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'एक दिन कुर्सी जानी है, तो मोह में क्यों पड़ें...', CM योगी ने 'नोएडा' का जिक्र करते हुए विपक्ष को खूब सुनाया

उत्तर प्रदेश की राजनीति में नोएडा से जुड़ा ‘अंधविश्वास’ फिर चर्चा में है. योगी आदित्यनाथ ने बताया कि उन्होंने इस धारणा को नकारते हुए नोएडा जाना चुना और इसे खत्म किया. उन्होंने कहा कि कुर्सी के डर से विकास से दूर रहना सही नहीं है.

Yogi Adityanath
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उत्तर प्रदेश की राजनीति में लंबे समय से चर्चा में रहा नोएडा का ‘अंधविश्वास’ एक बार फिर सुर्खियों में है. योगी आदित्यनाथ ने इस मुद्दे को याद करते हुए बताया कि कैसे उन्होंने इस धारणा को न सिर्फ चुनौती दी, बल्कि उसे पूरी तरह खत्म करने का काम भी किया. यह बयान ऐसे समय आया है जब प्रदेश दो दिन पहले नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट का उद्घाटन हुआ है.

दरअसल, वर्षों तक यह माना जाता रहा कि जो भी मुख्यमंत्री नोएडा जाता है, उसकी कुर्सी चली जाती है. इस अंधविश्वास के चलते कई मुख्यमंत्रियों ने अपने पूरे कार्यकाल में नोएडा जाने से परहेज किया. लेकिन जब योगी आदित्यनाथ मुख्यमंत्री बने, तो उन्होंने इस सोच को मानने से साफ इनकार कर दिया. लखनऊ के डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने अपने अनुभव साझा किए. उन्होंने बताया कि जब उन्हें कहा गया कि नोएडा मत जाइए, तो उन्होंने सीधा सवाल किया कि क्या नोएडा उत्तर प्रदेश का हिस्सा नहीं है. उन्होंने साफ कहा कि अगर 'एक दिन कुर्सी जानी ही है, तो उसके मोह में पड़ने का कोई मतलब नहीं है.'

नोएडा पहुंचकर सामने आई असली तस्वीर

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यही सोच उन्हें नोएडा तक लेकर गई. जब वे पहली बार नोएडा पहुंचे, तो उन्हें वहां की असली स्थिति का अंदाजा हुआ. हजारों नहीं, बल्कि करीब 4 लाख घर खरीदार वर्षों से अपने घर के इंतजार में थे. लोगों ने अपनी जिंदगी की पूरी कमाई बिल्डरों को दे दी थी, लेकिन उन्हें घर नहीं मिला था. कई इमारतें अधूरी खड़ी थीं और कुछ तो खंडहर में बदल चुकी थीं. सीएम योगी ने बताया कि उस समय स्थिति बेहद जटिल थी. नोएडा अथॉरिटी और ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी दोनों भारी कर्ज में डूबी हुई थीं. एक पर करीब 6 हजार करोड़ का कर्ज था, जबकि दूसरी पर 3 हजार करोड़ का. ऐसे में 4 लाख लोगों को घर दिलाना किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं था.

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समस्याओं के समाधान की हुई शुरुआत

योगी आदित्यनाथ ने कहा कि उन्होंने इस समस्या को टालने के बजाय सीधे लोगों से संवाद किया. घर खरीदारों से मिले, उनकी परेशानी सुनी. वे लोग रो रहे थे, क्योंकि एक तरफ बैंक का कर्ज चुकाना पड़ रहा था और दूसरी तरफ घर का कोई अता-पता नहीं था. दूसरी ओर बिल्डर्स भी अपनी मजबूरी बता रहे थे. उनका कहना था कि पिछली सरकारों की नीतियों के कारण वे आर्थिक रूप से कमजोर हो गए हैं. इस जटिल स्थिति में मुख्यमंत्री ने एक संतुलित रास्ता निकाला. उन्होंने बिल्डरों से साफ कहा कि चाहे जो भी हो, घर तो देना ही पड़ेगा. साथ ही सरकार की तरफ से नई नीतियां बनाई गईं, सुधार किए गए और भ्रष्टाचार पर सख्ती की गई. इसका नतीजा यह हुआ कि धीरे-धीरे परियोजनाएं फिर से पटरी पर आने लगीं.

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4 लाख घरों का सपना हुआ पूरा

आज स्थिति पूरी तरह बदल चुकी है. मुख्यमंत्री के अनुसार, करीब 4 लाख लोगों को उनका घर मिल चुका है. जो अथॉरिटी कभी कर्ज में डूबी हुई थीं, वे अब हजारों करोड़ के सरप्लस में पहुंच गई हैं. यही नहीं, नोएडा और ग्रेटर नोएडा आज देश के सबसे बड़े निवेश और आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर वाले क्षेत्रों में गिने जा रहे हैं.

विपक्ष पर कसा तंज 

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इस दौरान उन्होंने विपक्ष पर भी निशाना साधा. खासतौर पर अखिलेश यादव पर तंज कसते हुए उन्होंने कहा कि जो लोग पहले अंधविश्वास के कारण नोएडा नहीं जाते थे, वही आज विकास की बातें कर रहे हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि पिछली सरकारों के दौरान विकास कार्यों में बाधाएं डाली गईं.

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बताते चलें कि योगी आदित्यनाथ का यह बयान सिर्फ एक राजनीतिक टिप्पणी नहीं, बल्कि उस सोच को बदलने की कहानी भी है, जिसने वर्षों तक एक पूरे क्षेत्र के विकास को प्रभावित किया. नोएडा का उदाहरण यह दिखाता है कि जब नेतृत्व अंधविश्वास से ऊपर उठकर निर्णय लेता है, तो हालात किस तरह बदल सकते हैं. आज नोएडा सिर्फ एक शहर नहीं, बल्कि बदलाव और विकास की मिसाल बन चुका है. यहां का इंफ्रास्ट्रक्चर, निवेश और तेजी से बढ़ती सुविधाएं यह साबित करती हैं कि सही नीतियों और दृढ़ इच्छाशक्ति से किसी भी चुनौती को अवसर में बदला जा सकता है.

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