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अयोध्या राममंदिर दान चोरी केस में बड़ा खुलासा! 39 घंटे की पूछताछ में टिन्नू यादव ने कई नामों का किया जिक्र, जांच में जुटी पुलिस

अयोध्या राममंदिर दान चोरी मामले में 39 घंटे की पुलिस रिमांड के दौरान मुख्य आरोपी टिन्नू यादव ने पूछताछ में कई अहम दावे किए हैं. पुलिस उसके बयानों का सत्यापन कर रही है. शुरुआती जांच में संकेत मिले हैं कि दान चोरी का कथित खेल लंबे समय से चल रहा था.

टिन्नू यादव को जेल ले जाती पुलिस/ Video Screengrab
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अयोध्या में राममंदिर दान चोरी मामले की जांच अब ऐसे मोड़ पर पहुंच गई है, जहां हर दिन पूछताछ में नए खुलासे हो रहे हैं. इसी कड़ी में 39 घंटे की पुलिस कस्टडी रिमांड के दौरान मुख्य आरोपी रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव से लंबी पूछताछ की गई. पुलिस सूत्रों के मुताबिक पूछताछ के दौरान आरोपी ने कई अहम दावे किए हैं, जिनमें कुछ लोगों की कथित भूमिका का भी जिक्र किया गया है. हालांकि पुलिस ने अभी तक इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है और फ़िलहाल सभी तथ्यों का अलग-अलग स्तर पर सत्यापन भी किया जा रहा है.

लंबे समय से चल रही थी कथित चोरी

जांच से जुड़े सूत्रों का कहना है कि दान चोरी का यह मामला कोई एक-दो दिन की घटना नहीं था. पूछताछ और शुरुआती जांच में संकेत मिले हैं कि यह गतिविधि लंबे समय से चल रही थी. पूछताछ के दौरान आरोपी ने दावा किया कि चोरी से मिलने वाली रकम का बंटवारा पहले से तय तरीके से किया जाता था. उसने यह भी कहा कि वह सबसे बड़ा हिस्सा इसलिए लेता था क्योंकि उसे कथित तौर पर कई स्तरों तक रकम पहुंचानी पड़ती थी. फिलहाल पुलिस इस दावे की भी जांच कर रही है.

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भतीजे को लगाया हिसाब रखने के लिए

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पूछताछ में सामने आई जानकारी के अनुसार समय बीतने के साथ टिन्नू यादव को अपने साथ काम करने वालों पर शक होने लगा था. उसे लगने लगा कि गणना कक्ष में दानपात्रों से निकाली जा रही रकम की पूरी जानकारी उसे नहीं दी जा रही है. इसी वजह से उसने अपने भतीजे मनीष यादव को गणना कर्मचारी के रूप में तैनात कराने का इंतजाम किया. सूत्रों के अनुसार मनीष सिर्फ नोटों की गिनती तक सीमित नहीं था. वह कथित तौर पर पूरे हिसाब-किताब पर नजर रखता था. किस दिन कितनी रकम निकली, किसे कितना हिस्सा मिला और किसने कितना पैसा निकाला, इन सभी बातों का रिकॉर्ड रखने की जिम्मेदारी भी उसी के पास थी. जांच एजेंसियां अब इन दावों से जुड़े दस्तावेज और अन्य सबूत तलाश रही हैं.

तय जिम्मेदारियों के साथ काम करता था नेटवर्क

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पुलिस की पूछताछ में यह भी दावा सामने आया है कि कथित गिरोह में हर व्यक्ति की अलग भूमिका तय थी. कोई दानपात्रों से रकम निकालता था, कोई निगरानी करता था और कोई पूरे बंटवारे का हिसाब रखता था. सूत्रों का कहना है कि आरोपी ने कुछ बैंक कर्मचारियों सहित अन्य लोगों के नाम भी लिए हैं. हालांकि पुलिस फिलहाल किसी भी नाम की पुष्टि करने से बच रही है और सभी तथ्यों की स्वतंत्र जांच कर रही है. जांच अधिकारी अब मोबाइल रिकॉर्ड, वित्तीय लेनदेन, सीसीटीवी फुटेज और अन्य तकनीकी साक्ष्यों के जरिए आरोपी के बयानों का मिलान कर रहे हैं. जांच का फोकस इस बात पर भी है कि क्या यह पूरा नेटवर्क सुनियोजित तरीके से संचालित हो रहा था.

पहले बचने की कोशिश, फिर बदल गए बयान

सूत्रों के अनुसार पूछताछ की शुरुआत में टिन्नू यादव ने खुद को निर्दोष बताने की कोशिश की. उसने कथित तौर पर चोरी की जिम्मेदारी दूसरे आरोपियों पर डालने का प्रयास किया. लेकिन जब पुलिस ने मोबाइल चैट, कॉल डिटेल और अन्य आरोपियों के बयानों के आधार पर लगातार सवाल किए तो उसके जवाब बदलने लगे. बताया जा रहा है कि पूछताछ के दौरान पुलिस ने उससे दानपात्रों से निकलने वाले आभूषणों, सुरक्षा व्यवस्था, कथित तौर पर सीसीटीवी फुटेज से जुड़े मामलों, हुंडियों की चाबियों और कई अन्य बिंदुओं पर भी सवाल पूछे. साथ ही मोबाइल में मिले कई नंबरों और बातचीत के रिकॉर्ड के बारे में भी जानकारी मांगी गई.

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कई नामों का किया जिक्र, जांच जारी

पुलिस सूत्रों के मुताबिक रिमांड के दौरान टिन्नू यादव ने पूर्व महासचिव चंपत राय, ट्रस्टी अनिल मिश्रा, गोपाल राव समेत कुछ अन्य लोगों का भी जिक्र किया और उनकी कथित भूमिका को लेकर कई दावे किए. हालांकि यह स्पष्ट करना जरूरी है कि फिलहाल ये आरोपी के बयान हैं, जिनकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है. सूत्रों का कहना है कि शुरुआत में आरोपी हर सवाल का अलग-अलग जवाब दे रहा था. कभी वह बात बदल देता था तो कभी एक ही सवाल पर अलग समय में अलग बयान देता था. इसके बाद पुलिस ने उसके बयानों का आपस में मिलान किया, जिसमें कई विरोधाभास सामने आए. जब इन विरोधाभासों के आधार पर दोबारा पूछताछ हुई तो आरोपी ने कुछ और जानकारियां साझा कीं.

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बताते चलें कि राममंदिर दान चोरी मामले में अब सबसे अहम चरण आरोपी के दावों का सत्यापन है. पुलिस का कहना है कि केवल पूछताछ में दिए गए बयानों के आधार पर किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंचा जा सकता. जांच एजेंसियां हर दावे को दस्तावेजों, डिजिटल सबूतों और अन्य साक्ष्यों से मिलान कर रही हैं. यदि जांच में आरोपी के दावों की पुष्टि होती है तो इस मामले में नए लोगों की भूमिका की भी जांच हो सकती है और कानूनी कार्रवाई का दायरा बढ़ सकता है. फिलहाल पूरे मामले पर सभी की नजर पुलिस जांच और उसके आधिकारिक निष्कर्षों पर टिकी हुई है.

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