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'हामिद अंसारी की मंशा को समझते हैं मुसलमान, रची जा रही कोई साजिश', पूर्व उपराष्ट्रपति पर इमाम इलियासी का तीखा हमला
हामिद अंसारी की टिप्पणी को ऑल इंडिया इमाम ऑर्गनाइजेशन के प्रमुख उमर अहमद इलियास ने देश का माहौल खराब करने की साजिश बताया.
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पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी की 'हिंदू दक्षिणपंथी सांप्रदायिकता' टिप्पणी पर ऑल इंडिया इमाम ऑर्गनाइजेशन के प्रमुख इमाम उमर अहमद इलियासी ने आपत्ति जताई है. उन्होंने आरोप लगाया कि हामिद अंसारी मुसलमानों के नाम की सियासत करना चाहते हैं. साथ ही, उन्होंने अंसारी के बयान का जिक्र करते हुए कहा कि देश का माहौल खराब करने की एक बड़ी साजिश रची जा रही है.
इमाम उमर अहमद इलियासी ने समाचार एजेंसी आईएएनएस से बात करते हुए कहा,
‘मैं मुसलमानों के बारे में हामिद अंसारी के बयान की कड़ी निंदा करता हूं. हामिद अंसारी अब मुसलमानों के नाम पर राजनीति करना चाहते हैं, लेकिन जब वे बड़े-बड़े पदों पर बैठे थे, तब उन्हें मुसलमान याद नहीं आए. आज उन्हें मुसलमान याद आ रहे हैं.’
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मुसलमानों पर राजनीति का लगाया आरोप
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उमर अहमद इलियासी ने कांग्रेस पर मुसलमानों के नाम पर राजनीति करने का आरोप लगाया है. उन्होंने कहा, ‘आज जब मुसलमान उनके बारे में नहीं पूछ रहे हैं, तो उन्हें लगता है कि उन्हें मुसलमानों के नाम पर राजनीति करनी चाहिए, लेकिन मुसलमान समझदार हैं. वे इस तरह के बयानों और उनकी मंशा को समझते हैं.’
‘देश का माहौल खराब करने की साजिश’
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हामिद अंसारी की टिप्पणी को ऑल इंडिया इमाम ऑर्गनाइजेशन के प्रमुख ने देश का माहौल खराब करने की साजिश बताया. उन्होंने कहा, ‘मुझे यह देश का माहौल खराब करने की कोई साजिश नजर आती है. कोई भी मुसलमान उनके बयान से सहमत नहीं है. आज वो जिस तरह की भाषा बोल रहे हैं, उन्हें अपना नजरिया बदलना चाहिए. उनका नजरिया बदलेगा तो नजारा बदल जाएगा.’
BJP ने हामिद अंसारी की टिप्पणी पर किया पलटवार
उधर, पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी के बयान पर BJP नेताओं ने भी पलटवार किया है. मुख्तार अब्बास नकवी ने कहा, ‘अगर भारत में हिंदू बहुसंख्यक न होते, तो भारत न सेकुलर होता और न ही पंथनिरपेक्ष होता. भारत सेकुलर और पंथनिरपेक्ष देश इसलिए है, क्योंकि यहां हिंदू बहुसंख्यक हैं, जिनकी मान्यताएं और संस्कृति सहनशीलता और 'सर्वे भवन्तु सुखिनः, सर्वे सन्तु निरामय' की है.’
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अब्बास नकवी ने कहा, ‘जब बंटवारा हुआ, तो दो देश बने. एक भारत, जहां हिंदू बहुसंख्यक थे और दूसरा पाकिस्तान, जहां मुसलमान बहुसंख्यक थे. हिंदू बहुसंख्यक देश ने सेकुलरिज्म और पंथनिरपेक्ष का रास्ता चुना, जबकि मुस्लिम बहुसंख्यक देश ने इस्लामिक राष्ट्र का झंडा बुलंद किया, दोनों में बुनियादी फर्क है.’
उन्होंने यह भी कहा कि ऐसी बातें कहने वालों को यह भी समझना चाहिए कि अगर भारत हिंदू बहुसंख्यक देश न होता, यानी हिंदू आबादी वाला देश न होता, तो यह सेकुलर और पंथनिरपेक्ष देश नहीं बन पाता, तो मुस्लिम समुदाय का कोई व्यक्ति राष्ट्रपति या उपराष्ट्रपति नहीं बन पाता.
UP के मंत्री ने साधा निशाना
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उत्तर प्रदेश सरकार में राज्य मंत्री दिनेश प्रताप सिंह ने भी हामिद अंसारी को घेरा. उन्होंने कहा,
‘हामिद अंसारी पहले देश के मुसलमानों को डरा हुआ बता रहे थे और कह रहे थे कि देश में रहने से डर लगता है, लेकिन वे आज भी इसी देश में रह रहे हैं. आज उन्होंने फिर से बयान दिया है और नेहरू की टिप्पणी का हवाला दिया है. आज देश को हिंदू दक्षिणपंथी सांप्रदायिकता से खतरा नहीं है, बल्कि आप जैसे लोगों से खतरा है. आपके बयानों से देश को खतरा है.’
हामिद अंसारी ने क्या कहा था?
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दरअसल, हामिद अंसारी ने 19 सितंबर को दिल्ली स्थित इंडिया इस्लामिक कल्चरल सेंटर में आयोजित एजी नूरानी स्मृति कार्यक्रम में हिस्सा लिया था. इस दौरान उन्होंने जवाहरलाल नेहरू के उस पुराने बयान को दोहराया, जिसमें हिंदू दक्षिणपंथी सांप्रदायिकता को भारत के लिए बड़ा खतरा बताया गया था. अंसारी ने कहा था, ‘हाल के वर्षों में ऐसे रुझान और तौर-तरीके सामने आए हैं, जो नागरिक राष्ट्रवाद की स्थापित अवधारणा पर सवाल खड़े करते हैं और उसकी जगह एक नए तरह के सांस्कृतिक राष्ट्रवाद को आगे बढ़ाते हैं.’
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उन्होंने आरोप लगाया कि इन प्रवृत्तियों के जरिए धार्मिक बहुमत को चुनावी बहुमत के रूप में पेश कर राजनीतिक सत्ता पर एकाधिकार की कोशिश की जा रही है. उनके मुताबिक इससे नागरिकों के बीच उनके धर्म के आधार पर अंतर पैदा करने, असहिष्णुता को बढ़ावा देने और दूसरेपन की भावना पैदा करने का खतरा है.
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हामिद अंसारी की इस टिप्पणी के बाद सहिष्णु और असहिष्णु वाला भूत एक बार फिर बाहर आ गया. केंद्रीय मंत्रियों ने भी हामिद अंसारी की टिप्पणी की आलोचना की है.