उन्होंने कहा, "खामेनेई की मौत ने साबित किया है कि ईरान की व्यवस्था आस्था, आदर्शों और देश की जनता की मजबूत इच्छाशक्ति पर टिकी हुई है." उन्होंने सभी ईरानियों से, चाहे उनका जातीय, धार्मिक या राजनीतिक मतभेद से परे हो जनाजे में शामिल होने की अपील की. उन्होंने कहा कि दुनिया के सामने ईरान की एकजुटता दिखाना जरूरी है.

एक साथ रखे गए खामेनेई के परिवार पांच सदस्यों के ताबूत!

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आपको बता दें कि ईरानी प्रसारक प्रेस टीवी के अनुसार, ईरान में पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्ला सैयद अली खामेनेई के परिवार के पांच सदस्यों के ताबूत एक साथ रखे गए. इनमें खामेनेई, उनकी बेटी, बहू, पोते और दामाद के ताबूत शामिल हैं.

इन सभी का अंतिम संस्कार खामेनेई के राजकीय कार्यक्रम के तहत किया जाएगा. ईरान में जनाजे या तजफीन की रस्में कई दिनों तक चलेंगी, जिनमें देश-विदेश से बड़ी संख्या में लोगों और प्रतिनिधिमंडलों के शामिल होने का अनुमान है.

जहां तक भारत की ओर से भी नुमाइंदगी पेश करने की बात है तो भारत से बिहार के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) सैयद अता हसनैन और विदेश राज्य मंत्री पबित्रा मार्गेरिटा तो इस कार्यक्रम में शामिल होंगे ही. वहीं, पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती भी इसमें शिरकत करेंगी. ईरान भाजपा, कांग्रेस और पीडीपी के नेताओं के अलावा जैन संत आचार्य लोकेश मुनि को भी न्योता भेज चुका है.

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महबूबा मुफ्ती को भी आया ईरान की ओर से न्योता!

महबूबा मुफ्ती के ईरान जाने को लेकर पार्टी की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, महबूबा मुफ्ती को ईरान के सर्वोच्च नेता के कार्यालय के अंतरराष्ट्रीय संबंध विभाग की ओर से औपचारिक निमंत्रण भेजा गया है. निमंत्रण पत्र में कहा गया है कि 28 फरवरी 2026 को अयातुल्ला अली खामेनेई के निधन पर ईरान में राष्ट्रीय शोक घोषित किया गया है और राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई का आयोजन किया जा रहा है.

निमंत्रण में महबूबा मुफ्ती को भारत की एक विशिष्ट राजनीतिक हस्ती के रूप में समारोह में शामिल होने का आग्रह किया गया है. पत्र में कहा गया है कि उनकी उपस्थिति भारत और ईरान के बीच ऐतिहासिक मित्रता, आपसी सम्मान और दोनों प्राचीन सभ्यताओं के गहरे संबंधों का प्रतीक होगी.

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कतर में रोकी गई अमेरिका और ईरान के बीच अप्रत्यक्ष वार्ता

खामेनेई के तदफीन को देखते हुए ही कतर के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने दोहा में अमेरिका और ईरान के बीच हुई अप्रत्यक्ष वार्ता को फिलहाल रोक दिया है. कतर ने कहा कि “सकारात्मक प्रगति” दर्ज की गई जिसके बाद दोनों पक्षों ने आगे भी बातचीत जारी रखने पर सहमति जताई है.

कतर के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता माजिद अल-अंसारी ने बुधवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जानकारी देते हुए बताया कि इस वार्ता के दौरान कतर और पाकिस्तान के मध्यस्थों ने अलग-अलग बैठकों में अमेरिकी और ईरानी प्रतिनिधियों से बातचीत की. उन्होंने कहा कि चर्चा “इस्लामाबाद समझौता ज्ञापन” से जुड़े मुद्दों पर केंद्रित रही और यह बातचीत “लेक ल्युर्सन शिखर सम्मेलन” के परिणामों पर आधारित थी.

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अंसारी के अनुसार, वार्ता में शामिल सभी पक्षों ने अगले दौर की बातचीत जारी रखने पर सहमति जताई है. अगली बैठक का समय जल्द से जल्द तय किया जाएगा, जो ईरान के पूर्व सर्वोच्च नेता के अंतिम संस्कार समारोहों के बाद आयोजित की जाएगी. प्रवक्ता ने कहा कि आने वाले समय में दोनों पक्ष बातचीत जारी रखेंगे और स्थिति के अनुसार अगली बैठक की तारीख तय की जाएगी.

क्या है खामेनेई के अंतिम संस्कार का पूरा कार्यक्रम?

कार्यक्रम के अनुसार, 3 जुलाई को तेहरान स्थित इमाम खोमैनी ग्रैंड मुसल्ला परिसर में श्रद्धांजलि समारोह आयोजित किया जाएगा. 4 जुलाई को समिट कॉन्फ्रेंस हॉल में स्मृति सभा होगी, जबकि 6 जुलाई 2026 को तेहरान में अंतिम यात्रा निकाली जाएगी.

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बता दें कि ईरान पर हुए अमेरिकी-इजरायली हमले में ईरान के सर्वोच्च नेता की मौत हो गई थी, जिसके बाद उनके शव को सुरक्षित रखा गया है. अब उन्हें सुपुर्द ए खाक किया जाएगा. उनकी अंतिम विदाई में शामिल होने के लिए दुनियाभर के कई नेताओं को निमंत्रण भेजा गया है. 

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