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भारत को चीन से मिल सकता है 'खास तोहफा', शी जिनपिंग के दौरे में दुर्लभ खनिजों पर हो सकती है अहम डील
BRICS समिट के दौरान भारत और चीन के बीच दुर्लभ खनिजों की आपूर्ति को लेकर समझौता होने के आसार हैं. सूत्रों के मुताबिक PM मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की 12 सितंबर को द्विपक्षीय वार्ता हो सकती है, जिसमें इस डील पर चर्चा और हस्ताक्षर संभव हैं.
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BRICS Summit 2026: नई दिल्ली में होने वाला ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन भारत के लिए सिर्फ कूटनीतिक लिहाज से ही अहम नहीं है, बल्कि आर्थिक और रणनीतिक मोर्चे पर भी कई नए रास्ते खोल सकता है. 12 और 13 सितंबर को होने वाले इस सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कई देशों के नेताओं के साथ द्विपक्षीय बातचीत प्रस्तावित है. इनमें चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ होने वाली मुलाकात पर खास नजर रहेगी.
हिंदुस्तान की एक रिपोर्ट के मुताबिक, इन बैठकों में दुर्लभ खनिज (Rare Earth Elements) का मुद्दा भी महत्वपूर्ण हो सकता है. भारत और चीन के बीच इन खनिजों की आपूर्ति को लेकर बातचीत आगे बढ़ने की खबरें हैं. हालांकि, किसी औपचारिक समझौते पर हस्ताक्षर की अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है. चीन दुनिया में दुर्लभ खनिजों की प्रोसेसिंग में सबसे आगे है और हाल के वर्षों में इनकी आपूर्ति को लेकर वैश्विक स्तर पर चिंता बढ़ी है.
चीन से क्यों अहम है बातचीत?
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दुर्लभ खनिज आधुनिक उद्योगों के लिए बेहद जरूरी हैं. इनका इस्तेमाल इलेक्ट्रिक वाहनों, इलेक्ट्रॉनिक्स, पवन टर्बाइन, रक्षा उपकरणों और कई हाईटेक उत्पादों में होता है. ऐसे में इनकी लगातार और भरोसेमंद सप्लाई भारत के लिए रणनीतिक जरूरत बन गई है.हाल के समय में भारत ने चीन के साथ व्यापार और तकनीकी आपूर्ति से जुड़े कई मुद्दे उठाए हैं. ब्रिक्स के दौरान होने वाली उच्चस्तरीय बातचीत में निवेश और हाईटेक सामान की आपूर्ति के साथ महत्वपूर्ण खनिजों का मुद्दा भी चर्चा में आ सकता है.
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भारत के पास भी है बड़ा खजाना
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दिलचस्प बात यह है कि भारत खुद दुर्लभ खनिज संसाधनों के मामले में दुनिया में तीसरे स्थान पर है. सरकारी आंकड़ों के मुताबिक देश में करीब 7.23 मिलियन टन Rare Earth Oxide equivalent संसाधन दर्ज हैं. ये संसाधन आंध्र प्रदेश, ओडिशा, तमिलनाडु, केरल, पश्चिम बंगाल, झारखंड, गुजरात और महाराष्ट्र समेत कई राज्यों में पाए गए हैं. इसके अलावा गुजरात और राजस्थान के कुछ हिस्सों में हार्ड रॉक से जुड़े संसाधन भी मौजूद हैं. समस्या यह है कि इन संसाधनों को निकालना और उन्हें उच्च गुणवत्ता वाले उत्पादों में बदलना आसान नहीं है. भारत में कई दुर्लभ खनिज संसाधनों की ग्रेड कम है और कुछ भंडार रेडियोधर्मिता से जुड़े होने के कारण इनके प्रसंस्करण की प्रक्रिया जटिल और महंगी हो जाती है. इसी चुनौती को देखते हुए सरकार ने राष्ट्रीय महत्वपूर्ण खनिज मिशन शुरू किया है. इसका मकसद खोज, खनन, प्रसंस्करण और मूल्यवर्धन की घरेलू क्षमता को मजबूत करना है.
रूस भी बढ़ा सकता है भारत का साथ
दुर्लभ खनिजों के मामले में रूस भी भारत के साथ सहयोग बढ़ाने में रुचि दिखा रहा है. क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने कहा है कि भारत और रूस के बीच Rare Earths की खोज में सहयोग पर बातचीत हो रही है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की प्रस्तावित बैठक में भी इस मुद्दे पर चर्चा हो सकती है.
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बताते चलें कि ब्रिक्स शिखर सम्मलेन भारत के लिए एक साथ कई मोर्चों पर आगे बढ़ने का अवसर बन सकता है. चीन से सप्लाई, रूस के साथ एक्सप्लोरेशन और घरेलू स्तर पर खनिज संसाधनों के विकास की कोशिशें मिलकर भारत की रणनीतिक आत्मनिर्भरता को मजबूत कर सकती हैं. आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि दिल्ली में होने वाली इन बैठकों से दुर्लभ खनिजों के मोर्चे पर कोई ठोस नतीजा निकलता है या नहीं. लेकिन क़यास लगाए जा रहे हैं कि भारत के पक्ष में बात बन सकती है.