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मनरेगा की जगह नई ग्रामीण रोजगार नीति, अंकिता भंडारी केस पर सख्त सरकार: सीएम धामी

मुख्यमंत्री धामी ने भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस) के 79वें स्थापना दिवस पर मुख्य सेवक सदन में आयोजित कार्यक्रम में जनता को संबोधित किया.

Image Credits_IANS

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मंगलवार को राज्य की राजनीति और विकास से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर अपनी प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने मनरेगा की जगह वीबी-जी राम जी योजना लाने पर भी बात की.

मनरेगा की जगह नई ग्रामीण रोजगार नीति लाने की तैयारी

सीएम धामी ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा, "इस नए कानून का मकसद मनरेगा का नाम बदलना नहीं, बल्कि ग्रामीण रोजगार नीति की पुनर्रचना करने का प्रयास है. इसका मुख्य उद्देश्य ग्रामीण इकाइयों को मजबूत बनाना और एक ग्राम केंद्रित योजना स्थापित करना है. विकसित भारत के लक्ष्य को विकसित गांवों के माध्यम से साकार करने के लिए भारत सरकार ने ठोस कानूनी व्यवस्था की है।"

पुष्कर सिंह धामी ने कहा, यह विकास आधारित योजना है, जो ग्रामीण परिवारों को 100 दिनों के बजाय 125 दिनों का कानूनी रोजगार अधिकार देगी. यदि 15 दिनों में काम नहीं मिला तो बेरोजगारी भत्ता मिलेगा और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय होगी.धनराशि में देरी पर भरपाई और वेतन का साप्ताहिक भुगतान सुनिश्चित किया जाएगा. देरी पर मुआवजे का भी प्रावधान है.इसमें ग्राम पंचायतों और ग्राम सभाओं को असली ताकत दी गई है, जिससे स्थानीय स्तर पर निर्णय लेने की क्षमता बढ़ेगी।

अंकिता भंडारी हत्याकांड पर सरकार सख्त

अंकिता भंडारी हत्याकांड पर सीएम धामी ने इसे बहुत संवेदनशील और हृदय विदारक घटना बताया.अब वायरल हुए नए ऑडियो पर उन्होंने कहा कि इसमें कई नाम लिए गए हैं. इसकी जांच के लिए नई एसआईटी गठित की गई है.ऑडियो में शामिल लोगों से पुलिस ने बात करने की कोशिश की. सत्यता सामने आने पर हर प्रकार की जांच के लिए तैयार हैं.किसी भी दोषी को छोड़ा नहीं जाएगा, चाहे वह कोई भी हो. एक ऑडियो के आधार पर इतना बवंडर मचाया जा रहा है, लेकिन सरकार ईमानदारी से काम करती है.सबूत मिलने पर कोई नहीं बचेगा.

बीआईएस गुणवत्ता और उपभोक्ता हितों का मजबूत स्तंभ: धामी

मुख्यमंत्री धामी ने भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस) के 79वें स्थापना दिवस पर मुख्य सेवक सदन में आयोजित कार्यक्रम में जनता को संबोधित किया.

उन्होंने कहा कि बीआईएस देश में गुणवत्ता, सुरक्षा और उपभोक्ता हितों की रक्षा का सशक्त स्तंभ है.उत्तराखंड में भी मानक निर्धारण और गुणवत्ता सुनिश्चित करने के ठोस प्रयास हो रहे हैं.खाद्य पदार्थों, दवाओं, निर्माण सामग्री और उपभोक्ता उत्पादों की गुणवत्ता के लिए सघन निगरानी, आधुनिक प्रयोगशालाएं, उद्योगों को प्रोत्साहन और जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं.राज्य सरकार का संकल्प है कि हर नागरिक को सुरक्षित, मानकयुक्त और विश्वसनीय उत्पाद मिलें.

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