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कछुए-खरगोश का खेल रहा Haryana का अखाड़ा, जानिए BJP ने कैसे धीमी चाल चलकर जीता चुनाव ?
हरियाणा में चुनाव प्रचार के दौरान कांग्रेस लगातार कह रही थी कि इस बार जीत उनकी होगी। लेकिन रिजल्ट ने न सिर्फ कांग्रेस को बल्की सभी को चौंका दिया। बीजेपी की जीत हुई और 48 सीटों के बहुमत के साथ सरकार बना रही है। इस वीडियो में हम बात करेंगे BJP की उन स्ट्रैटिजी के बारे में जिसके दम पर बीजेपी हरियाणा में जीत पाई है।
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Haryana विधानसभा चुनाव, जिसके रिजल्ट ने सभी को चौंका दिया। किसी को नहीं लगा था कि बीजेपी जीत पाएगी। लेकिन सभी के सोच से परे बीजेपी ने हैट्रीक लगा दी। ऐसे में एक सवाल है जो कांग्रेस बार बार ये कह रही थी कि हरियाणा में कांग्रेस बहुमत के साथ आ रही है। भूपेंद्र हुड्डा भी यही कह रहें थे कि कांग्रेस जीत रही है। मगर ऐसा क्या हुआ कि कांग्रेस हार गई। आज यही बात हम आपको बताएंगे।
सैनी को सीएम बनाने की चाल
हरियाणा में जाटों के अलावा पंजाबी, खत्री जैसी दूसरी जाती है। बीजेपी ने इन्हीं गैर जाट वोटर्स पर अपनी पकड़ बनाकर रखी। पहले मनोहर लाल खट्टर और फिर नयाब सिंह सैनी पर अपना दाव खेलकर बीजेपी ने नॉन जाट वोटर्स को साधने की कोशिश की थी। क्योंकि पिछली दो लकसभा चुनावों में बीजेपी ने इनके ही दम पर जीत हासिल की थी। ऐसे में बार बार हुड्डा द्वारा किया जा रहा दावा फेल हुआ।
गैर जाट वोटों में सेंधमारी
कांग्रेस की चुनावी रणनीति इस बार जाट और दलित वोटर्स को ही साधने में रह गए। पूरी राजनीति इन्ही दोनों के ईर्द-गिर्द घुमती रह गई। हरियाणा में जाटों की तादाद लगभग 25% वहीं दलितों की संख्या 22%। अब चुनाव के मेन फैक्टर्स की बात करें तो वो थी किसान और पहलवान की नाराजगी, और ये दोनों ही जाटों से जुड़े हुए है। इधर बीजेपी ने सैलजा मुद्दे को बखुबी भुनाया और नॉन जाटव वोटों में सेंधमारी की।
बीजेपी का मास्टरस्ट्रोक
हरियाणा में जाटों के दबदबा रहा है। यहां की सत्ता की कुर्सी का स्वाद सिर्फ और सिर्फ जाट नेताओं ने चखा है। ऐसे में बीजेपी ने गैर जाट वोटों पर अपना फोकस किया और उन्हें गोलबंद करती रही। जहां एक तरफ कांग्रेस हुड्डा और सुरजेवाला जैसे जाट नेता को खुद को सीएम पद का उम्मीदवार बताने में जुटे रहे, वहीं बीजेपी ने इससे दूरी बनाई। बीजेपी की INLD के साथ गठबंधन न कर जाट वोटों को अपने पाले में करने की रणनीति भी कारगर साबित हुई।
OBC समुदाय जीत की बड़ी वजह
हरियाणा में जाटों औऱ दलितों के अलावा एक बड़ी संख्या में OBC भी निवासी है। इनकी तादाद 30-35 प्रतिशत की है। और नायाब सिंह सैनी के आगे कर बीजेपी इसी फैक्टर पर जोर लगाती रही। राज्य की राजनीति में JJP-Azad Samaj Party or BSP-INLD को आप भले ही इस चुनाव में अच्छे तरीके से सामने आते न देख पा रहें हो, लेकिन फैक्ट तो यही है कि इन पार्टियों ने जाट औऱ दलित वोटर्स को ही अपने पाले में करने की कोशिश की। किसी भी पार्टी ने OBC के उपर ध्यान नगहीं दिया। ऐसे में ये बीजेपी के लिए संजिवनी साबित हुआ।
कुल मिलाकर देखे तो परंपरागत तौर पर हरियाणा का समाज 36 बिरादरी से बना समाज है, ऐसे में राजनीतिक पार्टियां, चुनावी रणनीति बनाते वक्त इस फैक्टर का खासतौर से ध्यान रखती हैं।राज्य के चुनाव परिणाम से यह तथ्य साबित हो गया कि राज्य को समझना है तो 36 बिरादरियों की पॉलिटिक्स को समझना होगा। ऐसा ही बीजेपी करती दिखी। और आकिर में रिजल्ट क्या है वो सभी को पता है। बीजेपी ने अपनी धीमी चाल से बाजी मारी है।
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