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जामिया के VC मजहर आसिफ के 'महादेव डीएनए' बयान पर शुरू हुआ विवाद, कट्टरपंथियों ने किया जमकर विरोध

Mahadev DNA Statement: विश्वविद्यालय के परिसर में आयोजित ''युवा कुंभ'' कार्यक्रम में उन्होंने एक ऐसा बयान दिया , जो अब सोशल मीडिया पर वायरल हो चुका है. इस बयान में उन्होंने कहा कि हम सभी भारतीयों का DNA भगवान महादेव से जुड़ा है. जैसे ही यह वीडियो वायरल हुआ , खासकर छात्रों और कुछ शैक्षिक समुदाय के हिस्सों से तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आई..

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30 Apr 2026
( Updated: 30 Apr 2026
08:51 PM )
जामिया के VC मजहर आसिफ के 'महादेव डीएनए' बयान पर शुरू हुआ विवाद, कट्टरपंथियों ने किया जमकर विरोध
Image Source: IANS /CAnva
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Vice Chancellor Mazhar Asif's Mahadev DNA statement: जामिया मिलिया इस्लामिया के कुलपति , मजहर आसिफ, अपने एक बयान को लेकर विवादों में घिर गए है. मंगलवार को विश्वविद्यालय के परिसर में आयोजित ''युवा कुंभ'' कार्यक्रम में उन्होंने एक ऐसा बयान दिया , जो अब सोशल मीडिया पर वायरल हो चुका है. इस बयान में उन्होंने कहा कि हम सभी भारतीयों का DNA भगवान महादेव से जुड़ा है. जैसे ही यह वीडियो वायरल हुआ , खासकर छात्रों और कुछ शैक्षिक समुदाय के हिस्सों से तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आई..

महादेव का डीएनए हमारे डीएनए में समाहित है

पारंपरिक भारतीय धर्म, संस्कृति और एकता पर बल देते हुए, मजहर आसिफ ने अपने भाषण में कहा, “यहां बैठे सभी लोग अलग-अलग भाषाओं, संस्कृतियों, धर्मों और भौगोलिक क्षेत्रों से आते हैं. फिर भी, हम भारतीय हैं, क्योंकि महादेव का डीएनए हमारे डीएनए में समाहित है.” इस बयान का उद्देश्य राष्ट्रीय एकता और विविधता में एकता को बढ़ावा देना था, लेकिन यह बयान अब विवाद का कारण बन गया है..

छात्र संगठनों ने किया विरोध

आसिफ का यह बयान छात्र संगठनों द्वारा तीखी आलोचना का शिकार हो गया है. स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (SFI), जो जामिया मिलिया में एक प्रमुख छात्र संगठन है, ने इस बयान का कड़ा विरोध किया है..एसएफआई का कहना है कि इस प्रकार का बयान अवैज्ञानिक है और अकादमिक मानकों के खिलाफ है, खासकर जामिया मिलिया जैसे केंद्रीय विश्वविद्यालय में. एसएफआई ने अपने बयान में यह भी आरोप लगाया कि छात्रों के विरोध प्रदर्शन के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने उन पर कार्रवाई की.
एसएफआई के सदस्यों का कहना था, "जामिया मिलिया इस्लामिया एक शैक्षिक संस्थान है, जो विज्ञान, तर्क और तात्त्विक सोच के लिए प्रसिद्ध है. ऐसे बयान यहां नहीं दिए जाने चाहिए." एसएफआई ने इसे एक धार्मिक और सांस्कृतिक विचारधारा के रूप में देखा, जिसे शिक्षा संस्थानों में जगह नहीं मिलनी चाहिए.

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आरएसएस और "युवा कुंभ" कार्यक्रम

यह विवाद तब सामने आया जब राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम "युवा कुंभ" में मजहर आसिफ ने यह बयान दिया. इस कार्यक्रम का उद्देश्य भारतीय संस्कृति, राष्ट्रीयता और पहचान पर चर्चा करना था. आरएसएस अक्सर ऐसे आयोजनों को संस्कार और राष्ट्रीय एकता को बढ़ावा देने का प्रयास मानता है.
हालांकि, आरएसएस ने इस बयान पर कोई विशेष प्रतिक्रिया नहीं दी, लेकिन इसके आयोजनों में अक्सर सांस्कृतिक और राष्ट्रीय मुद्दों पर चर्चा होती है. "युवा कुंभ" कार्यक्रम, जिसमें ये बयान दिया गया था, आरएसएस के जनसंपर्क अभियान का हिस्सा है, जो युवा पीढ़ी को अपने सांस्कृतिक मूल्यों और राष्ट्रवाद से जोड़ने की कोशिश करता है.

जामिया में वैचारिक विविधता पर बहस

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इस पूरे विवाद ने विश्वविद्यालयों में वैचारिक विविधता और विचारों के स्वतंत्र आदान-प्रदान पर एक नई बहस को जन्म दिया है. जामिया मिलिया इस्लामिया, जो हमेशा अकादमिक उत्कृष्टता के लिए प्रसिद्ध रहा है, अब इस सवाल का सामना कर रहा है कि क्या ऐसी सांस्कृतिक और धार्मिक टिप्पणियां विश्वविद्यालयों के वातावरण के लिए उपयुक्त हैं या नहीं.

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विभिन्न छात्र संगठनों और शिक्षकों ने इस पूरे मामले पर प्रतिक्रिया दी है. कुछ का कहना है कि विश्वविद्यालयों में स्वतंत्रता और विचारों की विविधता होनी चाहिए, लेकिन यह भी जरूरी है कि बयान देने वाले व्यक्तियों को संदर्भ और विज्ञान का ध्यान रखना चाहिए..एक शिक्षक ने कहा, "इस तरह के बयानों से किसी भी शैक्षिक संस्थान की साख पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है."

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